एक्ट्रेस संचिता उगले को था आउटसाइडर होने का मलाल, स्ट्रगल पर छलका था दर्द

'कुमकुम भाग्य' फेम टेलीविजन एक्ट्रेस संचिता उगले ने 14 जून को मुंबई में आत्महत्या कर ली. उनकी मौत की वजह की जांच की जा रही है. एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने आउटसाइडर होने पर बात की थी.

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संचिता उगले ने किया सुसाइड (Photo: Instagram/sanchita_ugale) संचिता उगले ने किया सुसाइड (Photo: Instagram/sanchita_ugale)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:40 PM IST

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है. छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक अपनी पहचान बनाने वाली जानी-मानी एक्ट्रेस संचिता उगले ने 14 जून को मुंबई में खुदकुशी कर ली.  संचिता को 'कुमकुम भाग्य' और 'वागले की दुनिया' जैसे पॉपुलर टीवी शो और विक्की कौशल की फिल्म 'छावा' में उनके बेहतरीन काम के लिए जाना जाता था. संचिता ने कुछ समय पहले ही एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के दर्द और संघर्ष को लेकर खुलकर बात की थी.

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संचिता ने बताया था कि कैसे बड़े एक्टर्स के साथ काम करने के बाद भी बॉलीवुड में एक आउटसाइडर के लिए लीड रोल पाना कितना मुश्किल होता है, जिसके चलते उन्हें फिल्मों के सपने के साथ-साथ अपने रोजमर्रा के खर्चों को चलाने के लिए टीवी का सहारा लेना पड़ा था. आइए जानते हैं संचिता ने क्या कुछ कहा था.

फिल्मों में लीड रोल मिलना था मुश्किल
दिवंगत एक्ट्रेस संचिता उगले ने अपने 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' को दिए एक पुराने इंटरव्यू में फिल्मी दुनिया में करियर बनाने के दौरान आने वाली कड़वी सच्चाइयों और चुनौतियों पर खुलकर बात की थी. उन्होंने 'छावा' और 'साइलेंस 2' जैसी फिल्मों में इंडस्ट्री के दिग्गज और जाने-माने एक्टर्स के साथ स्क्रीन शेयर की थी. इसके बावजूद संचिता ने इस बात को स्वीकार किया था कि बॉलीवुड में लीड रोल पाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था. उनका मानना था कि इंडस्ट्री से बाहर का होने के कारण (आउटसाइडर) उन्हें वे मौके नहीं मिल पा रहे थे, जिनकी वह हकदार थीं.

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टीवी से शुरू किया सफर और बटोरी सुर्खियां
संचिता ने एक्टिंग की दुनिया में अपने सफर की शुरुआत टेलीविजन से की थी. उन्होंने 'कुमकुम भाग्य' और 'वागले की दुनिया' जैसे टीवी के सबसे लोकप्रिय और घर-घर में देखे जाने वाले शोज में काम किया, जहां उनके एक्टिंग को काफी पसंद किया गया. इसके बाद उन्हें टेलीविजन ड्रामा 'दिलवाली दूल्हा ले जाएगी' में लीड रोल निभाने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने 'सुकून' का लीड रोल प्ले किया था. संचिता ने टीवी इंडस्ट्री के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त किया था. उन्होंने इसे एक ऐसा मंच बताया था जो सिर्फ टैलेंट और कड़ी मेहनत की कद्र करता है.

टीवी की दुनिया में नहीं चलता कोई शॉर्टकट
टीवी के बारे में बात करते हुए संचिता ने कहा था, 'मैं टीवी इंडस्ट्री का बहुत आदर करती हूं. यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो हर कलाकार के साथ निष्पक्ष व्यवहार करता है, चाहे आप अंदर के हों या बाहर के. यहां टिकने के लिए सिर्फ और सिर्फ आपके हुनर और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है; यहां कामयाबी का कोई शॉर्टकट नहीं है. इस माध्यम ने मुझे एक्टिंग की बारीकियां सीखने और कैमरे का आत्मविश्वास से सामना करने में बहुत मदद की है. हालांकि मैं टीवी पर काम करना जारी रखूंगी, लेकिन फिल्मों में अपनी पहचान बनाना ही मेरा असली और अंतिम लक्ष्य है.'

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मुंबई के खर्चों को संभालने के लिए व्यावहारिक फैसले
संचिता, विक्की कौशल की फिल्म 'छावा' का हिस्सा थीं, जिसमें उन्होंने 'ताराबाई' का बेहद महत्वपूर्ण किरदार निभाया था. इसके अलावा वह मनोज बाजपेयी स्टारर फिल्म 'साइलेंस 2' और मशहूर क्राइम सीरीज 'क्राइम आज कल' में भी नजर आई थीं. हालांकि, इन बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने के बाद भी उन्हें जल्द ही इस बात का अहसास हो गया था कि फिल्मों में लगातार अच्छे मौके मिलना इतना आसान नहीं है.

मुंबई जैसे महंगे शहर में टिके रहने की व्यावहारिक दिक्कतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था, 'मैंने फिल्म 'छावा' में काम किया, जहां ताराबाई का रोल निभाना मेरे लिए एक शानदार अनुभव था. मैंने 'साइलेंस 2' और 'क्राइम आज कल' में भी काम किया, लेकिन मुझे समझ आ गया था कि आउटसाइडर होने के नाते फिल्मों में लीड रोल मिलना बहुत मुश्किल है. दूसरी तरफ, मुझे टीवी शो में लीड रोल के लगातार ऑफर मिल रहे थे. चूंकि मुझे मुंबई में रहने और अपने रोज के खर्चों को भी मैनेज करना है, इसलिए फिलहाल मैं एक बुनियादी नियम का पालन करती हूं कि जो भी अच्छे रोल मिलें, उन्हें चुनूं और पूरी शिद्दत से करूं.'

बॉलीवुड स्टार्स का जताया आभार 
भले ही संचिता के सामने संघर्ष बड़ा था, लेकिन वह हमेशा बेहतरीन कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिलने के लिए दिल से आभारी रहती थीं. उन्होंने मनोज बाजपेयी, विक्रांत मैसी और विक्की कौशल जैसे मंझे हुए कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा करने को अपने लिए एक 'सपना सच होने जैसा' बताया था. संचिता का कहना था कि सेट पर इन सीनियर एक्टर्स को काम करते देखना उनके लिए किसी पाठशाला से कम नहीं था. उनके काम को देखकर संचिता को अपनी कला को और निखारने की प्रेरणा मिलती थी.

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