शहीद जवान के बुजुर्ग पिता का दर्द- आखिर कब तक अपने बेटों को खोते रहेंगे हम

नरेश यादव के के पिता राम नारायण यादव केंद्र सरकार से काफी नाराज हैं और सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक माओवादियों के आगे देश के जवान शहीद होते रहेंगे? नरेश के पिता ने मांग की है कि माओवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया जाए.

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रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 25 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 1:35 PM IST

नक्सली हमले में शहीद दरभंगा के जवान नरेश यादव इसी साल 10 जनवरी को लंबी छुट्टी बिताने के बाद छत्तीसगढ़ के सुकमा लौटे थे. 45 वर्षीय नरेश हेड कांस्टेबल के पद पर सीआरपीएफ की 74 बटालियन में तैनात थे. उन्होंने अपने गांव अहिला में छुट्टियों के दौरान एक पक्के मकान का निर्माणकार्य शुरू करवाया था. दो दिन पहले नरेश यादव ने अपनी पत्नी रीता देवी से भी बात की थी और बड़े बेटे को अच्छे कॉलेज में दाखिला कैसे मिले इसको लेकर चर्चा की थी.

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शहीद का बड़ा बेटा दसवीं कक्षा में पढ़ता है जबकि छोटा बेटा पांचवीं में है. उनकी एक बेटी भी है जो नौवीं कक्षा में पढ़ती है. बातचीत के दौरान नरेश ने अपनी पत्नी से वादा किया था कि वह और मकान का काम को पूरा करवाएगा. लेकिन सोमवार को हुए नक्सली हमले में वो शहीद हो गए.

नरेश यादव 1994 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में शामिल हुए थे. नरेश ने अपनी पत्नी से वादा किया था कि वह बहुत जल्द अपने गांव वापस आएंगे मगर जिस तरीके से वह वापस आ रहे हैं उसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी. वो बिहार के उन 6 जांबाजो में से एक हैं जिन्होंने सोमवार को छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी. नरेश यादव अपने पीछे ने बुजुर्ग मां-बाप, बीवी और 3 बच्चे छोड़ गए हैं. नरेश यादव अपने मां-बाप के एकलौते बेटे और परिवार में अकेले कमाने वाले भी थे. नरेश के परिजनों को उनकी शहादत की खबर सोमवार की रात टीवी के जरिए मिली जिसके बाद घर में मातम छा गया.

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नरेश यादव के के पिता राम नारायण यादव केंद्र सरकार से काफी नाराज हैं और सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक माओवादियों के आगे देश के जवान शहीद होते रहेंगे? नरेश के पिता ने मांग की है कि की जाए और उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया जाए. नरेश की तरह, बिहार का एक और सपूत कांस्टेबल कृष्ण कुमार पांडेय भी सुकमा नक्सली हमले में शहीद हो गए. रोहतास जिले के भरनदुआ गांव के निवासी कृष्ण कुमार पांडे इसी साल होली की छुट्टियों में घर आए थे और होली मनाने के बाद वापस सुकमा लौट गए थे.

कृष्ण कुमार की शादी 2013 में हुई थी. छह भाइयों में कृष्ण कुमार सबसे छोटे थे. उनका एक बड़ा भाई भी सीमा सुरक्षा बल में जवान है. कृष्ण कुमार अपने पीछे पत्नी अनीता देवी, एक बुजुर्ग मां और अपनी 7 महीने की बेटी छोड़ गए हैं. होली की छुट्टियां बिताने के बाद कृष्ण कुमार ने वादा किया था कि वह वापस मई के पहले सप्ताह गांव वापस आएंगे क्योंकि 5 मई को उनकी भतीजी की शादी है. मगर शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

नरेश यादव और कृष्ण कुमार पांडे की तरह बिहार के चार और जांबाज़ पटना निवासी कांस्टेबल सौरव कुमार, वैशाली जिला निवासी कांस्टेबल अभय कुमार, शेखपुरा जिला निवासी कांस्टेबल रंजीत कुमार और भोजपुर जिला निवासी अभय मिश्रा ने भी छत्तीसगढ़ के नक्सली हमले में शहादत हासिल की है.

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