पारुल यूनिवर्सिटी की अनूठी पहल, ग्लोबल लीडर्स से छात्रों ने सीखे लीडरशिप के मंत्र

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ग्लोबल पर्सपेक्टिव सीरीज़ के ज़रिए पारुल यूनिवर्सिटी अपनी उस पहचान को और मज़बूत कर रही है, जो उसे एक ग्लोबल स्तर पर जुड़ा हुआ शिक्षण संस्थान बनाती है और अंतरराष्ट्रीय लीडरशिप को सीधे क्लासरूम तक ले आती है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:49 PM IST
  • क्या है ग्लोबल पर्सपेक्टिव सीरीज़ का मकसद
  • जोसेफ मस्कट: युवाओं की भागीदारी पर ज़ोर
  • इवेता रादिचोवा: स्वास्थ्य नीति और वैश्विक सहयोग की बात

देश-दुनिया के शिक्षा जगत में अनोखी पहल करते हुए पारुल यूनिवर्सिटी ने I.I.M.U.N के साथ मिलकर अपनी ग्लोबल पर्सपेक्टिव सीरीज़ का खास संस्करण आयोजित किया. इस खास मौके पर दुनिया भर के पांच दिग्गज अंतरराष्ट्रीय लीडर्स ने छात्रों से सीधा संवाद किया और डिप्लोमेसी, गवर्नेंस, इनोवेशन, सोशल डेवलपमेंट और ग्लोबल सिटिज़नशिप जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव साझा किए.  इस पहल के जरिए छात्रों को असली दुनिया के अनुभवों और लीडरशिप से जुड़ी सोच को करीब से समझने का एक शानदार मंच मिला.

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क्या है ग्लोबल पर्सपेक्टिव सीरीज़ का मकसद

यह सीरीज़ पारुल यूनिवर्सिटी की उस कोशिश को दिखाती है, जिसके तहत यूनिवर्सिटी अपने छात्रों को दुनिया भर के मशहूर नीति-निर्माताओं, राष्ट्राध्यक्षों, राजनयिकों और विचारकों से सीधे जुड़ने का मौका देना चाहती है. इसका मकसद है क्लासरूम की पढ़ाई को असली दुनिया के अनुभवों से जोड़ना, ताकि छात्रों की समझ और बेहतर हो सके, अलग-अलग संस्कृतियों को समझने की क्षमता बढ़े, नीतियों की जानकारी मिले और उनमें लीडरशिप के गुण विकसित हों. आखिरकार, इस पूरी पहल का उद्देश्य छात्रों को इस तरह तैयार करना है कि वे आपस में जुड़ी हुई इस दुनिया में सार्थक भूमिका निभा सकें.

 

जोसेफ मस्कट: युवाओं की भागीदारी पर ज़ोर

इस सीरीज़ की शुरुआत माल्टा के पूर्व प्रधानमंत्री जोसेफ मस्कट से हुई, उन्होंने छात्रों को "बिखरी हुई दुनिया में ग्लोबल लीडरशिप: एक मजबूत भविष्य गढ़ने में युवाओं की भूमिका" विषय पर संबोधित किया. उन्होंने माल्टा को बड़े आर्थिक बदलावों और वैश्विक स्तर पर जुड़ाव के दौर से गुज़ारने के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि युवाओं को नीति-निर्माण, नई सोच और टीमवर्क आधारित लीडरशिप में शामिल होना चाहिए. साथ ही उन्होंने छात्रों को आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए मज़बूत, लचीला और वैश्विक नज़रिया अपनाने की सलाह दी.

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रुई डुआर्टे डी बैरोस: भारत-अफ्रीका संबंधों पर चर्चा

नस्लीय भेदभाव उन्मूलन के अंतरराष्ट्रीय दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर गिनी-बिसाऊ के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रख्यात अर्थशास्त्री महामहिम (H.E.) रुई डुआर्टे डी बैरोस ने सामाजिक पहलों और भारत-अफ्रीका संबंधों पर एक खास सत्र को संबोधित किया. उन्होंने रेखांकित किया कि कैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग, समावेशी विकास और शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारियां दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों को एक नई ऊंचाई दे रही हैं. युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने सीख दी कि विविधता, समानता और सामाजिक समावेश ही दुनिया भर में स्थायी टिकाऊ विकास की असली बुनियाद हैं.

