गुलाम नबी आजाद का सिद्धू वाला दांव! कठुआ रैली से कांग्रेस हाईकमान को दो टूक संदेश

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने जिस तरह से रैली कर ईंट से ईंट बजा देने की चुनौती थी, अब उस तर्ज गुलाम नबी आजाद चलते नजर आ रहे हैं. आजाद के करीबी तमाम नेताओं के इस्तीफे के बाद शुक्रवार को उनके समर्थकों ने कठुआ में रैली कर अपनी सियासी ताकत दिखा दी है.

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गुलाम नबी आजाद गुलाम नबी आजाद

सुनील जी भट्ट

  • कठुआ,
  • 18 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 3:09 PM IST
  • आजाद ने जम्मू-कश्मीर में दिखाई ताकत
  • जम्मू-कश्मीर कांग्रेस में गहराया संकट
  • गुलाम नबी को सीएम फेस बनाने की मांग

जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने जिस तरह से रैली कर ईंट से ईंट बजा देने की चुनौती थी, अब उस तर्ज गुलाम नबी आजाद चलते नजर आ रहे हैं. आजाद के करीबी तमाम नेताओं के इस्तीफे के बाद शुक्रवार को उनके समर्थकों ने कठुआ में रैली कर अपनी सियासी ताकत दिखा दी है. इस दौरान कांग्रेस हाईकमान को साफ संदेश दे दिया हैं कि जम्मू-कश्मीर में गुलाम नबी आजाद को सीएम कैंडिडेट घोषित किया जाए. ऐसे में कांग्रेस का आंतरिक संकट गहराता जा रहा है. 

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गुलाम नबी को सीएम फेस बनाने की मांग

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व डिप्टी सीएम तारा चंद ने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर चाहता है कि गुलाम नबी आजाद अगला सीएम बनें. हम चाहते हैं कि आजाद साहब को कांग्रेस के सीएम उम्मीदवार के रूप में पेश किया जाए. साथ ही कांग्रेस के पूर्व विधायक चौधरी अकरम ने भी कठुआ रैली में साफ तौर पर कहा कि गुलाम नबी आज़ाद जम्मू-कश्मीर की कमान नहीं संभालेंगे तभी हम जीत सकते हैं नहीं तो राज्य में 12 सीटें भी नहीं मिलेंगी. 

चौधरी अकरम ने खुद अपनी सीट को भी खतरे में होनी की संभावना जताते हुए गुलाम नबी आजाद से कहा कि हम आपकी वजह से ही कांग्रेस पार्टी में हैं और आप ही हमारा चेहरा हैं. वहीं, कांग्रेस के पूर्व एमएलसी सुभाष गुप्ता ने भी कहा कि हम चाहते हैं कि गुलाम नबी आजाद जम्मू-कश्मीर में पार्टी की बागडोर संभालें. जम्मू-कश्मीर में एकलौते नेता वही है जो सूबे के मुद्दों को हल कर सकते हैं. 

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जम्मू-कश्मीर में गहराया सियासी संकट

पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के बाद जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस का आंतरिक संकट गहरा गया है, जहां परिसीमन के बाद विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है. ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के समर्थक बड़ी संख्या में इस्तीफा दे रहे हैं. लगभग 20 की संख्या में, कांग्रेस के असंतुष्टों में ज्यादातर राज्य पार्टी के पदाधिकारी, पूर्व मंत्री और घाटी और जम्मू क्षेत्र के प्रभावशाली नेता शामिल हैं. 

जम्मू के कठुआ की रैली में गुलाम नबी आजाद के समर्थकों ने जिस तरह से तेवर दिखाए और कांग्रेस हाईकमान को दो टूक संदेश दिया है कि आजाद को सीएम चेहरा घोषित करने की मांग उठाई है. इससे कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व के लिए चिंता बढ़ गई है. ऐसे में सोनिया गांधी जम्मू-कश्मीर में विभाजन को टालने की कोशिश कर रही हैं. कहा जाता है कि वह आजाद राज्य पार्टी प्रमुख  गुलाम अहमद मीर और कांग्रेस की प्रभारी रजनी पाटिल के संपर्क में है. 

कांग्रेस हाईकमान नजर बनाए हुए है

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों और जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक मामलों से परिचित लोगों का दावा है कि रजनी पाटिल की आज़ाद को अलग-थलग करने और अलग-थलग करने की कोशिश ने एक चेन रिएक्शन शुरू कर दिया. पाटिल ने हाल ही में कांग्रेस के पॉइंट पर्सन के रूप में अंबिका सोनी की जगह ली है. इस साल अक्टूबर में जब पाटिल ने राज्य का दौरा किया था, तो उन्होंने कथित तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को आजाद का नाम बार-बार जपने से फटकार लगाई थी. 

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वहीं, अब गुलाम नबी आजाद ने अपने समर्थकों के दम पर कांग्रेस हाईकमान को अपनी सियासत ताकत दिखाना शुरू कर दिया है. गुलाम नबी आजाद पिछले दो दिनों से जम्मू-कश्मीर में डेरा जमाए हुए हैं. घाटी के कठुआ, थतरी इंदरवाल, जम्मू, बनिहाल, आदि में दयाला चक में बड़ी भीड़ जुटाकर आजाद ने साफ संकेत दे दिए हैं.

 

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