बेगूसरायः कांग्रेस का रहा है दबदबा, क्या अबकी बार एनडीए इस पर दर्ज करा पाएगी जीत?

विधानसभा चुनाव 2015 में कांग्रेस की उम्मीदवार अमिता भूषण ने 83,521 (49.2%) मतों के साथ अपने निकटतम प्रत्याशी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सुरेंद्र मेहता को मात दी थी. सुरेंद्र मेहता 66,990 (39.5%) मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे.

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2015 में कांग्रेस की अमिता भूषण को मिली थी जीत (फोटो-ट्विटर/@AmitaBhushan1) 2015 में कांग्रेस की अमिता भूषण को मिली थी जीत (फोटो-ट्विटर/@AmitaBhushan1)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 1:55 PM IST
  • सबसे अधिक बार कांग्रेस के जीतने का रिकॉर्ड
  • भोला सिंह कई पार्टियों के टिकट पर 7 बार जीते
  • इस बार महागठबंधन और एनडीए में रहेगी टक्कर

बेगूसराय सीट बिहार विधानसभा की अहम सीटों में गिनी जाती है. इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के टक्कर है. कांग्रेस ने अमिता भूषण और बीजेपी ने कुंदन कुमार को मैदान में उतारा है. वहीं रालोसपा ने संजू कुमारी को अपना उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर तीन नवंबर को हुए मतदान के दौरान 55.28% वोटिंग दर्ज की गई. 10 नवंबर को नतीजे आएंगे.

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इस सीट पर सबसे अधिक बार कांग्रेस के प्रत्याशी जीतते रहे हैं. 2015 के विधानसभा चुनावों में भी महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस की उम्मीदवार अमिता भूषण ने जीत दर्ज की थी.

क्या रहे 2015 के नतीजे

विधानसभा चुनाव 2015 में कांग्रेस की उम्मीदवार अमिता भूषण ने 83,521 (49.2%) मतों के साथ अपने निकटतम प्रत्याशी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सुरेंद्र मेहता को मात दी थी. सुरेंद्र मेहता 66,990 (39.5%) मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे. वहीं तीसरे पायदान पर रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद सिंह को 5,593 (3.3%) मत मिले थे. 

इसी तरह 2010 के चुनावों में यहां से बीजेपी उम्मीदवार सुरेंद्र मेहता 50,602 (39.2%) मतों के साथ जीत दर्ज कराने में कामयाब रहे थे. वहीं दूसरे स्थान पर रहे लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के उम्मीदवार उपेंद्र प्रसाद सिंह को 30,984 (24.0%) मत मिले थे जबकि माकपा प्रत्याशी मोहम्मद उस्मान 19,929 (15.4%) मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे.

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चुनावी इतिहास

बेगूसराय विधानसभा सीट पर सबसे अधिक कांग्रेस ने 8 बार जीत हासिल की है. बीजेपी चार, वामदल तीन और एक बार निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज कराई है. सिंगल प्रत्याशी के रूप में देखें तो भोला सिंह यहां से सात बार विधानसभा सदस्य चुने गए. उन्होंने तीन बार कांग्रेस, दो बार बीजेपी, एक बार कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के टिकट पर चुनाव में जीत हासिल की. एक बार वह  निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे. 

1957 से 1969 तक इस सीट से कांग्रेस ने लगातार जीत हासिल की. 1957 में मेदनी पासवान, 1957 में सरयू प्रसाद सिंह, 1962 में राम नरायण चौधरी और 1969 में सरयू प्रसाद ने फिर कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की. वहीं 1972 के चुनाव में भोला सिंह सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते. इसके बाद भोला सिंह कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे और 1972, 1977, 1980 और 1985 के चुनावों में लगातार जीत दर्ज की. 

1990 में यह सीट माकपा की झोली गई और वामदल के प्रत्याशी बासुदेव सिंह विधानसभा सदस्य चुने गए. 1995 के चुनावों में भी यह सीट माकपा के खाते में ही दर्ज की गई और पार्टी उम्मीदवार राजेंद्र प्रसाद सिंह विधानसभा सदस्य बने. अक्टूबर 2005 और फरवरी 2005 में भोला सिंह बीजेपी के टिकट पर जीते. दिलचस्प बात ये है कि बिना आधार के 2009 के उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी मदन मित्रा यहां से जीते. 2009 में दोबारा हुए विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी के श्रीकृष्ण प्रसाद सिंह ने जीत हासिल की. 

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सामाजिक ताना-बाना
 
2011 की जनगणना के मुताबिक बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र की कुल आबादी 43,2,046 है जिसमें 77.11% लोग गांव में जबकि 22.89% आबादी शहरों में रहती है. इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति का अनुपात क्रमशः 15.67 और 0.03 फीसदी है. 2015 के विधानसभा चुनावों में यहां 54.51% मतदान हुआ था. 


 

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