महाराष्ट्र: बारिश में हुई देरी, प्रशासन ने किसानों से की ये अपील

महाराष्ट्र के ठाणे जिला प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि क्षेत्र में कम से कम 100 मिमी बारिश होने तक खरीफ फसलों की बुवाई न करें. कृषि अधीक्षक रामेश्वर पाचे ने मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन करने की अपील की है. बारिश में देरी को देखते हुए जल्दी तैयार होने वाली धान की किस्में अपनाने और नर्सरी में एक प्रतिशत यूरिया घोल के छिड़काव की सिफारिश की गई है.

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ठाणे में अब तक हुई है सिर्फ 26 प्रतिशत बारिश. (Photo: ITG) ठाणे में अब तक हुई है सिर्फ 26 प्रतिशत बारिश. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • ठाणे,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:52 PM IST

महाराष्ट्र में ठाणे ज़िला प्रशासन ने किसानों को खरीफ़ फ़सलों की बुवाई टालने की सलाह दी है. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी. ज़िला कृषि अधीक्षक अधिकारी रामेश्वर पाचे ने किसानों से अपील की है कि वे बुवाई तब तक न करें जब तक कि इलाके में कम से कम 100 मिमी बारिश न हो जाए, ताकि पौधे ठीक से पनप सकें.

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एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि मौसम में बदलाव को देखते हुए किसानों को डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जारी मौसम-आधारित कृषि सलाह का सख्ती से पालन करना चाहिए. कृषि विभाग ने बारिश में देरी के असर को कम करने के लिए एक आपातकालीन फ़सल योजना मॉडल भी तैयार किया है.

सूखे जैसे हालात से निपटने के लिए प्रशासन ने जल्दी तैयार होने वाली धान की किस्मों की सलाह दी है. सलाह में कहा गया है कि नर्सरी के चरण में एक प्रतिशत यूरिया घोल का छिड़काव किया जाए, ताकि पौधों में पानी की कमी सहने की क्षमता विकसित हो सके.

अभी तक हुई है सिर्फ 26 प्रति शत बारिश
अधिकारियों ने बताया कि ज़िला परिषद आधुनिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देने के लिए सेस ग्रांट (उपकर अनुदान) के तहत 500 टिलर मशीनें बांटेगी. अधिकारियों ने ज़िले में खरीफ़ सीज़न के उत्पादन को स्थिर करने के लिए सब्सिडी वाले बीज बांटने के साथ-साथ कई तकनीकी और 'अल नीनो' जागरूकता अभियान भी चलाए हैं.

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मंगलवार को राज्य कैबिनेट के सामने पेश की गई फ़सल की स्थिति की समीक्षा के अनुसार महाराष्ट्र में जून के पहले पखवाड़े में सामान्य बारिश का केवल 26 प्रतिशत ही हुआ, जिसके कारण सरकार ने किसानों को फ़सल की बुवाई में "जल्दबाजी न करने" की सलाह दी है. कैबिनेट ने मॉनसून में देरी और पानी के घटते भंडार पर चिंता जताई और पानी का समझदारी से इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

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