कभी सोचा है कि एक फोन कॉल आपकी जिंदगी में इतना डर भर सकता है कि आप बिना सवाल किए लाखों रुपये ट्रांसफर कर दें? छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में ऐसा ही हुआ. और तरीका इतना फिल्मी कि सुनकर आप भी कहेंगे, ये क्या चल रहा था भाई!
कहानी मार्च 2026 में आए एक कॉल से शुरू होती है. अजिरमा इलाके की एक महिला के पास एक कॉल आता है. सामने वाला बड़ी रौबदार आवाज में खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताता है. फिर जो डायलॉग बोलता है, वो पूरा साइबर क्राइम का लेवल सेट कर देता है. 'आपने गूगल पर अश्लील वीडियो देखे हैं... आपके खिलाफ केस बन रहा है... गिरफ्तारी तय है.'
अब सोचिए, कोई आम इंसान इस तरह की बात सुनेगा तो दिमाग में क्या चलेगा? बिल्कुल वही हुआ- घबराहट, डर और जल्दबाजी. ठगों ने महिला को लगातार दबाव में रखा और केस खत्म करने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाने शुरू कर दिए. अलग-अलग बैंक अकाउंट्स, अलग-अलग पेमेंट्स- और धीरे-धीरे खाते से उड़ गए पूरे 4.50 लाख रुपये.
कुछ समय बाद महिला को एहसास हुआ कि उसके साथ ठगी हो चुकी है. फिर वह थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई. गांधीनगर पुलिस ने मामला दर्ज किया और साइबर सेल को जांच में लगाया गया. फिर बैंक ट्रांजेक्शन, डिजिटल फुटप्रिंट और अकाउंट्स की ट्रेलिंग शुरू हुई.
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जांच में खुलासा हुआ कि पैसा कई खातों में घुमाया गया था. पुलिस ने लोकेशन ट्रेस की और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ पहुंच गई. वहां से तीन लोगों को दबोच लिया गया, जिनमें काशीराम अहिरवार, पन्नालाल यादव और अभिलाषा अहिरवार शामिल हैं. पूछताछ में तीनों ने मान लिया कि ठगी उन्होंने ही की है.
ये गैंग लोगों को फोन करता, खुद को कभी क्राइम ब्रांच तो कभी कोई जांच एजेंसी बताता और फिर डर का ऐसा माहौल बनाता कि सामने वाला सोचने की बजाय सीधे पैसे ट्रांसफर कर दे.
पुलिस का साफ कहना है कि कोई भी एजेंसी फोन पर इस तरह धमकी देकर पैसे नहीं मांगती. अगर कोई ऐसा करे, तो समझ जाइए कि सामने ठग बैठा है. फिलहाल तीनों आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं. पुलिस का मानना है कि ये पूरा नेटवर्क बड़ा हो सकता है. इसलिए अब कड़ियां जोड़ी जा रही हैं.
सुमित सिंह