दिल्ली में स्मार्ट निगरानी: स्ट्रीट लाइट बंद होते ही बजेगा अलर्ट, कंपनियों पर लगेगा फाइन

दिल्ली सरकार ने स्ट्रीट लाइट मैनेजमेंट में नई व्यवस्था लागू की है. इसके तहत सड़कों पर खराब स्ट्रीट लाइट के लिए प्राइवेट कंपनियों को हर घंटे के हिसाब से जुर्माना देना होगा. ये कदम अंधेरे की समस्या, महिलाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है.

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स्ट्रीट लाइट में खराबी अब कंपनियों को महंगी पड़ेगी. (Photo- Pexels) स्ट्रीट लाइट में खराबी अब कंपनियों को महंगी पड़ेगी. (Photo- Pexels)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:41 PM IST

राजधानी दिल्ली में स्ट्रीट लाइट मैनेजमेंट में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़कों पर अगर कोई स्ट्रीट लाइट खराब रहती है तो संबंधित प्राइवेट कंपनी को हर घंटे की कीमत चुकानी पड़ेगी. सरकार ने दिल्ली की सड़कों को रात में ज्यादा सुरक्षित और रोशन बनाने के लिए ये फैसला किया है.

दिल्ली सरकार नई व्यवस्था के तहत स्ट्रीट लाइट बंद रहने के समय को घंटों में दर्ज करेगी. जितने घंटे लाइट खराब रहेगी, उतने ही समय के हिसाब से कंपनी पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा.

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अधिकारियों का मानना है कि इससे कंपनियों की लापरवाही पर लगाम लगेगी. इसके साथ ही सड़कों पर लंबे समय तक रहने वाले अंधेरे की समस्या भी दूर होगी.

भुगतान से पहले कटेगा जुर्माना

नए सिस्टम के तहत स्ट्रीट लाइट लगाने और पांच सालों तक उसके रखरखाव की जिम्मेदारी लेने वाली कंपनियों को भुगतान भी नए तरीके से किया जाएगा. कंपनियों को एकमुश्त भुगतान करने के बजाय टोटल रकम को पांच साल की अवधि में 60 मासिक किस्तों में दिया जाएगा.

हर महीने भुगतान जारी करने से पहले डिजिटल सिस्टम से दर्ज किए गए जुर्माने की रकम को किस्त से काट लिया जाएगा. इसका मतलब जितनी ज्यादा लापरवाही होगी, उतना कम भुगतान किया जाएगा.

शिकायत का इंतजार नहीं, कंट्रोल रूम देगा तुरंत अलर्ट

इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत एडवांस डिजिटल कंट्रोल रूम होगा. ये कंट्रोल रूम सीधे स्ट्रीट लाइट नेटवर्क से जुड़ा रहेगा. जैसे ही किसी इलाके में कोई स्ट्रीट लाइट बंद होगी, उसका नोटिफिकेशन ऑटोमैटिक कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगा. इससे न तो विभाग को शिकायत का इंतजार करना पड़ेगा और न ही आम लोगों को बार-बार शिकायत दर्ज करानी होगी.

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सरकार इस मॉडल को पूरी दिल्ली में लागू करने की तैयारी कर रही है. शुरुआती चरण में करीब 96 हजार स्ट्रीट लाइटों को इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा.

जनता की सुरक्षा पहली प्राथमिकता

लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि पीडब्ल्यूडी के अधीन लगभग 1,440 किलोमीटर लंबी सड़कें आती हैं और इन सड़कों पर पर्याप्त रोशनी बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के जरिए कंपनियों को पूरी तरह जवाबदेह बनाया जाएगा और बंद पड़ी लाइटों पर लगने वाले जुर्माने को काटकर ही उनका भुगतान किया जाएगा.

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सरकार का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ सड़कों पर रोशनी की स्थिति बेहतर होगी, बल्कि महिलाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा भी मजबूत होगी. दिल्ली की सड़कों पर अंधेरे के खिलाफ येह व्यवस्था एक तकनीकी और जवाबदेह समाधान साबित हो सकती है.

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