तपन विधानसभा क्षेत्र, जो अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित है, पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में स्थित है. यह बलुरघाट लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. तपन विधानसभा क्षेत्र में तापन ब्लॉक के 5 ग्राम पंचायत और बलुरघाट ब्लॉक के 8 ग्राम पंचायत शामिल हैं.
1962 में स्थापित यह क्षेत्र अब तक 15 बार विधानसभा चुनाव करा चुका है. लंबे समय तक
यहां क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी (RSP) का दबदबा रहा. RSP ने कुल 10 बार यह सीट जीती. 1962 और 1967 में RSP ने जीत हासिल की थी, फिर कांग्रेस ने 1971 और 1972 में चुनाव जीते. इसके बाद 1977 में फिर से RSP ने सत्ता पर कब्जा किया और बंगाल में लेफ्ट फ्रंट की सरकार के दौरान लगातार चुनाव जीतता रहा.
2011 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने RSP को हराकर पहली बार यहां अपनी पकड़ बनाई. 2016 में TMC ने फिर से जीत दर्ज की, लेकिन वोटों का अंतर कम हो गया. वर्ष 2021 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तेज उभरते हुए तापन में बढ़त बनाई. बुदराई टुडू ने TMC की कल्पना किष्कु को 1,650 वोट से हराया. इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP ने तापन क्षेत्र में 19,101 वोट की बढ़त बनाकर अपनी स्थिति और मजबूत की.
2021 में तापन में कुल 2,20,236 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2016 में 1,90,782 थे. 2011 की जनगणना के अनुसार, यहां अनुसूचित जनजाति के मतदाता कुल वोटरों का लगभग 26.97% हैं. अनुसूचित जाति के मतदाता 25.96% हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय लगभग 14.50% हैं. यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां केवल 5.42% मतदाता शहरी क्षेत्र में रहते हैं. मतदान प्रतिशत भी हमेशा 80% से ऊपर रहा है.
तपन दक्षिण दिनाजपुर जिले के दक्षिणी भाग में स्थित है. यह क्षेत्र उत्तर बंगाल का हिस्सा है और बांग्लादेश से सटा हुआ है. बिहार की सीमा भी इसके पश्चिम में है. मलदा जिले से इसकी सीमा दक्षिण में और उत्तर दिनाजपुर जिले से उत्तर में लगती है.
यह क्षेत्र तराई की उपजाऊ भूमि में आता है. अतरी और पुनर्भाभा नदियां यहां से होकर बहती हैं, जो कृषि के लिए सहायक हैं. मुख्य फसलें धान, जूट और सरसों हैं.
अर्थव्यवस्था अधिकतर कृषि पर आधारित है. इसके अलावा छोटे व्यापार और सरकारी नौकरियां लोगों की आमदनी का हिस्सा हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर सामान्य स्तर का है, जिसमें सड़कें और परिवहन सुविधाएं सीमित हैं.
तपन से 14 किमी दूर गंगरामपुर प्रमुख व्यापारिक और परिवहन केंद्र है. बलुरघाट जिला मुख्यालय तापन से लगभग 25 किमी दूर है. कोलकाता से इसकी दूरी करीब 450 किमी है. बिहार की तरफ नजदीकी शहरों में भलुका (35 किमी), बहादुर्गंज (45 किमी) और किशनगंज (60 किमी) शामिल हैं. बांग्लादेश में थाकुर्गंज (25 किमी), पिरगंज (40 किमी), और रानीशंकोइल (50 किमी) नजदीकी स्थान हैं.
बीजेपी की तपन में हाल की बढ़त ने 2026 विधानसभा चुनाव को दिलचस्प बना दिया है. यह सीट किसी भी दिशा में जा सकती है. तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी और लेफ्ट फ्रंट के बीच सघन मुकाबला देखने को मिल सकता है. यह देखना रोचक होगा कि राजनीतिक पार्टियां किस तरह मतदाताओं को प्रभावित करती हैं और अपनी रणनीति बनाकर चुनाव में उतरती हैं.
(अजय झा)