Mind Rocks: 'सुनने की आदत और जिज्ञासा ही है सक्सेस का रास्ता'

इंडिया टुडे ग्रुप के माइंड रॉक्स इवेंट में शामिल हुए इंफोसिस के को-फाउंडर और पूर्व सीईओ कृष गोपालकृष्णन ने बताया कि लोगों में सुनने की आदत और बेहतर जानने के लिए जिज्ञासा होनी चाहिए.

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माइंडरॉक्स कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कृष गोपालकृष्णन माइंडरॉक्स कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कृष गोपालकृष्णन

साकेत सिंह बघेल

  • नई दिल्ली,
  • 15 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST

दिल्ली में इंडिया टुडे ग्रुप द्वारा माइंड रॉक्स इवेंट का आयोजन किया गया है. इसमें इंफोसिस के को-फाउंडर और पूर्व सीईओ कृष गोपालकृष्णन ने हिस्सा लिया. मंच साझा करते हुए उन्होंने टेक्नोलॉजी के कई पहलुओं पर बात की. साथ ही कार्यक्रम में मौजूद छात्रों के सवालों का जवाब भी दिया.

कार्यक्रम के दौरान किसी शख्स ने जब पूछा कि कृष में ऐसी क्या खूबियां हैं जो कृष को कृष बनाती हैं. तो जवाब में उन्होंने कहा कि दो तीन चीजें ऐसी हैं जो सभी में होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सबसे पहले लोगों को सुनने की आदत होनी चाहिए. साथ ही लोगों में हर चीज को लेकर खूब जिज्ञासा भी होनी चाहिेए. यही सक्सेस का रास्ता है.

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इसके अलावा उन्होंने कहा कि पढ़ना सबसे महत्वपूर्ण चीज है. वो खुद वीडियो देखने से ज्यादा पढ़ना पसंद करते हैं. उनका मानना है कि पढ़ी हुई चीजें बेहतर तरीके से दिमाग में बैठती हैं. जो लोग कहते हैं कि उनके पास पढ़ने के लिए वक्त नहीं बचता ऐसे लोग समय का सही मैनेजमेंट नहीं जानते.

एक बेहतरीन स्टार्टअप कैसा होना चाहिए? इस सवाल के जवाब में कृष गोपालकृष्णन ने कहा कि स्टार्टअप का आइडिया काफी हटके और नया होना चाहिए. ऐसा आइडिया होना चाहिए जो दुनिया को बदल सके. साथ ही आइडिया में इतना नयापन होना चाहिए कि लोग उस आइडिया पर काम करने के लिए दिलचस्पी लें.

साथ ही उन्होंने कहा कि आइडिया पैदा करना 5 प्रतिशत चैलेंज ही है. असल मुश्किल उसके क्रियान्वन में होती है. कंपनी खड़ी करना मैराथन है. रातोंरात कोई भी कंपनी खड़ी नहीं होती.

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इसके अलावा नौकरी के खतरे के बारे में कृष का कहना है कि हर टेक्नोलॉजी आपकी नौकरी छीन सकती है. हमें मशीनों के साथ रहना है और उनके जितना स्मार्ट बनना है. टेक्नोलॉजी नई नौकरियां भी पैदा करता है. जैसे फेसबुक पर 23 हजार लोग केवल फोटोज फिल्टर करने का काम करते हैं.

ऐसे समय में जब लोग ये सोच रहे हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य ऑटोमैटिक तकनीकें हमारी नौकरियां छीन सकती हैं, कृष का कुछ और ही मानना है. उन्होंने कहा कि AI आज के दौर में बहुत सारी चीजों को बदल सकता है.

उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि एक बग्घी चलाने वाला यदि मशीनों के युग में गाड़ी चलान नहीं सिखेगा तो वो हार जाएगा. हर नई टेक्नोलॉजी में लोगों को रिप्लेस करने की क्षमता होती है. ऐसे में हमें भविष्य की नौकरियों को पहचानना होगा और उसी के मुताबिक अपने स्किल्स को डेवलप करना होगा.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बात करते हुए कृष ने कहा कि AI केवल एक कैलकुलेटिंग मशीन है. इसे क्या कैलकुलेट करना है वो इंसानों को सीखाना होगा. AI का उपयोग हेल्थ सेक्टर समेत कई और सेक्टर में बेहतर तरीके से किया जा सकता है. क्योंकि ये मशीन लर्निंग के साथ काम करता है और इंसानों के मुकाबले ज्यादा डेटा याद रख सकता है.

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AI से पैदा होने वाली नई नौकरियों पर बात करते हुए इंफोसिस के पूर्व सीईओ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से फायदा उठाने का ये सही समय है. मशीन लर्निंग के लिए एल्गोरिदम डेवलप करना या मशीनों के लिए नए चिप और प्रोसेसर बनाना ये वो काम हैं, जिनमें युवा जा सकते हैं.

युवाओं से बात करते हुए कृष ने कहा कि आपके लिए मौजूदा ट्रेंड को पहचानना जरूरी है और इसी पर आगे बढ़ना है. उन्होंने कहा कि AI, मशीन लर्निंग, न्यूरोसाइंस और ब्रेन साइंस हालिया ट्रेंड हैं, जिन पर आगे बढ़ा जा सकता है.

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