'21वीं सदी में बदले की बात करना...', अजित डोभाल ने ऐसा क्या कहा जिस पर भड़क गईं महबूबा मुफ्ती

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के इतिहास के लिए ‘बदले’ से जुड़े बयान पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि इस तरह की भाषा नफरत को बढ़ावा देती है और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने का काम करती है, जिससे एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी पर सवाल उठते हैं.

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महबूबा ने कहा कि इस तरह की भाषा मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाती है. (File Photo: ITG) महबूबा ने कहा कि इस तरह की भाषा मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाती है. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • श्रीनगर,
  • 11 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:06 PM IST

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के उस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने इतिहास के लिए ‘बदले’ की बात कही थी. महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि इस तरह की भाषा नफरत को बढ़ावा देती है और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने का काम करती है. उन्होंने कहा कि इससे एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी की भूमिका और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

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महबूबा मुफ्ती ने साधा निशाना

महबूबा मुफ्ती ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अजित डोभाल जैसे उच्च पद पर बैठे अधिकारी, जिनकी जिम्मेदारी देश को आंतरिक और बाहरी साजिशों से बचाने की है, उन्होंने नफरत से जुड़ी एक सांप्रदायिक सोच का साथ चुना है और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने की कोशिश की है.'

उन्होंने कहा, '21वीं सदी में सदियों पुरानी घटनाओं के नाम पर बदले की बात करना महज एक संकेत है, जो गरीब और अशिक्षित युवाओं को उकसाकर उस अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए प्रेरित करता है, जो पहले से ही हर तरफ से हमलों का सामना कर रहा है.'

अजित डोभाल ने क्या कहा?

दरअसल, यह पूरा विवाद उस बयान के बाद सामने आया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने दिल्ली में 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' के उद्घाटन समारोह में दिया था. अपने संबोधन में डोभाल ने कहा, 'आज का स्वतंत्र भारत हमेशा से उतना स्वतंत्र नहीं था, जितना अब दिखाई देता है. इसके लिए हमारे पूर्वजों ने बड़े बलिदान दिए. उन्होंने गहरे अपमान सहे और लंबे समय तक बेबसी के दौर देखे. कई लोगों को फांसी पर चढ़ाया गया. हमारे गांव जलाए गए. हमारी सभ्यता को नष्ट किया गया. हमारे मंदिरों को लूटा गया और हम मूक दर्शक बनकर देखते रह गए. यह इतिहास आज के भारत के हर युवा के सामने एक चुनौती रखता है, जिसके भीतर यह आग होनी चाहिए.' 

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अजित डोभाल ने कहा, ''बदला' शब्द शायद सही न लगे, लेकिन बदला अपने आप में एक बड़ी ताकत है. हमें अपने इतिहास के लिए बदला लेना होगा. हमें इस देश को उस स्थिति तक वापस ले जाना है, जहां हम अपने अधिकारों, अपने विचारों और अपने विश्वासों के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें.'

'हमें इतिहास का सबक याद रखना होगा'

उन्होंने आगे कहा, 'हमारी सभ्यता बेहद विकसित थी. हमने कभी किसी के मंदिर नहीं तोड़े. हमने कहीं जाकर लूटपाट नहीं की. जब दुनिया का बड़ा हिस्सा बेहद पिछड़ा हुआ था, तब हमने किसी देश या किसी विदेशी लोगों पर हमला नहीं किया. लेकिन हम अपनी सुरक्षा और खुद पर मंडराते खतरों को समझने में असफल रहे. जब हम उनके प्रति उदासीन बने रहे, तब इतिहास ने हमें एक सबक सिखाया. क्या हमने वह सबक सीखा. क्या हम उस सबक को याद रखेंगे. अगर आने वाली पीढ़ियां उस सबक को भूल गईं, तो यह इस देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी.'

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