साढ़े तीन महीने बाद होर्मुज पार कर भारत पहुंचा LNG जहाज 'दिशा'... गुजरात के दहेज बंदरगाह पर डाला लंगर

पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और समुद्री व्यापार पर पड़े असर के बीच भारत के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की खबरों के बाद माल्टा के झंडे वाला LNG पोत 'दिशा' गुजरात के भरूच जिले स्थित दहेज बंदरगाह पहुंच गया है. यह जहाज कतर से 62,370 मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर भारत आया है.

Advertisement
कतर से 62 हजार टन से ज्यादा गैस लेकर आया है 'दिशा' पोत. (Photo: Screengrab) कतर से 62 हजार टन से ज्यादा गैस लेकर आया है 'दिशा' पोत. (Photo: Screengrab)

ब्रिजेश दोशी

  • भरूच,
  • 19 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:49 AM IST

दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा जिस समुद्री रास्ते से गुजरता है, उसका नाम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज... पिछले कुछ महीनों से यह इलाका तनाव और अनिश्चितता की वजह से लगातार चर्चा में था. अब इसी रास्ते से होकर LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) से भरा एक जहाज भारत पहुंचा है. जहाज का नाम है 'दिशा'... माल्टा के झंडे वाला यह पोत कतर से गैस लेकर गुजरात के भरूच स्थित दहेज बंदरगाह पहुंचा है. 

Advertisement

इस जहाज को ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर भारत पहुंचने वाला पहला LNG जहाज बताया जा रहा है. 'दिशा' जहाज कतर के रास लाफान बंदरगाह से 62,370 मीट्रिक टन LNG लेकर रवाना हुआ था. लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर सुरक्षा चिंताओं के बीच इसका सफर प्रभावित हुआ.

जहाज करीब साढ़े तीन महीने तक होर्मुज क्षेत्र में अटका रहा. आखिरकार हालात में सुधार हुआ और युद्धविराम की खबरों के बाद जहाज ने अपनी यात्रा पूरी की और गुजरात के दहेज पोर्ट पहुंच गया. गुरुवार सुबह करीब 7 बजे जहाज ने बंदरगाह पर लंगर डाला.

दरअसल, यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक की कहानी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. दुनिया के तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. अगर यहां तनाव बढ़ता है तो असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भारत, चीन, जापान और यूरोप तक महसूस किया जाता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: ओडिशा: पाकिस्तानी क्रू मेंबर के 21 सदस्यों के साथ पारादीप बंदरगाह पहुंचा जहाज, सुरक्षा बढ़ाई गई

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल और गैस आयात करता है. इसलिए होर्मुज में किसी भी तरह की बाधा का मतलब है- सप्लाई की चिंता, बढ़ती शिपिंग लागत और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता. 'दिशा' के दहेज पोर्ट पहुंचने को कई विशेषज्ञ सकारात्मक संकेत मान रहे हैं. उनका मानना है कि अगर क्षेत्र में तनाव नहीं बढ़ता तो तेल और गैस की सप्लाई धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है. 

यही वजह है कि ऊर्जा बाजार और शिपिंग सेक्टर की नजर इस जहाज पर टिकी हुई है. आने वाले दिनों में दूसरे LNG और तेल टैंकर भी इसी मार्ग से गुजरते हैं या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण रहेगा.

दहेज पोर्ट क्यों है अहम?

गुजरात का दहेज बंदरगाह भारत के सबसे महत्वपूर्ण LNG टर्मिनलों में गिना जाता है. यहां पहुंचने वाली गैस को पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया जाता है. यानी जब 'दिशा' दहेज पहुंचा, तो यह सिर्फ एक बंदरगाह पर जहाज के लगने की खबर नहीं थी. यह भारत की ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया के बदलते हालात से जुड़ा एक अहम संकेत भी था. अब नजर इस बात पर रहेगी कि होर्मुज का यह रास्ता आने वाले दिनों में कितना शांत और सुरक्षित बना रहता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »