लखीमपुर हिंसा देख इंदिरा के पोते का खून खौल उठा, वरुण गांधी ने किया किसानों का समर्थन तो बोली शिवसेना

बीजेपी सांसद वरुण गांधी लगातार किसानों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं. इसके बाद शिवसेना ने सोमवार को कहा है कि सभी किसान संगठनों को इस मुद्दे पर उनके रुख की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए.

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वरुण गांधी वरुण गांधी

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 11 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 4:04 PM IST
  • वरुण गांधी का शिवसेना ने किया समर्थन
  • शिवसेना बोली- किसान नेता पारित करें प्रस्ताव
  • 'इंदिरा गांधी के पोते का खून हिंसा को देख खौल उठा'

बीजेपी सांसद वरुण गांधी लगातार किसानों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं. इसके बाद शिवसेना ने सोमवार को कहा है कि सभी किसान संगठनों को इस मुद्दे पर उनके रुख की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए. शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' के एक संपादकीय में यह भी पूछा गया कि क्या उत्तर प्रदेश के लखमीपुर खीरी में हुई भयावह घटना को देखने के बाद भी अन्य सांसदों का खून 'ठंडा' हो गया था? इस महीने की शुरुआत में खीरी में चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए थे. चार किसानों की मौत पर किसान नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया हुई, जबकि विपक्षी दलों ने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र और यूपी सरकारों पर हमला किया.

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शिवसेना ने संपादकीय में लिखा है कि वरुण गांधी इंदिरा गांधी के पोते और संजय गांधी के बेटे हैं. लखमीपुर कांड देखकर उनका खून खौल उठा और उन्होंने अपनी राय जाहिर की. वरुण ने बिना किसी परिणाम के बारे में सोचे-समझे राजनीतिक साहस दिखाया और किसानों की हत्या की निंदा की. संपादकीय में लिखा गया, ''किसान नेताओं को वरुण गांधी की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए.'' संपादकीय में कहा गया है कि सत्तारूढ़ सहयोगी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस द्वारा सोमवार को राज्य में बुलाए गए 'महाराष्ट्र बंद' उन लोगों के लिए है जो अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर सकते. 

वरुण गांधी ने लखीमपुर हिंसा को लेकर दी थी यह चेतावनी

वरुण गांधी ने रविवार को लखीमपुर खीरी की घटना को "हिंदू बनाम सिख लड़ाई" में बदलने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी थी. पीलीभीत के सांसद वरुण ने कहा था कि लखीमपुर खीरी की हिंसा एक अभिमानी स्थानीय सत्ता के सामने गरीब किसानों के क्रूर नरसंहार के बारे में है और इस मुद्दे का कोई धार्मिक अर्थ नहीं है. उन्होंने कहा, "प्रदर्शनकारी किसानों का उदारतापूर्वक वर्णन करने के लिए 'खालिस्तानी' शब्द का इस्तेमाल करना न केवल तराई के इन गौरवशाली बेटों की पीढ़ियों का अपमान है, जिन्होंने हमारी सीमाओं पर लड़ाई लड़ी और खून बहाया है. यह हमारी राष्ट्रीय एकता के लिए भी बेहद खतरनाक है.''

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शिवसेना ने आगे लिखा है कि लखीमपुर खीरी में किसानों पर हमला देश के किसानों पर हमला है. 'जय जवान-जय किसान' देश की आत्मा है. उस आत्मा को ही नष्ट करने का यह प्रयास है. दो वर्षों से तीन कृषि कानून के विरोध में किसान संघर्ष कर रहा है. गाजीपुर सीमा पर वे ठंड, धूप और बारिश में बैठे हैं. इस दौरान चार सौ आंदोलनकारी किसानों ने बलिदान दिया. इन सबसे बड़ी मतलब लखीमपुर खीरी की घटना भयंकर है. मालूम हो कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे अशीष मिश्रा को गिरफ्तार किया जा चुका है. इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष हमलावर है और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे की मांग कर रहा है.

 

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