शिवसेना विवाद पर SC में 1 अगस्त को अगली सुनवाई, सीजेआई ने बड़ी बेंच के गठन के दिए संकेत

चीफ जस्टिस एनवी रमणा, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच में यह सुनवाई उद्धव गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर हुई. उद्धव ठाकरे गुट ने एकनाथ शिंदे गुट में शामिल बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है. साथ ही राज्यपाल के उस फैसले को भी चुनौती दी है, जिसमें एकनाथ शिंदे को सरकार बनाने का न्योता भेजा गया था.

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उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो) उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे (फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 20 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 2:29 PM IST
  • सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों ने मांगा जवाब
  • शिवसेना की याचिकाओं पर 1 अगस्त को होगी सुनवाई

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और एकनाथ गुट के बीच जारी सियासी जंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों से जवाब मांगा है. साथ ही मामले की सुनवाई 1 अगस्त टाल दी है. सुनवाई के दौरान सीजेआई एनवी रमणा ने इस मामले की सुनवाई के लिए बड़ी बेंच बनाने के भी संकेत दिए. हालांकि, इसे लेकर कोई आदेश जारी नहीं किया. 

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चीफ जस्टिस एनवी रमणा, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच में यह सुनवाई उद्धव गुट द्वारा दायर याचिकाओं पर हुई. उद्धव ठाकरे गुट ने एकनाथ शिंदे गुट में शामिल बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है. साथ ही राज्यपाल के उस फैसले को भी चुनौती दी है, जिसमें एकनाथ शिंदे को सरकार बनाने का न्योता भेजा गया था. 

कपिल सिब्बल ने कहा, जो कुछ महाराष्ट्र में हुआ, ऐसी परंपरा की शुरुआत हो गई. यह अच्छी नहीं है. अगर महाराष्ट्र जैसा ही हाल रहा, तो देश में कहीं भी चुनी हुई सरकार को गिराया जा सकता है. उन्होंने कहा, शिंदे गुट के विधायकों ने अपने व्यवहार से संविधान की 10 अनुसूची के प्रावधानों का उल्लंघन किया है. 

इतना ही नहीं कपिल सिब्बल ने कहा, यह मामला कोर्ट में लंबित था. 11 जुलाई को सुनवाई होनी थी. इसके बावजूद राज्यपाल ने शिंदे गुट को सरकार बनाने का न्योता भेजा. राज्यपाल ने शिंदे को शपथ दिलाई. जबकि वे जानते थे कि विधायकों के अयोग्यता का मामला अभी स्पीकर के समक्ष लंबित था. 

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कपिल सिब्बल ने विधायकों को जल्द से जल्द अयोग्य घोषित करने की अपील करते हुए कहा कि इस मामले में जितने दिनों का वक्त लगेगा वो और भी घातक हो जाएगा. सिब्बल ने तर्क दिया कि जिस कानून का काम दल बदल को रोकने के लिए बनाया गया था, उसी कानून के सहारे दल बदल को बढ़ावा दिया जा रहा है. 
 
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 10 से अधिक फैसले हैं जहां इस तरह दल बदल को एक संवैधानिक पाप कहा है. उन्होंने कहा, गुवाहाटी जाने से एक दिन पहले इन लोगो ने उपाध्यक्ष को यह कहते हुए एक मेल भेजा कि हमें आप पर भरोसा नहीं है. 

सिंघवी ने कहा कि अब बड़ा सवाल ये कि ऐसा क्यों किया गया? क्योंकि ये राबिया फैसले का दुरुपयोग करना चाहते है. सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब बागी विधायकों ने स्पीकर के खिलाफ मोशन के लिए कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी तो अयोग्यता की कार्यवाही शुरू करना गलत नहीं था. लेकिन इसके उलट हुआ डिप्टी स्पीकर की कार्यवाही पर रोक लगाई गई और इसके बाद फ्लोर टेस्ट हुआ. 

एकनाथ शिंदे की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि अयोग्यता के नियम इस मामले में लागू नही होता है. अगर किसी पार्टी में दो धड़े होते है और जिसके पास ज्यादा संख्या होती है वो कहता है कि मैं अब लीडर हूं. फिर स्पीकर मानते है तो फैसला हो जाता है. ये अयोग्यता में कैसे आएगा?

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एकनाथ शिंदे गुट का पक्ष रखते हुए वकील हरीश साल्वे ने कहा कि कहा जा रहा है कि लोकतंत्र की हत्या हुई. अपनी पार्टी के अंदर आवाज उठाना अयोग्यता का काम नहीं है. लेकिन अगर कोई स्पीकर से जा कर कहता है की मुझे इस सीएम पर भरोसा नहीं है, और ज्यादातर विधायक ऐसा करते है तो ये दलबदल नहीं है. दलबदल तब होता है जब ये विधायक किसी और पार्टी से जुड़ते. सदस्यता तभी जाती है जब कोई पार्टी छोड़ दे या व्हिप के खिलाफ वोट करे. लेकिन क्या जिसे 15-20 विधायकों का भी समर्थन न हो, उसे कोर्ट के जरिए वापास लाया जा सकता है? 

 

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