'जवाबदेही कहां है?' राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर फूटा टीवी एक्ट्रेस का गुस्सा, बोली- भरोसे की रक्षा होनी चाहिए

राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस के कारण कई लोगों का गुस्सा और नाराजगी देखी जा रही है. इसमें एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी भी जुड़ गई हैं. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस कांड की जिम्मेदारी कौन लेगा, ऐसा गंभीर सवाल उठाया है.

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देवोलीना का भड़का गुस्सा (Photo: Instagram @devoleena) देवोलीना का भड़का गुस्सा (Photo: Instagram @devoleena)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:40 PM IST

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा घोटाला इस समय पूरे देश में हॉट डिबेट बना हुआ है. हर तरफ से गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है. सवाल उठ रहे हैं कि आखिर भक्तों की श्रद्धा के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है. इस केस को सुलझाने के लिए सरकार और SIT जांच में लगातार जुटी हुई है. उम्मीद की जा रही है कि अपराधी को सजा जल्द मिलेगी. 

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चढ़ावा चोरी के केस में हर तरफ से रिएक्शन्स देखने मिल रहे हैं. टीवी की बहू एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी ने सोशल मीडिया के जरिए इस पूरे मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की है. X पर ट्वीट करके उन्होंने सरकार को घेरा है. साथ ही इस मामले में किसी की जिम्मेदारी ना लिए जाने पर सवाल खड़े किए हैं. 

सरकार पर देवोलीना ने उठाए सवाल

एक लंबे नोट में देवोलीना लिखती हैं- पूरी राजनीतिक नेतागण राम मंदिर के निर्माण का श्रेय लेने में बहुत गर्व महसूस कर रहे थे. चुनावों में इसे बड़ा मुद्दा बनाया गया और इससे निश्चित रूप से वोट भी मिले. लेकिन इसके बाद क्या? जब चोरी, गड़बड़ी या अनियमितताओं के आरोप लगते हैं, तो जवाबदेही कहां जाती है? क्या श्रेय तो सिर्फ अच्छे काम का लेना है, और गलती होने पर जिम्मेदारी गायब हो जाती है? 

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'लाखों-करोड़ों भक्तों ने इस पवित्र जगह में अपना विश्वास, भावनाएं और भरोसा रखा है. इस भरोसे की पूरी तरह रक्षा होनी चाहिए, पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ.' देवोलीना आगे अपनी पोस्ट में हर धर्म के लिए लिखती हैं- कई बार ऐसा लगता है कि हर तरफ एक ही खेल चलता है- उपलब्धि का श्रेय लेना तो सबको पसंद है, लेकिन सवाल उठे तो जिम्मेदारी से भाग जाना.

'इसीलिए मैंने हमेशा यही माना है कि हमें देश के प्रति समर्पित होना चाहिए, किसी व्यक्ति के प्रति नहीं. जब हमारी वफादारी किसी नेता या पार्टी की बजाय देश और उसके मूल्यों के प्रति होगी, तब हम सही के साथ खड़े हो सकेंगे – भले ही हमारे पसंदीदा व्यक्ति गलत हो. गलत बात गलत ही रहती है. कोई भी जवाबदेही से ऊपर नहीं होना चाहिए. यही लोकतंत्र की मांग है.'

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