केंद्र में मोदी, चारों ओर BJP फिर भी जहरीली हो गई दिल्ली-NCR की हवा

सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश के बावजूद एक बार फिर दिल्ली की हवा जहरीली हो गई है और आसपास के राज्यों व केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी पर सवाल उठ रहे हैं कि वायु प्रदूषण उसकी प्राथमिकता में है भी या नहीं?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 07 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 2:49 PM IST

सर्दी के दस्तक देते ही देश की राजधानी दिल्ली सहित NCR का समूचा क्षेत्र धुंध से घिर गया है. साल दर साल गहरी होती जा रही ये धुंध लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन गई है लेकिन सरकारें इसकी ओर से जैसे आंखें मूंदे बैठी हैं. दिल्ली की इस धुंध की सबसे बड़ी वजह आसपास के राज्यों में खेतों में जलाई जाने वाली पराली को बताया जा रहा है लेकिन न तो दिल्ली और न ही इन राज्यों की सरकारों ने इन्हें रोकने में कोई दिलचस्पी दिखाई. सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश के बावजूद एक बार फिर दिल्ली की हवा जहरीली हो गई है और आसपास के राज्यों व केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी पर सवाल उठ रहे हैं कि वायु प्रदूषण उसकी प्राथमिकता में है भी या नहीं?

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गौरतलब है कि दिल्ली में जहां केंद्र में पिछले तकरीबन साढ़े तीन साल से बीजेपी की सरकार है, वहीं पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी बीजेपी सरकार को तकरीबन तीन साल हो चुके हैं. राजस्थान में चार साल से वसुंधरा राजे के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार चल रही है. यूपी-उत्तराखंड में भी बीजेपी की सरकारों को छह महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है जबकि पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्य में भी मार्च से पहले 10 साल तक बीजेपी और उसकी सहयोगी अकाली दल की सरकार थी.

दिल्ली में भले ही सरकार आम आदमी पार्टी की हो लेकिन यहां भी एमसीडी में सालों से बीजेपी ही काबिज है. इसके बावजूद साल दर साल गैस चैंबर में तब्दील होते जा रहे दिल्ली-एनसीआर को इस जहरीली हवा से न तो कोई राहत है और न ही सरकार राहत दिलाने की किसी कवायद को करती नजर आ रही है.

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें गाजियाबाद को प्रदूषण के मामले में देश भर में पहला स्थान दिया गया है. गाजियाबाद एक औद्योगिक क्षेत्र माना जाता है. यहां हजारों की तादाद में फैक्ट्रियां हैं. इनसे निकलने वाला धुआं हवा को जहरीला कर रहा है. इसके अलावा जगह-जगह कचरे में लगाई जाने वाली आग भी प्रदूषण को बढ़ाने का काम कर रही है.

दिल्ली की हवा में फैले जहर के लिए आसपास के राज्यों में खेतों में जलाई जाने वाली पराली भी बड़े तौर पर जिम्मेदार है. इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और उत्तराखंड शामिल हैं. पंजाब को छोड़कर बाकि चारों राज्यों में बीजेपी की सरकार है. इन राज्यों में फसलों की कटाई के बाद बचे हुए हिस्से को जला दिया जाता है, जिससे काफी प्रदूषण फैलता है. देश की सर्वोच्च अदालत ने इस पर पाबंदी भी लगा रखी है, लेकिन अफसरों के नाकारापन और सरकारों के आंख मूंद लेने से ये सिलसिला बदस्तूर जारी है.

दिल्ली के साथ-साथ नोएडा और गाजियाबाद में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार पहुंच गया है. ऐसे में NCR के रहने वाले लोगों के लिए घर से बाहर निकालना खतरनाक होता जा रहा है. ये धुंध अस्थमा, हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए घातक है. बुजुर्ग और बच्चे भी उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं. कुल मिलाकर संकट बहुत गहरा है लेकिन सरकारों की गंभीरता उस स्तर पर नहीं दिखाई देती.

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हाल ही में दिल्ली में खराब होती हवा पर सबसे सख्त रुख सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया और दीपावली पर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी. लेकिन कोर्ट के इस फैसले को भी धार्मिक चश्मे से देखा गया और इसपर सवाल उठाने वालों में भी दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग ही शामिल थे.

पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन से जब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए ट्वीट किया तो उन्हें भी सोशल मीडिया पर जमकर खरी-खोटी सुनाई गईं. आज दिल्ली की जो हवा है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अगर कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर रोक नहीं लगाई होती तो जहरीली हवा का ये मंजर और कितना भयावह होता.

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