सपने, सुकून और मुंबई का कॉलेज... जिसकी छांव में बड़ी हुईं कई पीढ़ियां, 110 साल पुराने बरगद की कहानी

मुंबई की भागदौड़, ऊंची इमारतों और ट्रैफिक के बीच एक ऐसा भी ठिकाना है, जहां पहुंचते ही शोर जैसे पीछे छूट जाता है. यहां न कोई एसी की जरूरत महसूस होती है और न ही किसी मेडिटेशन रूम की. सुकून देने का काम करता है 110 साल पुराना बरगद का पेड़, जिसे छात्र और शिक्षक सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि अपने कॉलेज का 'गार्जियन' मानते हैं.

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मुंबई के एक पेड़ से जुड़ी हैं हजारों कहानियां. (Photo: Screengrab) मुंबई के एक पेड़ से जुड़ी हैं हजारों कहानियां. (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 15 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:59 PM IST

कॉलेज की यादें अक्सर क्लासरूम, कैंटीन और दोस्तों के साथ जुड़ी होती हैं. लेकिन मुंबई के सर जेजे कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर में पढ़ने वाले कई छात्रों की सबसे खास याद किसी बिल्डिंग या कैंटीन से नहीं, बल्कि 110 साल पुराने बरगद के पेड़ से जुड़ी है.

छात्र कहते हैं कि जब प्रोजेक्ट का तनाव होता है, परीक्षा का डर होता है या बस मन भारी होता है, तो वे इस पेड़ के नीचे आकर बैठ जाते हैं. कुछ देर बाद ऐसा लगता है जैसे किसी अपने ने सिर पर हाथ रख दिया हो. यही वजह है कि कॉलेज में कई लोग इस बरगद को 'गार्जियन' या 'कॉलेज का सबसे पुराना स्टूडेंट' भी कहते हैं.

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दक्षिण मुंबई में मौजूद सर जेजे कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर का यह बरगद करीब 110 साल पुराना है. यानी जब देश आजाद भी नहीं हुआ था, तब भी यह पेड़ यहां खड़ा था. तब से लेकर आज तक न जाने कितने बैच आए, कितने छात्र इंजीनियर, आर्किटेक्ट और डिजाइनर बनकर निकले. लेकिन एक चीज नहीं बदली- इस बरगद की छांव.

कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, इसकी ऊंचाई करीब 125 फीट है और इसकी शाखाएं लगभग 85 मीटर तक फैली हुई हैं. दूर से देखने पर ऐसा लगता है, जैसे इसने पूरे कैंपस को अपनी बाहों में समेट रखा हो.

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कॉलेज के छात्रों का कहना है कि यह पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन नहीं देता, बल्कि मानसिक सुकून भी देता है. कोई यहां बैठकर असाइनमेंट पूरा करता है. कोई दोस्तों के साथ बहस करता है. कई छात्र ऐसे भी हैं, जो परीक्षा से पहले कुछ मिनट इसी पेड़ के नीचे बैठना अपनी आदत बता चुके हैं.

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एक छात्र ने कहा कि जब भी आत्मविश्वास कम होता है, यहां बैठने के बाद मन शांत हो जाता है. ऐसा लगता है जैसे घर के किसी बड़े-बुजुर्ग के साथ बैठकर बातें कर रहे हों.

इस पेड़ के 'फैन' सिर्फ छात्र नहीं हैं. कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा बताते हैं कि वे भी दिन में कुछ समय इस बरगद के नीचे जरूर बिताते हैं. उनके मुताबिक, यहां बैठने से भागदौड़ के बीच कुछ पल की शांति मिलती है. उन्होंने यह भी बताया कि कॉलेज इस पेड़ की नियमित देखभाल कराता है. समय-समय पर विशेषज्ञ इसकी जांच करते हैं, ताकि यह आने वाले वर्षों तक भी सुरक्षित रहे.

सिर्फ हरियाली नहीं, पूरा इकोसिस्टम

अगर आप इस बरगद के नीचे कुछ मिनट खड़े हो जाएं तो सिर्फ ठंडी हवा ही नहीं मिलेगी. इसकी शाखाओं पर पक्षियों के घोंसले हैं, गिलहरियां दौड़ती दिख जाती हैं और आसपास का तापमान भी कैंपस के बाकी हिस्सों से अलग महसूस होता है. यानी यह पेड़ सिर्फ एक पेड़ नहीं, अपने आप में एक छोटा-सा इकोसिस्टम है.

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भारत में बरगद को सिर्फ पेड़ नहीं माना जाता. इसे लंबी उम्र, स्थिरता और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है. कई जगह इसकी पूजा होती है और गांवों में बरगद के नीचे चौपाल लगने की परंपरा रही है. मुंबई जैसे शहर में, जहां हर खाली जमीन पर नई इमारत खड़ी होती दिखती है, वहां 110 साल पुराने इस बरगद का आज भी उसी मजबूती से खड़ा होना अपने आप में एक कहानी है.

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कॉलेज में हर साल नए छात्र आते हैं और पुराने विदा हो जाते हैं. चेहरे बदलते रहते हैं, लेकिन यह बरगद वहीं रहता है. शायद इसी वजह से कई छात्र इसे कॉलेज का 'गार्जियन' कहते हैं. जिस दौर में लोग मोबाइल की स्क्रीन के सामने सुकून ढूंढ रहे हैं, उस दौर में मुंबई का यह 110 साल पुराना बरगद बिना कुछ बोले हर दिन सैकड़ों छात्रों को छांव, ठंडी हवा और कुछ मिनट की शांति दे रहा है.

एक सदी से भी ज्यादा समय से यह बरगद हजारों सपनों, अनगिनत यादों और नई पीढ़ियों का खामोश गवाह बना खड़ा है. और शायद आने वाले कई दशकों तक इसी तरह अपनी छांव में नए सपनों को पनपते देखता रहेगा.

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(रिपोर्ट: धर्मेंद्र दुबे)

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