अचानक सीएम विजय को 'इंसाफ का धुंरधर' साबित करने में क्यों जुट गए हैं हिन्दी के इनफ्लूएंसर्स

हिंदी का कोई इन्फ्लुएंसर अगर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की शान में कसीदे पढ़े तो कोई हैरानी की बात नहीं. वो हैं ही इतने लोकप्रिय. लेकिन अगर कई इन्फ्लुएंसर उनके ऐसे फैसलों की तारीफ करते हुए हूबहू एक ही स्क्रिप्ट पढ़ने लगें, जो उन्होंने किए ही नहीं, तो सवाल उठना लाजिमी है.

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ठोस सबूतों के अभाव में यह कह पाना मुश्किल है कि क्या यह कोई कोऑर्डिनेटेड कैंपेन है. (Photo- ITG) ठोस सबूतों के अभाव में यह कह पाना मुश्किल है कि क्या यह कोई कोऑर्डिनेटेड कैंपेन है. (Photo- ITG)

ज्योति द्विवेदी

  • नई दिल्ली,
  • 15 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:30 PM IST

“मुख्यमंत्री विजय के एक फैसले ने तमिलनाडु में सबको चौंका दिया है. उन्होंने ऐलान किया है कि अगर किसी लड़की का बलात्कार होता है, तो उसकी उम्र चाहे 8 साल हो या 18 साल, चाहे वो हिंदू हो या मुस्लिम, तमिलनाडु की हो या किसी और राज्य की; दोषी को या तो फांसी की सजा होगी या उसका एनकाउंटर कर दिया जाएगा.”

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हो सकता है कि किसी इन्फ्लुएंसर का इस तरह का कोई वीडियो आपने भी सोशल मीडिया पर देखा हो. खास बात यह है कि हिंदी भाषा में बनाए गए ऐसे तमाम वीडियो में इन्फ्लुएंसर हू-ब-हू, बिल्कुल इन्हीं शब्दों को दोहरा रहे हैं.

इसी तरह के दूसरे वीडियो में कुछ इन्फ्लुएंसर कह रहे हैं कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने ऐलान किया है कि अगर किसी प्राइवेट अस्पताल में किसी मरीज की जान चली जाती है तो उसके परिवार को अस्पताल का कोई बिल नहीं चुकाना होगा.  एक बार फिर, इसी बात को, ठीक इन्हीं शब्दों में तमाम हिंदी के इन्फ्लुएंसर दोहरा रहे हैं.

इतनी बात तो आप भी समझ सकते हैं कि कोई भी मुख्यमंत्री इस तरह का ऐलान नहीं कर सकता. सजा का फैसला न्यायपालिका करती है, न कि मुख्यमंत्री. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हमें यह बताया भी कि विजय के नाम पर वायरल ये दोनों बयान एकदम फर्जी हैं.

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राजस्थान के श्रीगंगानगर में और पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में नाबालिग बच्चियों के साथ हुई सामूहिक बलात्कार की घटनाओं के बाद सामने आए ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं. इनमें ये दिखाया गया है कि किस तरह से मुख्यमंत्री विजय दोषियों को कड़ी सजा दिलवाते हैं और भ्रष्टाचार खत्म करते हैं. ठीक उसी तरह, जैसा कि वो अपनी फिल्मों में करते हुए दिखते थे.

साल 2004 में विजय ने 'गिल्ली' (Ghilli) फिल्म में एक ऐसे कबड्डी खिलाड़ी का किरदार निभाया था, जो एक लड़की को गैंग लीडर से बचाता है. वहीं, एक दूसरी फिल्म 'मर्सल' (Mersal) में उन्होंने अस्पतालों में चलने वाली धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाई थी.

उनकी ऐसी तमाम फिल्में हैं, जिनमें वो आम लोगों के लिए भ्रष्टाचारियों और अपराधियों से लड़ते और जीतते हैं. विजय ऐसे पहले तमिल अभिनेता नहीं हैं, जिन्होंने फिल्मों के जरिए राजनीति की दुनिया में आने का रास्ता बनाया. उनसे पहले भी कई तमिल अभिनेता ऐसा कर चुके हैं, लेकिन विजय ऐसे पहले अभिनेता हैं जिन्होंने इस रास्ते पर चलकर सफलता के शिखर तक पहुंचने में कामयाबी पाई और सीधे मुख्यमंत्री बन गए.

मुख्यमंत्री विजय के नाम पर वायरल प्राइवेट अस्पताल वाले फर्जी फैसलों पर बने ज्यादातर वीडियोज में एक ही अस्पताल दिखता है और वही स्टाफ के लोग दिखते हैं. ज्यादातर पर यही लिखा है: "थलपति विजय का बड़ा नया फैसला." वहीं, कुछ इन्फ्लुएंसर तो ऐसे भी हैं जो एआई (AI) से बनाए हुए थंबनेल्स और क्लिकबेट हेडलाइंस के साथ विजय के वीडियो को शेयर कर रहे हैं. इनमें से कुछ के थंबनेल में लिखा हैं: "मुख्यमंत्री विजय ने कहा - मेरे राज्य में कोई भी बलात्कारी जिंदा नहीं बचेगा."

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हिंदी में जो इन्फ्लुएंसर वीडियो बना रहे हैं, उनमें हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक के लोग शामिल हैं. इनमें हरियाणा की ऋतु शर्मा, बिहार के चंदन क्रिएटर और उत्तर प्रदेश के सुहैल खान जैसे नाम शामिल हैं. कुछ इन्फ्लुएंसर अपने वीडियो में जब इन झूठे फैसलों की बात करते हैं तो गोलमोल भाषा का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन 'मीना यादव' और 'मिस्टर नेक्सा' जैसे लोग सीधे तौर पर और बिना बात को घुमाए-फिराए विजय के इन कथित फैसलों की बात करते हैं.
 
इनमें से तमाम वीडियो ऐसे हैं जिन्हें हजारों की संख्या में लोगों ने लाइक और शेयर किया है. अगर आप, लोगों के कमेंट्स पढ़ें, तो आपको पता चलेगा कि इन वीडियो को देखने वाले तमाम लोग इन्हें सच मान रहे हैं. कुछ लोग सवाल भी उठा रहे हैं कि विजय आखिर ऐसा फैसला कैसे ले सकते हैं? हमने ऐसे वीडियो बनाने वाले कई इन्फ्लुएंसर्स से पूछा कि इस तरह के वीडियो में उन्होंने जो बातें कही हैं, उसका आधार क्या है और यह जानकारी कहां से आई है? लेकिन स्टोरी छपने तक किसी ने हमें इस सवाल का जवाब नहीं दिया.

ठोस सबूतों के अभाव में यह कह पाना मुश्किल है कि क्या यह कोई कोऑर्डिनेटेड कैंपेन (Coordinated Campaign) है. हो सकता है कि बहुत सारे इन्फ्लुएंसर एक्टर विजय की जबरदस्त लोकप्रियता का फायदा उठाकर अपना एनगेजमेंट बढ़ाना चाह रहे हों. लेकिन अगर ऐसा है, तो एक सवाल जरूर उठता है कि इतने सारे इन्फ्लुएंसर हू-ब-हू एक ही स्क्रिप्ट पढ़कर वही झूठ क्यों दोहरा रहे हैं?

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(इनपुट: प्रमोद माधव)

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