दिलजीत दोसांझ से पिछले कुछ सालों से जहां भी वो जाते थे, उनसे पूछा जाता था कि पंजाब 95 कब रिलीज हो रही है. CBFC के पंगे में 4 साल से फंसी ये फिल्म अचानक ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हो गई है, लेकिन अब इसका नाम सतलुज हो गया है. रियल लाइफ स्टोरी पर बनी इस फिल्म का इंतजार दिलजीत के फैंस, खासकर पंजाब के लोगों को बहुत बेसब्री से था, मगर सेंसर बोर्ड के पंगे में फंसी इस फिल्म के रिलीज हो पाने पर भी संशय नजर आने लगा था.
अब फाइनली सतलुज नाम से दिलजीत की ये फिल्म ओटीटी पर पहुंच चुकी है. आइए बताते हैं कि इस फिल्म पर क्या विवाद था और वो कहानी क्या है जिसकी वजह से लोग इसका इंतजार कर रहे थे.
डायरेक्टर हनी त्रेहान की इस फिल्म की सेंसर बोर्ड के सामने पहली स्क्रीनिंग 2022 में हुई थी. मगर सेंसिटिव टॉपिक देखते हुए मेकर्स ने इसमें 22 कट सुझाए थे, लेकिन 2024 में खबर आई कि बोर्ड इस फिल्म में 100 से ज्यादा कट्स सुझा चुका है. बोर्ड ने फिल्म में दिलजीत के किरदार का नाम बदलकर पंजाब की नदी 'सतलुज' के नाम पर रखने को भी कहा था.
फिर भी 2025 में दिलजीत सोशल मीडिया पर इस फिल्म में हो रही देरी के लिए जनता से माफी मांगते हुए कह रहे थे कि कुछ चीजें उनके नियंत्रण से बाहर हैं. इसलिए एक समय फैंस भी ये मान चुके थे कि शायद ये भी उन फिल्मों में से होगी जो बनकर कभी रिलीज नहीं हुईं, लेकिन हाल ही में दिलजीत ने अपने इंस्टाग्राम लाइव में कहा था कि जल्द ही पंजाब 95 को लेकर बड़ा अपडेट आने वाला है. लेकिन तब शायद ही किसी ने सोचा हो कि ये फिल्म नए नाम के साथ, बिना किसी प्रचार अचानक ओटीटी पर पहुंच जाएगी.
1970 के दशक के अंत तक पंजाब में खालिस्तानी आंदोलन जोर पकड़ चुका था. 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगे शुरू हो गए. उसके बाद पंजाब ने अगले एक दशक तक मिलिटेंसी का जो खूनी दौर देखा, उसमें पंजाब पुलिस पर भी एक बहुत बड़ा दाग लगा था— बिना सबूत लड़कों को आतंकवादी बताकर उनके एनकाउंटर.
सतलुज इसी दौर में ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट रहे जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी है. वो अमृतसर, पंजाब के सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक में डायरेक्टर थे. उनके एक साथी अचानक गायब हुए और कई दिन तक खोजने के बाद पता चला कि पुलिस ने एनकाउंटर करके गुपचुप अंतिम संस्कार भी कर दिया.
इस बात से दुखी जसवंत ने ऐसे मामलों में रिसर्च करनी शुरू की और दावा किया कि पंजाब पुलिस करीब 25,000 लोगों की गैर-कानूनी हत्या और अंतिम संस्कार में शामिल रही है. पुलिस ने पहले तो इनकार किया लेकिन जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो सामने आया कि जून 1984 से दिसंबर 1994 के बीच सिर्फ तीन जिलों में ही पुलिस ने 2000 से ज्यादा लावारिस शवों के अंतिम संस्कार किए हैं.
बाद में, द ट्रिब्यून में इनमें से पहचाने गए 600 से ज्यादा नामों की भी एक लिस्ट छपी. जसवंत के इस एक्टिविज़्म का नतीजा ये निकला कि एक दिन उनके घर के बाहर से पुलिस उन्हें ले गई और फिर वो नहीं मिले. सीबीआई ने एक साल बाद जांच में पाया कि उनका भी एनकाउंटर कर दिया गया था.
इस मामले में चार पुलिस अधिकारियों को उम्रकैद की सजा भी हुई थी. सतलुज में दिलजीत दोसांझ उन्हीं जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार निभा रहे हैं. उनके साथ अर्जुन रामपाल और कोहरा वेब सीरीज के लिए पॉपुलर सुविंदर विक्की भी हैं. इन दोनों ने धुरंधर में बाप-बेटे का भी रोल प्ले किया था. अब देखना है कि अचानक आई इस गंभीर कहानी पर बनी फिल्म सतलुज पर जनता का क्या रिएक्शन आता है.
सुबोध मिश्रा