पिछले साल ऑस्कर अवॉर्ड्स की रेस का हिस्सा रही सबसे मार्मिक फिल्मों में से एक द वॉयस ऑफ हिंद रजाब फाइनली भारत में रिलीज के लिए तैयार है. इस फिल्म को पिछले साल ऑस्कर्स में 'बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म' कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला था. लेकिन भारत में ये फिल्म मार्च से ही सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से सर्टिफिकेट मिलने का इंतजार कर रही थी. पहले मेकर्स इसे 6 मार्च को भारत में रिलीज करने का प्लान बना रहे थे, लेकिन अब हरी झंडी मिलने के बाद ये 19 जून को थिएटर्स में दस्तक देगी.
डायरेक्टर कौथर बेन हानिया (Kaouther Ben Hania) की फिल्म द वॉयस ऑफ हिंद रजाब, इजरायली हमले में मारी गई 6 साल की बच्ची की कहानी है. इजरायल-फिलिस्तीन कॉन्फ्लिक्ट एक बेहद सेंसिटिव मुद्दा है, जिसके अपने राजनीतिक और कूटनीतिक असर हैं. ऐसे में CBFC को इस फिल्म से भारत-इजरायल संबंधों के बिगड़ने का डर था.
मार्च में फिल्म के इंडियन डिस्ट्रीब्यूटर मनोज नंदवाना ने 'वैरायटी' को बताया था कि फिल्म को सेंसर किया जा रहा है क्योंकि ये एक बहुत 'सेंसिटिव मुद्दा' है. मनोज ने कहा था कि एक CBFC सदस्य ने उनसे साफ कहा था, 'अगर ये रिलीज हुई तो भारत-इजरायल के संबंध बिगड़ जाएंगे.' दरअसल, हिंद रजाब की मौत पर ग्लोबल लेवल पर खूब कोहराम मचा था. 6 साल की बच्ची की ये कहानी इतनी भयानक और भावुक है कि इसमें इजरायल की नेगेटिव इमेज दिखने का रिस्क था.
इजरायल के हमले के बीच रजाब और उसके परिवार के 6 लोग गाजा शहर छोड़कर गाड़ी से भाग रहे थे. तभी एक इजरायली टैंक ने उनकी गाड़ी को निशाना बनाया. रजाब की आंटी-अंकल और तीन कजिन की मौत हमले में तुरंत हो गई थी. लेकिन रजाब और उसकी 15 साल की कजिन बहन, लायन हमादेह गाड़ी में जिंदा बचे थे.
लायन ने फिलिस्तीन की रेड क्रेसेंट सोसाइटी (PRCS) को मदद के लिए फोन लगाया और रोते हुए बताया, "वो शूट कर रहे हैं. हम कार में हैं और टैंक हमारे सामने है." कॉल पर मशीन गन की आवाज के बीच लायन के चिल्लाने की आवाज आई और उसकी मौत हो गई.
जब उन्हें पलटकर कॉल किया गया तो 6 साल की बच्ची रजाब ने फोन उठाया. उसने बताया कि कार में बाकी सब मारे गए हैं और टैंक पास आ रहा है. रजाब कार में छुपे हुए तीन घंटे तक PRCS के साथ लाइन पर रही और लगातार कहती रही, "मैं बहुत डरी हुई हूं, प्लीज आ जाइए. मुझे बचा लीजिए. प्लीज आप आएंगे न?" बाद में रेड क्रेसेंट ने रजाब की इस दर्दनाक ऑडियो रिकॉर्डिंग को पब्लिश भी किया था.
उस इलाके पर इजरायल का कब्जा था, इसलिए घंटों इंतजार और परमिशन के बाद PRCS की एम्बुलेंस वहां के लिए रवाना हुई. एम्बुलेंस ने कॉल पर बताया कि उन्हें भी टारगेट किया जा रहा है. इसके बाद एक गोली चलने की आवाज और धमाके के साथ एम्बुलेंस से भी संपर्क कट गया. 12 दिन बाद इजरायली फोर्स के हटने के बाद जब रजाब का परिवार उस जगह पहुंचा, तो रजाब की लाश मिली. PRCS की एम्बुलेंस उनसे कुछ ही फीट दूर तबाह हालत में मिली और उसमें सवार दोनों पैरामेडिकल सदस्य भी मारे जा चुके थे.
शुरुआती जांच में सामने आया कि रजाब और उसके परिवार को इजरायली फोर्स ने टारगेट किया था. हालांकि, इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दावा किया कि उनकी कोई टुकड़ी उस समय उस लोकेशन पर मौजूद नहीं थी. लेकिन 'द वाशिंगटन पोस्ट' और 'स्काई न्यूज' की जांच ने सैटेलाइट इमेज और विजुअल एविडेंस के आधार पर इस दावे को गलत पाया. इस जांच में सामने आया कि जिस कार में रजाब और उसका परिवार था, उस पर 335 राउंड फायर किए गए थे. टैंक ऑपरेटर्स ऐसी पोजीशन में थे कि उन्हें कार में बैठे सिविलियन साफ दिख रहे थे.
इस मामले पर दुनिया भर में आक्रोश नजर आया था. इसकी लचर कवरेज के लिए लोगों ने वेस्टर्न मीडिया की भी कड़ी आलोचना की थी. अमेरिका के छात्र प्रदर्शनकारियों ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी का हैमिल्टन हॉल घेर लिया था और रजाब के सम्मान में हॉल का नाम 'हिंद्स हॉल' रख दिया था.
द वॉयस ऑफ हिंद रजाब हमले के बाद आए रजाब के फोन और PRCS के रिस्पॉन्स की रीयल कहानी को बयां करती है. इसका प्रीमियर वेनिस फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जहां इसकी खूब तारीफ हुई. प्रीमियर से पहले ही ब्रैड पिट और वाकीन फीनिक्स जैसे बड़े हॉलीवुड स्टार्स बतौर एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर इस फिल्म के साथ जुड़ गए थे. वेनिस में इस फिल्म ने ग्रैंड ज्यूरी प्राइज जीता था. ट्यूनीशिया ने इसे ऑस्कर्स में अपनी ऑफिशियल एंट्री बनाकर भेजा था. अब फाइनली 19 जून को यह डाक्यु-ड्रामा फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क