बाढ़ में इंसानियत की मिसाल! दरवाजे को स्ट्रेचर बना, सीने तक पानी में जान की बाजी लगा गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल

महाराष्ट्र के पालघर में मूसलाधार बारिश और बाढ़ के बीच इंसानियत की मिसाल देखने को मिली. यहां केलवे रोड की गर्भवती प्रियंका रवि यादव को प्रसव पीड़ा होने पर जलभराव के कारण एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी. ऐसे में आशा सेविका दिव्या घरात, समाजसेवक चेतन गावड़ और उनकी टीम ने घर का दरवाजा स्ट्रेचर बनाकर महिला को सीने तक भरे पानी से निकालकर सफाले ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया.

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गर्भवती को दरवाजे के स्ट्रेचर से अस्पताल ले जाते लोग. (Photo: Screengrabs) गर्भवती को दरवाजे के स्ट्रेचर से अस्पताल ले जाते लोग. (Photo: Screengrabs)

aajtak.in

  • पालघर,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:18 AM IST

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और बाढ़ के बीच पालघर से इंसानियत और हौसले की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया. जहां चारों ओर पानी ही पानी था, वहीं कुछ लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक मां और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की जिंदगी बचा ली.

दरवाजे को बनाया स्ट्रेचर और पहुंचाया अस्पताल
केलवे रोड के हनुमानपाड़ा निवासी गर्भवती महिला प्रियंका रवि यादव को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. लेकिन लगातार बारिश के कारण इलाके के सभी रास्ते पानी में डूब चुके थे. एंबुलेंस का पहुंचना नामुमकिन था और हर पल मां और बच्चे की जिंदगी पर खतरा बढ़ता जा रहा था. ऐसे मुश्किल वक्त में आशा सेविका दिव्या घरत, समाजसेवक चेतन गावड़ और उनकी टीम किसी फरिश्ते की तरह सामने आई.

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उन्होंने एक घर का दरवाजा निकालकर उसे स्ट्रेचर बनाया और प्रियंका को उस पर लिटाकर सीने तक भरे पानी के बीच बेहद मुश्किल हालात में कई किलोमीटर तक सुरक्षित निकालकर सफाले ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया. समय रहते अस्पताल पहुंचने के कारण डॉक्टरों ने सुरक्षित प्रसव कराया और प्रियंका ने एक स्वस्थ व प्यारे से बेटे को जन्म दिया. फिलहाल मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं.

मानवीय कार्य के लिए टीम की हर कोई कर रहा सराहना
इस साहसिक और मानवीय कार्य के लिए दिव्या घरत, चेतन गावड़ और उनकी पूरी टीम की सभी सराहना कर रहे हैं. बाढ़ के बीच दो जिंदगियों को बचाने वाले ये लोग आज इलाके के लिए किसी सच्चे हीरो से कम नहीं हैं. बारिश और बाढ़ की तबाही के बीच यह घटना उम्मीद, मानवता और सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है.

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आशा सेविका दिव्या घरात ने बताया कि मैंने उस महिला की सबसे पहले बीपी चेक किया. जिसका बीपी 120 और 60 यानी  नॉर्मल था. इसके बाद मैंने उसे चेतन गावड़ के जरिए ऊपर के मकान से नीचे लाया. लेकिन मेरे पास स्ट्रेचर नहीं था तो चेतन ने दरवाजा तोड़ा और उस दरवाजे पर महिला को लिटाकर बाहर निकाला. फिर अस्पताल पहुंचवाया, जहां महिला ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया. 

(इनपुट- मोहम्मद हुसेन खान)

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