यूएस-इजरायल और ईरान के बीच हुए सीजफायर पर भारत का पहला स्टेटमेंट आया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाल के घटनाक्रमों पर बयान जारी करते हुए सीजफायर का स्वागत किया है. MEA की तरफ से जारी किए गए बयान में कहा गया, "हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी."
मंत्रालय ने आगे कहा, "जैसा कि हमने पहले भी लगातार ज़ोर दिया है, चल रहे संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए तनाव कम करना, बातचीत और कूटनीति बेहद जरूरी है."
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "इस संघर्ष की वजह से लोगों को पहले ही भारी कष्ट उठाना पड़ा है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार नेटवर्क भी बाधित हुए हैं. हमें उम्मीद है कि होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते नौवहन की अबाधित स्वतंत्रता और ग्लोबल बिजनेस जारी रहेगा."
ईरान ने किया जीत का दावा
सीजफायर के बाद पिछले एक महीने से ज्यादा वक्त से मिडिल-ईस्ट में चल रही जंग थम गई है. ईरान ने ऐतिहासिक जीत का दावा किया है. तेहरान ने यह दावा तब किया, जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी धमकी भरी स्ट्राइक्स से कदम पीछे खींच लिए और दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर पर राज़ी हो गए.
तेहरान ने भी अपनी तरफ़ से एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है, जिसके बारे में उसका कहना है कि वॉशिंगटन ने सैद्धांतिक रूप से उसे मान लिया है.
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हालांकि, ईरानी अधिकारियों के नाम से जारी बयानों के कई और आपस में विरोधाभासी वर्जन फ़ारसी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में सामने आए. इन्हें सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने पब्लिश किया है, जिनमें से कुछ में 10-सूत्रीय योजना की साफ़-साफ़ रूपरेखा दी गई थी, तो कुछ में यूरेनियम संवर्धन सहित व्यापक राजनीतिक दावे किए गए थे.
मंगलवार रात को ट्रंप के ऐलान के कुछ ही देर बाद, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट किया कि अगर ईरान पर हमले बंद हो जाते हैं, तो तेहरान भी अपने डिफेंसिव कैंपेन रोक देगा.
शिवानी शर्मा