यूपी के बाद बिहार की रणभूमि में भी आया कब्रिस्तान की चारदीवारी का मुद्दा

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कब्रिस्तान बनाम श्मशान का मुद्दा उठाकर चुनावी रुख को ही पूरी तरह से बदल दिया था. अब नीतीश कुमार ने बिहार की चुनावी रणभूमि में कब्रिस्तान की चारदीवारी का मुद्दा उठाकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है. हालांकि, यह मुद्दा जेडीयू के लिए कितना सियासी फायदेमंद होगा यह तो आने वाले वक्त में ही पता चल सकेगा. 

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:58 AM IST
  • 6299 कब्रिस्तान की चारदीवारी का निर्माण
  • बिहार में नीतीश ने उठाया कब्रिस्तान का मुद्दा
  • राज्य में 226 मंदिरों की घेराबंदी नीतीश ने कराई

उत्तर प्रदेश में 2017 विधानसभा चुनाव के तीन चरण की वोटिंग हो चुकी थी और चौथे चरण की सीटों पर प्रचार अभियान जोरों पर था. ऐसे में पीएम मोदी ने फतेहपुर की रैली में कब्रिस्तान बनाम श्मशान का मुद्दा उठाकर चुनावी रुख को ही पूरी तरह से बदल दिया था. अब नीतीश कुमार ने बिहार के चुनावी रणभूमि में कब्रिस्तान की चारदीवारी का मुद्दा उठाकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है. हालांकि, यह मुद्दा जेडीयू के लिए कितना सियासी फायदेमंद होगा यह तो आने वाले वक्त में ही पता चल सकेगा. 

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्चुअल रैली 'निश्चय संवाद' को संबोधित करते हुए सोमवार को कहा था, हमसे पहले जिन लोगों ने बिहार में सत्ता चलाई उन्होंने क्या किया, कब्रिस्तान और मंदिरों का हाल ही देख लीजिए. न कब्रिस्तान की घेराबंदी थी और न ही मूर्ति चोरी रोकने के उपाय थे. हमलोगों ने बिहार में सांप्रदायिक सद्भाव का काम किया है. हमने कब्रिस्तान की घेराबंदी का कार्य किया है. हमने 8064 कब्रिस्तान चिन्हित किए और इनमें से 6299 की चारदीवारी का निर्माण कराने का काम किया. मंदिर से मूर्ति चोरी रोकने के लिए 226 मंदिरों की घेराबंदी करवाई.

नीतीश कुमार ने कब्रिस्तान की चारदीवारी का जिक्र कर सीधे तौर पर बिहार के मुस्लिम मतदातों को सियासी संदेश देने की कोशिश की है. साथ ही मंदिर की घेराबंदी कर हिंदू वोटों को भी साधे रखने की रणनीति अपनाई है. नीतीश कुमार यूपी की तरह विपक्ष को ध्रुवीकरण करने का मौका नहीं देना चाहते हैं. इसीलिए उन्होंने मुस्लिमों के साथ-साथ हिंदुओं को यह बताने की कोशिश की है कि उनकी सरकार किसी एक धर्म के लिए नहीं बल्कि सभी धर्मों के लिए काम कर रही है. 

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बता दें कि 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कब्रिस्तान और श्मशान का मुद्दा उठाकर यह बताने की कोशिश की थी कि तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार धर्म के आधार पर भेदभाव करती है. सपा की सरकार सिर्फ मुस्लिमों को लिए काम करती है और हिंदू समुदाय के लिए नहीं. उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि यदि आप किसी गांव में कब्रिस्‍तान बनाएंगे, लेकिन श्‍मशान क्यों नहीं? पीएम के इस बयान के बाद सूबे की सियासी फिजा पूरी तरह से बदल गई थी और कब्रिस्तान-श्मशान के मुद्दे पर चुनाव बिसात बिछाई जाने लगी. इसका बीजेपी को जबरदस्त राजनीतिक फायदा मिला था. इस तरह से बीजेपी 14 साल के सत्ता के वनवास को खत्म करने में कामयाब रही थी. 

हालांकि, बिहार में राजनीतिक रणभूमि में बीजेपी और जेडीयू एक साथ खड़ी हैं. नीतीश कुमार के चेहरे को ही बीजेपी आगे कर चुनावी मैदान में उतर रही है. ऐसे बिहार में मुस्लिम मतदाता आरजेडी का परंपरागत वोटर माना जाता है. नीतीश का दोबारा से बीजेपी के साथ जाना मुस्लिमों को रास नहीं आ रहा है. ऐसे में मुस्लिम को नीतीश ने बताने की कोशिश की है बीजेपी के साथ रहते हुए भी लालू-राबड़ी से ज्यादा उनके लिए काम कर रहे हैं. इसीलिए नीतीश ने भागलपुर दंगे से लेकर कब्रिस्तान और अल्पसंख्यकों के लिए किए गए कुछ और कार्यों का जमकर जिक्र किया. ऐसे में देखना होगा कि नीतीश का यह मुस्लिम कार्ड कितना सफल रहता है. 

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