जम्मू डिवीज़न में ड्रग्स के खिलाफ चल रहे अभियान के अच्छे नतीजे सामने आए हैं. इसके तहत 700 से ज़्यादा ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया है और 45 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति ज़ब्त या ध्वस्त की गई है. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी.
अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों ने भारी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए हैं. ड्रग तस्करी के नेटवर्क तोड़े हैं और 'नशा मुक्त J-K अभियान' के तहत नशीली दवाओं के दुरुपयोग की समस्या को रोकने और नशा-मुक्त समाज को बढ़ावा देने के लिए पुनर्वास के प्रयास तेज़ किए हैं.
उन्होंने बताया कि यह जानकारी जम्मू के डिवीज़नल कमिश्नर रमेश कुमार और जम्मू ज़ोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस भीम सेन तूती की संयुक्त अध्यक्षता में हुई बैठक में दी गई. इस बैठक में इलाके में 100 दिन के ड्रग-विरोधी अभियान की दो महीने की प्रगति की समीक्षा की गई.
अब तक 701 ड्रग तस्करों को किया गया गिरफ्तार
प्रवक्ता ने बताया कि बैठक में जानकारी दी गई कि ड्रग तस्करों के खिलाफ कुल 598 FIR दर्ज की गईं, जिनमें अब तक 701 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है. जबकि जम्मू में ड्रग्स से जुड़ी गतिविधियों वाले 155 हॉटस्पॉट की पहचान की गई.
उन्होंने बताया कि ड्रग तस्करों के खिलाफ 24 PIT-NDPS डिटेंशन ऑर्डर भी जारी किए गए और भारी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए. जिनमें 14 किलो से ज़्यादा हेरोइन, 49 किलो गांजा, 3.712 किलो चरस और 204.5 किलो पोस्ता भूसा (poppy straw) शामिल है.
प्रवक्ता ने बताया कि अवैध फसलों को भी नष्ट किया गया. इसके अलावा ड्रग तस्करों की 19.30 करोड़ रुपये की 62 अचल संपत्तियों को भी ध्वस्त किया गया है. जबकि 24.868 करोड़ रुपये की 21 अचल संपत्तियों को ज़ब्त या अटैच किया गया है और 1.69 करोड़ रुपये की चल संपत्तियों को भी ज़ब्त या अटैच किया गया है.
प्रवक्ता ने बताया कि इसके अलावा जम्मू डिवीज़न के अलग-अलग ज़िलों में ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने गाड़ियों के 243 रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सस्पेंड किए और 94 रद्द कर दिए. उन्होंने कहा कि ड्रग्स की लत के शिकार लोगों के रिहैबिलिटेशन पर ध्यान देते हुए, 2293 ड्रग यूज़र्स में से 884 युवाओं की पहचान रिहैबिलिटेशन के लिए की गई. इनमें से 547 युवाओं का रिहैबिलिटेशन किया गया और 254 को स्वरोज़गार योजनाओं से जोड़ा गया.
डिवीजनल कमिश्नर ने क्या कहा?
मीटिंग को संबोधित करते हुए डिवीज़नल कमिश्नर ने रिहैबिलिटेशन इकोसिस्टम को मज़बूत करने और काउंसलिंग की पहुंच व हेल्पलाइन नंबरों का दायरा बढ़ाने पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि ड्रग्स की लत के शिकार लोगों को रोज़गार के ज़रिए आजीविका के मौकों से जोड़ा जाना चाहिए और बच्चों को खेल-कूद का पर्याप्त सामान दिया जाना चाहिए ताकि वे ड्रग्स की लत के जाल में न फंसें.
डिवीज़नल कमिश्नर ने ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर्स को मज़बूत करने और रिहैबिलिटेट हुए युवाओं से रेगुलर फ़ॉलो-अप कॉल करने की भी बात कही. उन्होंने ज़िला प्रशासन को हॉटस्पॉट्स की रेगुलर निगरानी करने और ड्रग्स की लत के नए उभरते या जगह बदलते हॉटस्पॉट्स को लेकर सतर्क रहने का निर्देश दिया. IGP जम्मू ने बताया कि चल रहे 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान' में काफ़ी प्रगति हुई है.
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