जम्मू कश्मीर की मेडिकल स्टूडेंट को सुप्रीम कोर्ट से राहत, एजुकेशन लोन से जुड़ी याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वह एक गरीब युवती है और बांग्लादेश में MBBS में अपना दूसरा वर्ष पूरा कर रही है. उसकी ओर से कमी है लेकिन वो एक युवा है. कई युवा गलतियां करते हैं तो क्या उनका करियर बर्बाद कर देंगे?

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Supreme court Supreme court

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 26 मार्च 2022,
  • अपडेटेड 1:53 PM IST
  • मंजूर हुआ था 30 लाख रुपये का एजुकेशन लोन
  • निगम को दूसरी किस्त जारी करने का निर्देश

मेडिकल की पढ़ाई कर रही जम्मू-कश्मीर की युवती को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली. विदेशों में मेडिकल पढ़ाई करने वाले छात्रों को शिक्षा के लिए कर्ज को लेकर हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हमें कश्मीर के युवाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है. जम्मू-कश्मीर की एक युवती डॉक्टर बनेगी ये सबके लिए गर्व की बात है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कश्मीर के युवाओं को शिक्षित करके उन्हें बढ़ावा देने की बात कही.

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मंजूर हुआ था 30 लाख रुपये का एजुकेशन लोन

पिछले साल 20 अप्रैल, 2021 को जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने राज्य के महिला विकास निगम को MBBS के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम द्वारा शुरू की गई योजना के तहत बांग्लादेश के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही युवती को वित्तीय सहायता की दूसरी किस्त जारी करने का निर्देश दिया था. निगम ने बांग्लादेश के कम्युनिटी बेस्ड मेडिकल कॉलेज में MBBS कोर्स में दाखिला लिया. दाखिला होने के बाद दिसंबर 2018 में युवती को 30 लाख रुपये का एजुकेशन लोन मंजूर किया गया था.

समय से नहीं मिली पहली किस्त

हालांकि, लोन मंजूर होने के बाद युवती ने फिर बांग्लादेश में ही दूसरे कॉलेज-ख्वाजा यूनुस अली मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया. उसका दावा है कि पहले कॉलेज में दाखिले की अंतिम तिथि से पहले निगम द्वारा पहली किस्त नहीं दी गई. लिहाजा उसे  वहां दाखिला नहीं मिल पाया तो उसे दूसरे मेडिकल कॉलेज में दाखिल होना पड़ा. इस पर निगम ने युवती की पढ़ाई के लिए दूसरी किस्त जारी करने से इनकार कर दिया. लड़की ने राहत की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की एकल जज पीठ ने यह कहते हुए रिट याचिका खारिज कर दी कि यह कांट्रेक्ट का मामला है.

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निगम को दूसरी किस्त जारी करने का निर्देश

इसके बाद मामला खंडपीठ के पास गया. डिविजन बेंच ने निगम को दूसरी किस्त जारी करने का निर्देश दे दिया. निगम ने इस निर्देश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जहां उसे मुंह की खानी पड़ी. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस गरीब युवती को बांग्लादेश के एक सामुदायिक कॉलेज में प्रवेश मिला है. उसने आपको सूचित किया होगा कि वह अपनी संस्था बदल रही है. जम्मू और कश्मीर की एक युवती डॉक्टर बन जाएगी. वहीं जम्मू और कश्मीर की वकील तरूणा ए प्रसाद ने कहा कि उसे अब तक छठा गारंटर नहीं मिल सका है.

'जरा सी गलती पर युवती का करियर नष्ट करेंगे?'

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वह एक गरीब युवती है और बांग्लादेश में MBBS में अपना दूसरा वर्ष पूरा कर रही है. उसकी ओर से कमी है लेकिन वो एक युवा है. कई युवा गलतियां करते हैं. क्या हमने युवावस्था में गलतियां नहीं की? जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमें कश्मीर के युवाओं को शिक्षित करके उन्हें बढ़ावा देने की जरूरत है. हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करने से यह नकारात्मक रूप से प्रभावित होगी. हमारा दखल इसके विपरीत काम करेगा. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप युवती की एक गलती पर उससे बड़ी गलती कर इस युवती के करियर को पूरी तरह से नष्ट करना चाहते हैं. उसे पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर ना किया जाए. मेडिकल कॉलेज ने पैसे का भुगतान न करने के कारण पहले ही उसका दाखिला रद्द कर दिया है.

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