अमेठी से हार के बाद स्मृति ईरानी का पोस्ट, बोलीं- जोश अब भी हाई

अमेठी से स्मृति ईरानी के सामने कांग्रेस के टिकट पर किशोरी लाल (KL) शर्मा ने चुनाव लड़ा. किशोरी लाल को 539228 वोट मिले. जबकि स्मृति ईरानी को 372032 वोट हासिल हुए. किशोरी लाल शर्मा 167196 मतों से चुनाव जीत गए. स्मृति ईरानी ने 2019 में इसी सीट पर राहुल गांधी को हराया था. 

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Smriti Irani Smriti Irani

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2024,
  • अपडेटेड 8:14 PM IST

भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ी स्मृति ईरानी ने हार स्वीकार कर ली है. चुनाव हारने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा है कि वह आगे भी अमेठी के लोगों की सेवा करती रहेंगी. भावुक अंदाज में स्मृति ईरानी ने कहा कि जीवन ऐसा है...एक दशक से भी ज्यादा समय तक मैंने एक गांव से दूसरे गांव जाकर लोगों की सेवा की. मैंने लोगों की जिंदगी संवारने, उम्मीदों और आकांक्षाओं को संजोने, बुनियादी ढांचे पर काम करने में अपना समय बिताया. मैंने सड़कें, नालियां, खड़ंजा, बाईपास, मेडिकल कॉलेज और भी बहुत कुछ बनवाने का काम किया. स्मृति ईरानी न कहा कि हार और जीत में मेरे साथ खड़े रहने वालों का मैं हमेशा आभारी रहूंगी. आज जश्न मनाने वालों को बधाई. और जो लोग पूछ रहे हैं, 'कैसा जोश है?' मैं कहती हूं- जोश अभी भी हाई है, सर.

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मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैं भाजपा पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त करती हूं, जिन्होंने पूरी लगन और निष्ठा के साथ निर्वाचन क्षेत्र और पार्टी की सेवा में काम किया है. आज मैं पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की आभारी हूं कि उनकी सरकारों ने 30 साल के लंबित कामों को सिर्फ 5 साल में पूरा कर दिया. मैं जीतने वालों को बधाई देती हूं.

167196 वोटों से हारीं स्मृति ईरानी
अमेठी से स्मृति ईरानी के सामने कांग्रेस के टिकट पर किशोरी लाल (KL) शर्मा ने चुनाव लड़ा. किशोरी लाल को 539228 वोट मिले. जबकि स्मृति ईरानी को 372032 वोट हासिल हुए. किशोरी लाल शर्मा 167196 मतों से चुनाव जीत गए. स्मृति ईरानी ने 2019 में इसी सीट पर राहुल गांधी को हराया था. 

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पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं किशोरी लाल शर्मा
केएल शर्मा का पूरा नाम किशोरी लाल शर्मा है, जो गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं. मूलत पंजाब के लुधियाना के रहने वाले हैं. शर्मा ने 1983 में राजीव गांधी के साथ रायबरेली और अमेठी में कदम रखा था. बाद में राजीव गांधी के अचानक निधन के बाद गांधी परिवार से उनके रिश्ते पारिवारिक हो गए और वो गांधी परिवार के ही होकर रह गए.

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