शीला और माकन के बीच सियासी मेल-मिलाप का गवाह बनेगा ये वेलेंटाइन डे!

दिल्ली में जीरो पर सिमट चुकी कांग्रेस के बीच गुटबंदी खत्म नहीं हुई है, लेकिन अब राज्य ईकाई के अध्यक्ष अजय माकन पार्टी में अपने विरोधियों को साथ लेकर चलने की कोशिश में जुट गए हैं.

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अजय माकन और शीला दीक्षित (फाइल फोटो) अजय माकन और शीला दीक्षित (फाइल फोटो)

कुमार विक्रांत

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 3:20 PM IST

दिल्ली में कांग्रेस की बात की जाए तो पार्टी के मौजूदा प्रदेश अजय माकन और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बीच 36 के आंकड़े की बात किसी से छुपी नहीं रही. माकन ने जब दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी तो शीला को बीता हुआ युग तक करार दे डाला था. शीला ने भी माकन पर पलटवार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

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बहरहाल, दोनों के बीच तनातनी की खबरें सामने आती रहीं. वहीं माकन की अगुआई में कांग्रेस दिल्ली में एक के बाद एक चुनाव हारती रही. विधानसभा चुनाव में पार्टी का सफाया हुआ तो निगम चुनावों में भी कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही. हालांकि माकन ने कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ने का हवाला दिया, लेकिन शीला ने इसकी काट में कहा कि चुनाव जीत हासिल करने के लिए लड़े जाते हैं ना कि वोट शेयर बढ़ाने के लिए.

माकन से नाराज रहा है शीला का खेमा

शीला अकेली हीं नहीं, कपिल सिब्बल, जय प्रकाश अग्रवाल समेत शीला सरकार के वक्त मंत्री रहे तमाम नेता भी माकन की कार्यशैली से खुलेआम नाराजगी जताने लगे. माकन की शिकायत राहुल के दरबार तक पहुंची. तब राहुल ने हस्तक्षेप करते हुए माकन से मामले को देखने के लिए कहा. संभवत: यही संदेश दिया कि सभी को साथ लेकर चला जाए. राहुल के करीबी माने जाने वाले माकन ने फिर नए सिरे से दिल्ली में पार्टी संगठन के कील-कांटे दुरुस्त करने शुरू किए.

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फिर कहानी शुरू हुई माकन और शीला के बीच सुलह सुलाई की. हालांकि शुरुआत में ही शीला ने माकन को झटका दे दिया. सूत्रों के मुताबिक, माकन के दफ्तर ने शीला के दफ्तर को संदेश दिया कि अजय माकन शीला दीक्षित से खुद मिलना चाहते हैं. शीला के दफ्तर ने जब शीला को ये जानकारी दी तो शीला ने ऐसी किसी मुलाकात की संभावना से साफ इंकार कर दिया.

शीला को मनाने की माकन की कोशिशें

माकन ने इसके बाद भी कोशिश जारी रखी और दिल्ली प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी से इस संबंध में शीला से बात करने और मुलाकात तय कराने के लिए कहा. शर्मिष्ठा ने शीला को मनाया और अंतत: माकन शर्मिष्ठा के साथ शीला से मिलने उनके घर पहुंचे.

सूत्रों के मुताबिक मुलाकात की शुरुआत में ही माकन ने शीला की तारीफों के पुल बांधे और कहा कि ‘आपका आशीर्वाद चाहिए. पूरे दिल्ली में आपकी सरकार के वक्त के काम को लोग याद करते हैं. इसलिए मेरी गुजारिश मान लीजिए, आने वाले वक्त में उपचुनाव में आप पूरा सहयोग करिए. सबसे पहले 14 फरवरी को दिल्ली कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ आप भी मीडिया को एक मंच से सम्बोधित करने आइए.’

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सूत्रों के मुताबिक, शीला ने इसके जवाब में दो-टूक कहा कि, ‘माकन जी पहले आप कांग्रेस पर अपनी पसंद नापसंद के हिसाब से लोगों को देखना बंद कीजिए. सब पुराने लोगों को एआईसीसी मेंबर बनाइए. 14 फरवरी को सारे पुराने मंत्रियों को और वरिष्ठ नेताओं को बुलाइये, तो मैं भी आऊंगी.’माकन ने इस पर आश्वासन दिया कि अगले दिन सबको एडजस्ट करने की पूरी कोशिश के बाद उनसे मिलेंगे.  

सूत्रों ने बताया कि अगले दिन माकन अकेले शीला से मिले. साथ ही शीला से उन लोगों के नाम लिए जिन्हें वे एआईसीसी मेम्बर बनवाना चाहती थीं. फिर एक दिन बाद माकन दिल्ली के प्रभारी पीसी चाको के साथ शीला के घर पहुंचे. माकन ने शीला की पसंद के काफी लोगों को तो एडजस्ट कर दिया, लेकिन 6 नामों को लेकर कहा कि इनको लेना मुश्किल है. शीला फिर भी अड़ी रहीं. शीला ने माकन से साफ कहा कि ये सारे कांग्रेसी हैं, आपको नहीं पसंद तो उससे क्या?

नई दोस्ती की शुरुआत?

दरअसल, इन 6 नामों में शीला सरकार में मंत्री रहे मंगतराम सिंघल, रमाकांत गोस्वामी, विधायक रहे राजेश लिलोठिया, पूर्व पार्षद जीतू कोचर, रोहित मनचंदा और शीला सरकार के वक्त दिल्ली एससी कमीशन के चेयरमैन रहे हरनाम शामिल हैं. इनको माकन ने पीसीसी डेलीगेट नहीं बनने दिया था.

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अब दुविधा है कि जो पीसीसी डेलिगेट नहीं है, वो एआईसीसी का मेंबर कैसे बनेगा? ऐसे में एआईसीसी का मनोनीत मेंबर बनाकर माकन बीच का रास्ता निकालने की तैयारी में हैं. हालांकि, मनोनीत मेम्बर को वोट का अधिकार नहीं होता, लेकिन इससे सुलह के आसार हैं. इसी के चलते हाल में पूर्व अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा, पूर्व मंत्री एके वालिया और हारून युसूफ की दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी हुई.

पूरे घटनाक्रम के बीच और शीला-माकन की हालिया मुलाकातों के मद्देनजर माना जा रहा है कि 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे के दिन दिल्ली कांग्रेस के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत होगी. देखना दिलचस्प होगा कि ये तारीख शीला और माकन के बीच सियासी मेलमिलाप की गवाह बनेगी तो आगे चलकर उसका दिल्ली में पार्टी की सेहत पर क्या असर होगा? दिल्ली में कांग्रेस के दिन पलटने के लिए जरूरी है कि पार्टी के ये दोनों दिग्गज दिल से हाथ मिलाएं, किसी मजबूरी में नहीं.

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