'गर्भ से ही हो बच्चे को संस्कार देने की शुरुआत', JNU में आरएसएस से जुड़े संगठन की डॉक्टरों को सलाह

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी राष्ट्र सेविका समिति ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया. यह आयोजन गर्भ संस्कार को लेकर किया गया. कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि बच्चों को गर्भ में ही भगवान राम, हनुमान, शिवाजी महाराज और स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और संघर्ष के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए.

Advertisement
आसएसएस पथ संचलन (File Photo) आसएसएस पथ संचलन (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 9:48 AM IST

बच्चों को संस्कार देने की शुरूआत गर्भावस्था से ही हो जानी चाहिए. उन्हें भगवान राम, हनुमान, शिवाजी महाराज और स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और संघर्ष के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए. इससे गर्भ में पल रहे बच्चे संस्कार जल्दी सीख सकेंगे. यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े राष्ट्र सेविका समिति के एक कार्यक्रम में कही गई, इसमें 70-80 डॉक्टर भी शामिल हुए थे.

Advertisement

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक RSS के महिला वर्ग राष्ट्र सेविका समिति की एक शाखा संवादी न्यास ने 'गर्भ संस्कार' (गर्भावस्था संस्कृति) नामक एक अभियान शुरू किया है. इसके तहत स्त्री रोग विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओं तक पहुंचेंगे और उन्हें सिखाएंगे कि कैसे उन प्रथाओं को अपनाना है, जिससे सुनिश्चित हो सके कि बच्चा जन्म से पहले ही भारतीय संस्कृति के बारे में सीख ले. रविवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में इसे लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया. जहां कई स्त्री रोग विशेषज्ञ इकट्ठा हुए और उन ऐसी एक्सरसाइज के बारे में जाना.

रविवार को हुए इस कार्यक्रम में 12 राज्यों के 70-80 डॉक्टरों ने भाग लिया. इनमें ज्यादातर स्त्री रोग विशेषज्ञ और आयुर्वेद चिकित्सक थे. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी को बनाया गया था, हालांकि वह आयोजन में नहीं पहुंचीं.

Advertisement

संगठन की राष्ट्रीय आजोयन सचिव माधुरी मराठे ने कहा कि गर्भ से ही बच्चे में यह संस्कार लाने की जरूरत है कि हमारी प्राथमिकता देश है. माधुरी ने शिवाजी की मां जीजा बाई का उदाहरण देकर बताया कि कैसे उन्होंने एक लीडर को जन्म देने के लिए प्रार्थना की थी. उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को उनकी तरह प्रार्थना करनी चाहिए, ताकि बच्चे में हिंदू शासकों के गुण आ जाएं.

कार्यक्रम में शामिल AIIMS के एनएमआर विभाग की प्रमुख डॉ. रामा जयसुंदर ने कहा कि विकलांग और ऑटिज्म के साथ पैदा होने वाले बच्चों की तादाद कुछ समय पहले काफी बढ़ गई थी. ये खासतौर पर उन माता-पिता के साथ होता है, जो मजबूत आर्थिक स्थिति के कारण आरामदायक जीवन जीते हैं.

उन्होंने कहा कि गर्भ संस्कार गर्भावस्था से पहले ही शुरू हो जाता है. जैसे ही कोई जोड़ा बच्चे के बारे में सोचता है, आयुर्वेद की भूमिका शुरू हो जाती है. महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान संस्कृत पढ़ना चाहिए. इसके साथ ही गीता पाठ भी करना चाहिए. उन्होंने दावा किया सही 'गर्भ संस्कार' करने पर गर्भ में बच्चे का डीएनए भी बदला जा सकता है.

संगठन ने देश में हर साल 1,000 गर्भ संस्कार वाले बच्चों को जन्म देने का लक्ष्य रखा है. यह पहल भारत के पुराने गौरव को बहाल करने के लिए है. उन्होंने आगे कहा कि देश में अपराध बहुत ज्यादा हैं. आजकल देखने को मिल रहा है कि बच्चे अपने माता-पिता की हत्या कर रहे हैं, बलात्कारी बन रहे हैं. लेकिन अगर महिलाएं राम जैसे बच्चों को जन्म देती हैं तो उन्हें खुशी होगी.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »