अचानक जंतर-मंतर पहुंचे पवन खेड़ा, वांगचुक से मिले, बोले- सेहत की चिंता है

सोनम वांगचुक से मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा हम सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंतित हैं. सरकार को लोकतांत्रिक विरोध की भाषा समझ नहीं आती.

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पवन खेड़ा ने कहा- अपनी जान जोखिम में डालकर आप सरकार से कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे.(Photo: PTI) पवन खेड़ा ने कहा- अपनी जान जोखिम में डालकर आप सरकार से कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे.(Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:53 AM IST

दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को 20 दिन हो चुके हैं. इस दौरान उनसे मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके लिए चिंता जताई थी. 

पवन खेड़ा ने कहा, हम सभी सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंतित हैं. सत्ता में बैठी सरकार बहुत असंवेदनशील है और लोकतांत्रिक विरोध की भाषा नहीं समझती.

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पवन खेड़ा ने बताया, ऐसी सरकार के सामने विरोध का तरीका बदलते रहना चाहिए. हमें उनकी और उनके साथ बैठे छात्रों की सेहत की चिंता है. अपनी जान जोखिम में डालकर आप इस सरकार से कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे.

बता दें, नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक के मामलों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं.  

बिना भोजन के रह रहे वांगचुक का शरीर काफी कमजोर हो चुका है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपील करते हुए बताया कि सोनम वांगचुक की हालत ऐसी हो गई है कि उनकी हड्डियां दिखने लगी हैं और वे चल भी नहीं पा रहे हैं.

इस बीच, डॉक्टर सतीश लांबा के अनुसार भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से वांगचुक का वजन 9 किलो से अधिक घटकर 56.9 किलोग्राम रह गया है.

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डॉक्टर ने बताया कि लंबे भूख हड़ताल की वजह से शरीर अब ग्लूकोज और फैट के बाद मांसपेशियों को खाने लगा है. उनके यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है, यह इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मांसपेशियां तेजी से गल रही हैं. डॉक्टरों ने कहा है कि अगर स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वांगचुक का ऑर्गन फेल हो सकता है.

इस बीच डॉक्टरों की गंभीर चेतावनियों के बावजूद सोनम वांगचुक हार मानने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने एक मैसेज जारी कर बताया कि वे इस आंदोलन को जल्दी खत्म नहीं करेंगे.

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