जंग का उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में ये नाम, बैजल बड़े दावेदार!

नजीब जंग के इस्तीफे के बाद दिल्ली के अगले लेफ्टिनेंट गवर्नर के नाम को लेकर कयासों का दौर जारी है. इस पद के लिए संभावित उम्मीदवारों के तौर पर पूर्व नौकरशाह अनिल बैजल का नाम सबसे आगे चल रहा है. बीते अगस्त में जब जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा को बदलने की अटकलें तेज हुई थीं तो अनिल बैजल इस पद के लिए सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे थे. दिल्ली के उप राज्यपाल के लिए अन्य दावेदारों में पुडुचेरी की उप राज्यपाल किरन बेदी, दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी और बीजेपी नेता जगदीश मुखी के नामों की भी सुगबुगाहट है.

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पीएम मोदी संग नजीब जंग (फाइल फोटो) पीएम मोदी संग नजीब जंग (फाइल फोटो)

नजीब जंग के इस्तीफे के बाद दिल्ली के अगले लेफ्टिनेंट गवर्नर के नाम को लेकर कयासों का दौर जारी है. इस पद के लिए संभावित उम्मीदवारों के तौर पर पूर्व नौकरशाह अनिल बैजल का नाम सबसे आगे चल रहा है. बीते अगस्त में जब जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा को बदलने की अटकलें तेज हुई थीं तो अनिल बैजल इस पद के लिए सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे थे. दिल्ली के उप राज्यपाल के लिए अन्य दावेदारों में पुडुचेरी की उप राज्यपाल किरन बेदी, दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी और बीजेपी नेता जगदीश मुखी के नामों की भी सुगबुगाहट है.

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1969 बैच के आईएएस अफसर अनिल बैजल अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में गृह सचिव रहे हैं. बताया जाता है कि बैजल को गृह सचिव बनाने के लिए उस वक्त बीजेपी नेता विजय कुमार मल्होत्रा और सुषमा स्वराज ने इस अफसर की पैरवी की थी. बैजल दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वाइस प्रेसिडेंट रहे हैं और इनकी इमेज एक तेजतर्रार अफसर के तौर पर रही है. वो इंडियन एयरलाइंस के सीएमडी, प्रसार भारती के सीईओ, गोवा के डेवलपमेंट कमिश्नर के तौर पर भी उन्होंने सेवाएं दी हैं.


बैजल विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के कार्यकारिणी समिति के सदस्य रहे हैं. केंद्र की मोदी सरकार इस संस्थान के कई सदस्यों को वरिष्ठ पदों पर नियुक्त करती रही है, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और पीएम मोदी के मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्र प्रमुख हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री हासिल करने वाले बैजल स्क्वैश, बैडमिंटन और टेनिस खेलना पसंद है. करीब 37 साल की सेवा के बाद 2006 में शहरी विकास मंत्रालय के सचिव पद से रिटायर हुए थे.

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उप राज्यपाल बनने की रेस में दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर भीमसेन बस्सी का नाम भी सामने आ रहा है. बस्सी के पुलिस कमिश्नर के कार्यकाल के दौरान दिल्ली की केजरीवाल सरकार से उनके टकराव के किस्से जगजाहिर हैं. दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने बस्सी पर केंद्र के इशारे पर काम करने का आरोप लगाए. राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा और लॉ एंड ऑर्डर को लेकर सीएम केजरीवाल कई बार बस्सी को घेर चुके थे. दूसरी ओर बस्सी एक सधे राजनेता की तरह केजरीवाल को जवाब देते हुए चुटकी भी लेते रहे.


दिल्ली के अगले एलजी के लिए संभावित उम्मीदवारों के तौर पर किरण बेदी का नाम भी आ रहा है. पूर्व आईपीएस अफसर बेदी को केंद्र सरकार की ओर से 29 मई को पुडुचेरी की उप राज्यपाल बनाया गया था. बेदी की इमेज एक कड़क इमेज वाली पुलिस अफसर के तौर पर रही है. उन्हें पुलिस सेवा के दौरान दिल्ली में भी काम करने का मौका मिला था.

1972 में देश की पुलिस महिला आईपीएस अफसर बनने का गौरव हासिल करने वाली बेदी को मैग्ससे पुरस्कार भी मिल चुका है. भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में अन्ना हजारे की अगुवाई शुरू हुए आंदोलन के दौरान किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल एक साथ रहे थे. लेकिन दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले वो बीजेपी में शामिल हो गईं थी. पार्टी ने उन्हें सीएम पद का उम्मीदवार भी घोषित कर दिया था लेकिन चुनावी जंग में उनका करिश्मा नहीं दिखा.

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बीजेपी नेता और अंडमान व निकोबार के उप राज्यपाल जगदीश मुखी के नाम की भी चर्चा दिल्ली के नए उप राज्यपाल के तौर पर चल रही है. जगदीश मुखी दिल्ली बीजेपी का बड़ा चेहरा रहे हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे मुखी मंत्री और दिल्ली विधानसभा नेता विपक्ष रह चुके हैं.

वैसे तो जंग के इस्तीफे की किसी को उम्मीद नहीं थी. लेकिन ऐसा भी कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार इस साल जून में जंग की जगह किसी अन्य को उपराज्यपाल बनाने पर विचार कर रही थी, जब उनका तीन साल का कार्यकाल पूरा हुआ था. हालांकि जंग को इस पद पर बने रहने दिया गया. दिल्ली का नया उप राज्यपाल कौन होगा, यह फैसला केंद्र सरकार को करना है. लेकिन जंग का इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं हुआ क्योंकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 10 दिनों के लिए देश से बाहर हैं.

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