'सिर्फ डिस्क्लेमर से नहीं बचेंगे कलाकार...' 370 बिरयानी विवाद पर हरियाणा महिला आयोग की चेतावनी

'इस वीडियो का मकसद सिर्फ मनोरंजन है...' सोशल मीडिया पर ऐसे डिस्क्लेमर आपने सैकड़ों बार देखे होंगे. लेकिन हरियाणा महिला आयोग का कहना है कि स्क्रीन पर दो लाइन लिख देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती. गुरुग्राम के चर्चित 370 बिरयानी विवाद के बाद आयोग ने कॉमेडियनों, गायकों और इन्फ्लुएंसर्स को साफ संदेश दिया है- हंसी के नाम पर महिलाओं का अपमान अब महंगा पड़ सकता है.

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हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष ने अपनाया कड़ा रुख. (Photo: Screengrab) हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष ने अपनाया कड़ा रुख. (Photo: Screengrab)

नीरज वशिष्ठ

  • गुरुग्राम,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:28 PM IST

गुरुग्राम में हाल ही में सामने आए चर्चित 370 बिरयानी विवाद को लेकर नव नियुक्त महिला आयोग की अध्यक्ष उषा प्रियदर्शिनी ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. सोशल मीडिया पर एक स्टैंड-अप कॉमेडियन के विवादित वीडियो से उपजे इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए अध्यक्ष ने कलाकारों, गायकों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि मनोरंजन और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर महिलाओं को मजाक का पात्र बनाना और उन पर अभद्र टिप्पणियां करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

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​महिला आयोग की अध्यक्ष ने स्टैंड-अप शोज में महिलाओं पर बढ़ते अभद्र कटाक्ष पर चिंता जताई. उन्होंने वीडियो और शोज में दिखाए जाने वाले डिस्क्लेमर पर सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि वीडियो की शुरुआत में 'यह केवल मनोरंजन के लिए है' लिख देने मात्र से कलाकारों को उनके आपत्तिजनक और गरिमाहीन बयानों की जिम्मेदारी से छूट नहीं मिल सकती. कला के नाम पर फूहड़ता और अपमान परोसने की इजाजत किसी को नहीं है.

​उषा प्रियदर्शिनी ने भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि महिलाएं देवी, दुर्गा और मां का रूप हैं. उनका अपमान करने वाली मानसिकता को किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता. आयोग अब ऐसे कॉमेडियन्स, गायकों और फिल्मकारों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी में है, जो समाज की इस मर्यादा को ठेस पहुंचा रहे हैं.

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​चेतावनी का यह दायरा सिर्फ स्टैंड-अप कॉमेडी तक सीमित नहीं है. अध्यक्ष ने हरियाणवी गायकों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि गानों और रील्स के जरिए समाज में नेगेटिविटी और महिलाओं के प्रति गलत संदेश भेजने वाले कलाकारों पर अंकुश लगाया जाएगा. कला और संगीत को अपनी आजीविका व कमाई का जरिया जरूर बनाएं, लेकिन इसके साथ-साथ कलाकारों की यह नैतिक जिम्मेदारी भी है कि वे समाज को एक सही, स्वस्थ और सकारात्मक दिशा दें.

​भविष्य में इस तरह के विवादों और अभद्रता को रोकने के लिए महिला आयोग ने एक ठोस रणनीति तैयार की है. गुड़गांव और आसपास के क्षेत्रों में स्टैंड-अप कॉमेडी शोज आयोजित करने वाले ऑर्गनाइजर्स के साथ आयोग जल्द ही एक विशेष बैठक करेगा, जिसमें गाइडलाइंस तय की जाएंगी.

आयोग का मानना है कि पहले कलाकारों और आयोजकों से संवाद कर उन्हें आगाह किया जाएगा. यदि समझाने और आगाह करने के बाद भी कलाकारों के रवैये में सुधार नहीं आता है, तो आयोग कानून के तहत उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा. ​महिला आयोग के इस सख्त रुख से साफ है कि गुरुग्राम का 370 बिरयानी मामला अब मनोरंजन जगत के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बनने जा रहा है, जहां कला के नाम पर मर्यादा लांघने वालों पर कानून का डंडा चलना तय है.

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