हिमाचल में बर्ड फ्लू की दूसरी लहर, सैकड़ों माइग्रेटरी बर्ड मृत पाए गए

हिमाचल प्रदेश के शिमला में बर्ड फ्लू की दूसरी लहर आ गई है. शिमला की पोंग डेम लेक में 100 से ज्यादा माइग्रेटरी बर्ड की मौत हो चुकी है. चीफ वाइल्डलाइफ वॉर्डन अर्चना शर्मा ने बताया कि दूसरी लहर में बर्ड फ्लू में नए स्ट्रेन की पुष्टि हुई है.

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अब नए स्ट्रेन की पुष्टि हुई है (फाइल फोटो-PTI) अब नए स्ट्रेन की पुष्टि हुई है (फाइल फोटो-PTI)

aajtak.in

  • शिमला,
  • 07 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 10:22 AM IST
  • दूसरी लहर में बर्ड फ्लू में नए स्ट्रेन की पुष्टि
  • दो हफ्तों में 100 से ज्यादा पक्षियों की मौत

एक तरफ इंसानों कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पक्षियों को भी बर्ड फ्लू की दूसरी लहर का सामना करना पड़ रहा है. जनवरी में अचानक से फैले बर्ड फ्लू की दूसरी लहर अब चलने लगी है. हिमाचल प्रदेश में सैकड़ों माइग्रेटरी बर्ड की मौत के बाद दूसरी लहर की पुष्टि हो गई है. अधिकारियों के मुताबिक, शिमला के पोंग डेम लेक में पिछले दो हफ्तों में 100 से ज्यादा माइग्रेटरी बर्ड मारे गए हैं. पोंग डेम लेक वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी में सबसे पहले बर्ड फ्लू के मामले जनवरी में आने शुरू हुए थे. तब महीनेभर में ही 5 हजार से ज्यादा पक्षी मारे गए थे. फरवरी में इसमें कमी आने लगी, लेकिन मार्च के आखिरी में बर्ड फ्लू की दूसरी लहर देखने को मिल रही है.

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दूसरी लहर में एक नए स्ट्रेन की पुष्टि भी हुई है. चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन अर्चना शर्मा ने बताया कि मारे गए पक्षियों के सैम्पल भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिसीज (NIHSAD) में भेजे गए थे, जहां H5N8 एविएन इन्फ्लुएंजा की पुष्टि हुई है. उन्होंने बताया कि जनवरी में जब बर्ड फ्लू फैला था, तो उसमें ये स्ट्रेन नहीं था. उस वक्त H5N1 पाया गया था. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि ये दोनों ही स्ट्रेन पैथोजेनिक (रोगजनक) है. 

उन्होंने बताया कि एविएन इन्फ्लुएंजा में पाए गए ये स्ट्रेन पक्षियों के लिए बहुत खतरनाक है. खासतौर से मुर्गियों के लिए. इस साल की शुरुआत में जब बर्ड फ्लू फैलना शुरू हुआ था, तो हरियाणा समेत कई राज्यों में H5N8 स्ट्रेन मिला था. ये स्ट्रेन इंसानों में नहीं फैलता. अर्चना शर्मा के मुताबिक, मंगलवार तक पोंग डेम लेक में 99 पक्षियों की मौत हुई है. मारे गए पक्षियों में ज्यादातर बार-हेडेड गीज और ग्रे लेग गीज पक्षी हैं. ये बतखों की एक प्रजाति होती है.

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उन्होंने बताया कि इस मौसम में ये बीमारी और तेजी से फैलने की आशंका है. क्योंकि इस मौसम में पक्षी झुंड में रहने लगते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. वो कहती हैं कि यूरोप, उत्तरी और सेंट्रल एशिया में इस वक्त बर्फबारी होने लगती है, जिस वजह से पक्षी उड़कर यहां आने लगते हैं. फरवरी में जब पक्षियों की गिनती की गई थी, तो पता चला था कि पोंग डेम लेक में 51 अलग-अलग प्रजातियों के 1 लाख से ज्यादा माइग्रेटरी बर्ड्स यहां रहते हैं. इनमें 40 हजार से ज्यादा बार-हेडेड गीज होते हैं. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि गर्मी बढ़ने के साथ-साथ माइग्रेटरी बर्ड्स भी अपनी जगह वापस लौट जाएंगे. 

बर्ड फ्लू की दूसरी लहर के दौरान पक्षियों के मरने के मामले हिमाचल के दूसरे हिस्सों से भी सामने आए हैं. इनके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं. बर्ड फ्लू की दूसरी लहर का खतरा बढ़ने के बाद वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी को फिर से बंद कर दिया है और इंसानों के आने पर रोक लगा दी गई है.

 

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