पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ पठान की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. वडोदरा के विवादित भूमि मामले की सुनवाई के दौरान आज हाईकोर्ट ने पठान को फटकार लगाई. अदालत ने कहा कि भूमि देने का प्रस्ताव केवल स्थायी समिति का प्रस्ताव है. अगर भूमि आवंटित नहीं की गई है, तो आपने उस पर कब्जा कैसे किया? इसके अलावा आपने एक भी रुपया नहीं दिया है.
यूसुफ पठान ने गुजरात हाई कोर्ट के दो न्यायाधीशों की बेंच के समक्ष एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिस पर आज हुई सुनवाई में युसूफ पठान की तरफ से यह निवेदन किया गया कि एकल न्यायाधीश के समक्ष एक महत्वपूर्ण तथ्य नहीं रखा गया, जो कि साल 1999 की राज्य नीति है.
पठान की तरफ से कहा गया, "इस नीति के मुताबिक, भारतीय टीम के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को भूमि आवंटित की जाती है और वे भूमि पाने के हकदार हैं. हमने नगर निगम में याचिका की थी और वह मंजूर हुई. साल 2012 में नगर निगम की स्टेन्डिंग कमिटीने प्रस्ताव पारित करके बाजार मूल्य पर जमीन आवंटन को मंजूरी दी थी. जमीन नगर निगम की है तो राज्य सरकार की मंजूरी की जरूरत नहीं है. जमीन साल 2014 से हमारे पास है, तो साल 2024 में जमीन खाली करने की नोटीस क्यों दी गई?"
'आपने कब्जा कैसे किया?'
हाईकोर्ट ने कहा कि जमीन देने का सिर्फ प्रस्ताव था पर आवंटित नहीं हुई, तो आपने कब्जा कैसे किया? कोर्ट ने कहा कि नगर निगम ने पहली बार ऐसा कोई फैसला लिया था, इसलिए उसने राज्य सरकार से पूछा कि इसमें कुछ गलत नहीं है. कोर्ट ने यूसुफ पठान को फटकार लगाते हुए पूछा कि आपको भूमि का कब्ज़ा देने वाले अधिकारी का नाम बताइए, हम उनके खिलाफ जांच का आदेश देंगे. जमीन खाली कीजिए, अन्यथा हम आप पर जुर्माना लगाएंगे.
कोर्ट कहा कि आप भूमि कब खाली करेंगे? क्या आप इसे पखवाड़े भर के अंदर खाली कर देंगे? इसके अलावा, भूमि पर अवैध कब्ज़ा रखने पर भी जुर्माना लगेगा. आपने सरकारी भूमि पर अनाधिकृत बाड़बंदी भी की है, ये सभी अपराध हैं. आप अनपढ़ तो नहीं हैं. एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर से ऐसी अपेक्षाएं नहीं की जा सकतीं.
गुजरात हाई कोर्ट ने कहा कि किराया बाजार मूल्य पर देना होगा. भले ही आप भूमि का उपयोग न कर रहे हों, फिर भी आपको किराया देना होगा क्योंकि भूमि आपके कब्जे में है. अगर आप जमीन खाली नहीं करते हैं, तो कोर्ट प्राधिकरण को कब्जा लेने का आदेश देगा. कृपया मुआवजे और जमीन खाली करने की समयसीमा बताएं. इस मामले की आगे की सुनवाई 15 जून को होगी.
क्या है पूरा मामला?
यूसुफ पठान ने साल 2024 में गुजरात हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें वडोदरा नगर निगम के 6 जून, 2024 के फैसले को चुनौती दी गई थी. इस आदेश में, वडोदरा नगर निगम ने आवेदक को सार्वजनिक नीलामी के बिना 99 साल के पट्टे पर भूखंड आवंटित करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था और भूखंड पर दबाव को तत्काल हटाने का निर्देश दिया था.
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इसके अलावा, राज्य सरकार के 9 जून, 2014 के उस आदेश को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें आवेदक को भूखंड आवंटित न करने का फैसला लिया गया था. हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता के पास भूखंड पर कब्जे के संबंध में कोई कानूनी आदेश या आवंटन पत्र नहीं था, फिर भी उसने वहां चारदीवारी बनाकर भूखंड पर कब्जा कर लिया, जो जबरदस्ती के समान है.
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वीएमसी एक स्वायत्त निकाय है, इसलिए राज्य सरकार की स्वीकृति जरूरत नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि यहां मुद्दा सिर्फ धारा 79 का नहीं है, बल्कि यह प्रस्ताव सार्वजनिक नीलामी प्रक्रिया से बचने के लिए सरकार को भेजा गया था. इस आदेश को यूसुफ पठान ने डबल बेच के समक्ष चुनौती दी थी.
ब्रिजेश दोशी