मुंबई के भांडुप में बागी सांसद संजय दिना पाटिल के गढ़ में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बागी नेताओं और बीजेपी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने रैली में जुटी भीड़ की ओर इशारा करते हुए कहा, 'मेरे सामने सिर्फ शिवसैनिक नहीं, बल्कि जलती हुई मशालें खड़ी हैं.'
उद्धव ठाकरे ने कहा, 'मैं गद्दारों और उनके आकाओं का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने इन मशालों को फिर से जला दिया. मैंने पार्टी स्थापना दिवस पर जो वादा किया था, अब उस पर अमल शुरू कर दिया है. जहां-जहां विश्वासघात हुआ है, वहां-वहां मैं खुद जाकर मतदाताओं से माफी मांग रहा हूं.'
गलत उम्मीदवार देने के लिए माफी: उद्धव
उन्होंने कहा कि जनता ने पाला बदलने वाले सांसदों को शिवसेना और मशाल चुनाव चिह्न देखकर चुना था. उन्हें उम्मीदवार बनाना हमारी गलती थी और उसके लिए मैं आप सबसे माफी मांगता हूं. उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना को कई बार तोड़ने और कमजोर करने की कोशिश की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने हमेशा शिवसेना को खत्म करने की साजिश रची, जबकि कांग्रेस ने कभी ऐसा प्रयास नहीं किया.
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उन्होंने कहा, 'हमने 30 साल तक कांग्रेस से लड़ाई लड़ी, लेकिन उसने कभी हमारे नेताओं को चुराने या शिवसेना को उस तरह खत्म करने की कोशिश नहीं की, जैसा बीजेपी ने किया. जब बीजेपी को सड़क पर कोई पूछता तक नहीं था, तब हमने उसका हाथ पकड़कर उसे बड़ा किया. उस समय उनके पास पूरे देश में सिर्फ दो सांसद थे. बीजेपी के पास अपना कुछ नहीं है. यह दूसरों के बच्चों को चुराकर बड़ी हुई पार्टी है.'
उद्धव ठाकरे का अमित शाह पर निशाना
उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो लोग लड़ना चाहते हैं, वे खुले मैदान में आकर लड़ें. उन्होंने बिना नाम लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, 'कल एक बाहरी व्यक्ति कोल्हापुर आए थे. मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि शिवसेना एक ही है और वह मेरी, हमारी और बालासाहेब की है. बीजेपी में कोई भी नेता बन सकता है. लेकिन बाहरी लोग यह तय नहीं कर सकते कि शिवसेना का नेतृत्व कौन करेगा. लोग आपसे सिर्फ उस कुर्सी की वजह से डरते हैं, जिस पर आप अभी बैठे हैं. कुर्सी हटते ही आपकी कोई पहचान नहीं बचेगी.'
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोल्हापुर की रैली में कहा था कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के अलावा कोई दूसरी शिवसेना नहीं है. बता दें कि उद्धव ठाकरे के पिता बाल ठाकरे ने 1966 में शिवसेना की स्थापना की थी. जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई. फरवरी 2023 में चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता देते हुए पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किया था, जबकि उद्धव ठाकरे गुट को शिवसेना (यूबीटी) नाम और मशाल चुनाव चिन्ह दिया.
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बीजेपी ने पीठ में छुरा घोंपा: उद्धव ठाकरे
उद्धव ठाकरे ने बागी सांसदों पर तंज कसते हुए कहा, 'मैं इन गद्दारों से पूछता हूं कि उनकी दाढ़ी भी खुद की है या वह भी किराए पर ली गई है? आप दाढ़ी किराए पर ले सकते हैं, गाड़ी किराए पर ले सकते हैं, कुर्सी किराए पर ले सकते हैं, लेकिन ऐसे वफादार लोग कभी नहीं खरीद सकते जो आपके लिए जान देने को तैयार हों. अगर उन्हें सीट नहीं मिली होती, तो क्या वे सांसद बन पाते? और अगर सांसद नहीं बनते, तो क्या किसानों को गारंटीड दाम मिलते? सम्मान पाने के लिए भी काबिलियत चाहिए.'
उद्धव ने कहा कि बीजेपी ने शिवसेना की पीठ में छुरा घोंपा और वादाखिलाफी की. उन्होंने दावा किया कि किसानों की कर्जमाफी का वादा उनकी सरकार ने पूरा किया था. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर बीजेपी अगले चुनाव में यह सीट छोड़ने वाली है, तो अभी घोषणा करे कि यह सीट एकनाथ शिंदे को दे रही है. शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने अभिजीत दिपके की सीजेपी का जिक्र करते हुए कहा, 'इन कॉकरोचों ने बीजेपी का घमंड तोड़ दिया है. उनकी सदस्य संख्या बीजेपी से ज्यादा है.
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उद्धव सेना के कितने सांसद हुए बागी?
दिल्ली में 17 जून को हुई शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में सांसद संजय दिना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व), संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी), नागेश पाटिल-आष्टीकर (हिंगोली) और ओमप्रकाश राजे निंबालकर (धाराशिव) शामिल नहीं हुए थे, जिसके बाद उनके दल बदलने की अटकलें तेज हो गईं. निंबालकर और आष्टीकर ने रविवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना जॉइन करने की पुष्टि कर दी. लोकसभा चुनाव 2024 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसद जीते थे.
ऋत्विक भालेकर