केतन हत्याकांड में बड़ा खुलासा, सिया-चेतन के बीच हुई थीं 2004 कॉल्स, 238 घंटे की बातचीत

केतन की मौत के बाद अंतिम संस्कार के चार दिन बाद सिया गोयल उसके घर पहुंची. बातचीत के दौरान मृतक की बहन को उसके जवाबों पर शक हुआ. इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने जांच तेज की. जांच में सिया और चेतन चौधरी के बीच 2004 कॉल्स, 238 घंटे की बातचीत, बंद इंटरनेट और संदिग्ध लोकेशन जैसी कई बातें सामने आईं.

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अंतिम संस्कार के चार दिन बाद सिया की एंट्री. (Photo: ITG) अंतिम संस्कार के चार दिन बाद सिया की एंट्री. (Photo: ITG)

ओमकार

  • पुणे ,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:41 PM IST

ऐतिहासिक लोहगढ़ किले में 18 जून को हुई 26 वर्षीय केतन विशाल अग्रवाल की मौत के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पुणे पुलिस का दावा है कि केतन की मौत कोई दुर्घटना नहीं थी, बल्कि यह एक प्लान के तहत की गई हत्या थी. जांच के दौरान सामने आए डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड और संदिग्ध गतिविधियों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी.

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इस केस की सबसे अहम कड़ी तब सामने आई, जब केतन के अंतिम संस्कार के चार दिन बाद उसकी मंगेतर सिया गोयल परिवार से मिलने उसके घर पहुंची. उस समय परिवार गहरे सदमे में था. बातचीत के दौरान केतन की बहन को सिया के कुछ जवाबों पर संदेह हुआ. उसे लगा कि घटना को लेकर पूरी सच्चाई सामने नहीं आ रही है. परिवार की ओर से जताए गए इसी शक ने पुलिस जांच को नई दिशा दे दी.

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने सिया गोयल और चेतन चौधरी के कॉल रिकॉर्ड खंगाले. इसमें पता चला कि 1 जनवरी से जून के बीच दोनों के बीच 2004 बार बातचीत हुई थी. पुलिस के अनुसार, पिछले छह महीनों में दोनों ने करीब 238 घंटे फोन पर बात की थी. इतनी लंबी और लगातार बातचीत ने जांच एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा.

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बहन को हुआ शक, 4 दिन बाद पहुंची थी सिया

पुलिस जांच में 18 जून की गतिविधियां भी संदेह के घेरे में आ गईं. जांचकर्ताओं के मुताबिक, घटना वाले दिन सुबह 7 बजे से शाम 5 बजकर 40 मिनट तक चेतन चौधरी का इंटरनेट बंद रहा. इस अवधि को पुलिस ने बेहद महत्वपूर्ण माना और उसकी गतिविधियों की बारीकी से पड़ताल शुरू की.

25 नवंबर को होनी थी केतन और सिया की शादी

जांच में यह भी सामने आया कि चेतन चौधरी कथित तौर पर अपना मोबाइल फोन दुकान पर छोड़कर गया था. पुलिस का दावा है कि वह अपने कर्मचारी का मोबाइल लेकर लोहगढ़ पहुंचा था. जांचकर्ताओं को शक है कि ऐसा अपनी वास्तविक लोकेशन छिपाने और मोबाइल ट्रैकिंग से बचने के लिए किया गया.

मामले को और पुख्ता करने के लिए पुलिस ने 18 जून को चेतन के मोबाइल पर आने वाली सभी कॉल्स की जांच की. जिन लोगों ने उस दिन फोन किया था, उनसे पूछताछ की गई. पुलिस के अनुसार, कई कॉलर्स ने बताया कि फोन पर खुद चेतन ने बात नहीं की थी, बल्कि उसके कर्मचारियों ने कॉल रिसीव कर जवाब दिए थे. इससे जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा हो गया.

डिजिटल सुरागों ने बदली जांच की दिशा

पुलिस का कहना है कि कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट गतिविधियों, मोबाइल लोकेशन और पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों ने जांच को हत्या की साजिश की ओर मोड़ दिया. जांच में मिले तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कई महत्वपूर्ण कड़ियां जोड़ी हैं. फिलहाल मामले की जांच जारी है. हालांकि, इस पूरे केस में केतन की बहन का शुरुआती शक वह पहला सुराग साबित हुआ, जिसने एक कथित हादसे के पीछे छिपी कहानी को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई. अब पुलिस डिजिटल सबूतों और पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की परत-दर-परत जांच कर रही है.

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