 

इवेता रादिचोवा: स्वास्थ्य नीति और वैश्विक सहयोग की बात

विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर स्लोवाकिया की पूर्व प्रधानमंत्री एच.. इवेता रादिचोवा ने नीति, कूटनीति और उनके सामाजिक असर पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि फैसले हमेशा प्रमाणों पर आधारित होने चाहिए, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद अहम है और मज़बूत समाज बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नींव ज़रूरी है. उनके सत्र ने छात्रों को यह भी समझाया कि बदलती वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों और व्यापक सामाजिक समस्याओं से निपटने में नैतिक लीडरशिप और सही गवर्नेंस कितनी अहमियत रखती है.

 

अमीनाह गुरिब-फकीम: विज्ञान और नवाचार पर फोकस

इस सीरीज़ को और गहराई देते हुए मॉरीशस की छठी राष्ट्रपति और जानी-मानी वैज्ञानिक एच.. अमीनाह गुरिब-फकीम ने "बॉर्डरलेस दुनिया बनाने में युवाओं की भूमिका" विषय पर छात्रों को संबोधित किया. अपने वैज्ञानिक और लीडरशिप के लंबे सफर से मिले अनुभवों के आधार पर उन्होंने वैश्विक चुनौतियों को सुलझाने के लिए रिसर्च, इनोवेशन, पर्यावरणीय स्थिरता और वैज्ञानिक टीमवर्क के महत्व पर ज़ोर दिया.

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इवो योसिपोविच: विविधता और समावेश का संदेश

'ग्लोबल पर्सपेक्टिव सीरीज़ 2026' का शानदार समापन क्रोएशिया के तीसरे राष्ट्रपति, प्रख्यात न्यायविद और संगीतकार महामहिम एच.. इवो योसिपोविच के विशेष सत्र के साथ हुआ. अपने संबोधन में उन्होंने समाज में विविधता और समावेश को अपनाने पर जोर दिया. उन्होंने छात्रों के साथ यह दूरदर्शी विचार साझा किया कि सांस्कृतिक संवाद, आपसी सम्मान और एक समावेशी समाज ही वैश्विक शांति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और जिम्मेदार वैश्विक नागरिकता की असली बुनियाद हैं.

 

डॉ. पारुल पटेल ने क्या कहा

पारुल यूनिवर्सिटी की वाइस प्रेसिडेंट डॉ. पारुल पटेल ने कहा, "पारुल यूनिवर्सिटी में हम मानते हैं कि ग्लोबल एजुकेशन सिर्फ किताबी पढ़ाई तक सीमित नहीं है. ग्लोबल पर्सपेक्टिव सीरीज़ के ज़रिए हम अपने छात्रों को दुनिया भर के लीडर्स, नीति-निर्माताओं और बदलाव लाने वालों से सीधे जुड़ने का मौका दे रहे हैं, जिनके अनुभव गवर्नेंस, कूटनीति, इनोवेशन और सामाजिक बदलाव को लेकर बेहद कीमती जानकारी देते हैं. इन मुलाकातों से हमारे छात्रों की सोच का दायरा बढ़ता है, उनकी समझ और पैनी होती है, और वे एक ऐसे भरोसेमंद ग्लोबल सिटिज़न के तौर पर तैयार होते हैं, जो ज्ञान, संवेदनशीलता और इरादे के साथ इस आपस में जुड़ी हुई दुनिया का नेतृत्व कर सकें."

 

एक ग्लोबल संस्थान के तौर पर आगे बढ़ती पारुल यूनिवर्सिटी

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ग्लोबल पर्सपेक्टिव सीरीज़ के ज़रिए पारुल यूनिवर्सिटी अपनी उस पहचान को और मज़बूत कर रही है, जो उसे एक ग्लोबल स्तर पर जुड़ा हुआ शिक्षण संस्थान बनाती है और अंतरराष्ट्रीय लीडरशिप को सीधे क्लासरूम तक ले आती है. छात्रों और दुनिया भर के लीडर्स के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देकर यूनिवर्सिटी ऐसे प्रोफेशनल्स तैयार करने पर फोकस कर रही है, जो आपस में जुड़ी हुई इस दुनिया की चुनौतियों और अवसरों को समझते हुए समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें.

 

 

 

 

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