BMC में शिंदे का 'पावर गेम', NCP के दोनों गुटों के पार्षदों ने थामा शिवसेना का हाथ

BMC में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने NCP के दोनों गुटों से आए चार पार्षदों के साथ अपनी ताकत 29 से बढ़ाकर 33 कर ली है. इसके साथ ही महायुति की कुल संख्या 122 पहुंच गई है. यह कदम मुंबई नगर निकाय में शिंदे गुट की पकड़ और अधिक मजबूत करेगा.

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अजित और शरद पवार गुट के पार्षद शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं. (Photo-ITG) अजित और शरद पवार गुट के पार्षद शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं. (Photo-ITG)

ऋत्विक भालेकर

  • मुंबई,
  • 02 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:08 AM IST

मुंबई की राजनीति में बड़ा फेरबदल सामने आया है. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है. सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों से नवनिर्वाचित चार नगरसेवक शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए हैं.

सूत्रों के अनुसार, अजित पवार गुट के तीन नगरसेवक और शरद पवार गुट का एक नगरसेवक आधिकारिक तौर पर शिंदे सेना के साथ जुड़ गए हैं. इसके साथ ही बीएमसी में शिवसेना (शिंदे) का एक संयुक्त विधायी समूह बनाया गया है, जिसमें NCP (अजित पवार गुट) और शरद पवार गुट के एक नगरसेवक को शामिल किया गया है.

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मंगलवार को महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति बीएमसी में खुद को दो अलग-अलग समूहों के रूप में पंजीकृत कराने जा रही है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक स्वतंत्र समूह बनाएगी, जबकि शिवसेना (शिंदे) NCP (अजित पवार गुट) और शरद पवार गुट के एक नगरसेवक के साथ संयुक्त समूह के तौर पर रजिस्ट्रेशन करेगी.

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इस राजनीतिक पुनर्संयोजन से शिंदे सेना की व्यक्तिगत संख्या 29 से बढ़कर 33 हो गई है. इसके परिणामस्वरूप, बीएमसी में महायुति की कुल ताकत 122 नगरसेवकों तक पहुंच गई है. सूत्रों का कहना है कि यह कदम आगामी प्रशासनिक और संगठनात्मक फैसलों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक रणनीतिक कदम है.

मुंबई का जनादेश महायुति के लिए ऐतिहासिक रहा. लगभग तीन दशकों से चला आ रहा ठाकरे परिवार का दबदबा इस चुनाव में टूट गया. भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने 118 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें BJP 90 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. वहीं, शिवसेना (शिंदे) ने 29 सीटें हासिल कीं.

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इसके उलट, शिवसेना (UBT) के लिए यह चुनाव निराशाजनक साबित हुआ. पार्टी को सिर्फ 65 सीटें मिलीं, जबकि 2017 में वह 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी. आठ वर्षों में पार्टी को 19 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है, जो बदलते राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करता है.

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