जंगीपुर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की एक सामान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है और जंगीपुर लोकसभा क्षेत्र के सात खंडों में से एक है. 1957 में स्थापित इस सीट पर अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. कांग्रेस ने यहां आठ बार जीत दर्ज की है, जबकि क्रांतिकारी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) ने चार बार सफलता हासिल की. निर्दलीय उम्मीदवारों और तृणमूल कांग्रेस ने
दो-दो बार यहां विजय पाई है. खास बात यह है कि 1957 और 1962 के पहले दो चुनावों में हिंदू उम्मीदवार जीते थे, लेकिन उसके बाद से अब तक कोई गैर-मुस्लिम उम्मीदवार इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाया.
यह विधानसभा क्षेत्र जंगीपुर नगरपालिका, रघुनाथगंज-I ब्लॉक तथा सूती-I ब्लॉक के अहिरण और बांसाबाती ग्राम पंचायतों से मिलकर बना है. जंगीपुर उप-संभागीय मुख्यालय भी है और भागीरथी नदी के किनारे बसा हुआ एक प्रमुख नगर है. यहां स्थित एक किलोमीटर लंबा जंगीपुर बैराज गंगा और भागीरथी नदियों के बीच जल प्रवाह को नियंत्रित करता है. यही नहीं, यह क्षेत्र दो बड़े ताप विद्युत संयंत्रों, 2,100 मेगावॉट वाली फरक्का सुपर थर्मल पावर स्टेशन और 1,600 मेगावॉट वाली सागरदिघी थर्मल पावर स्टेशन का भी केंद्र है, जो राज्य की ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.
2024 में जंगीपुर में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या बढ़कर 2,65,229 हो गई, जो 2021 के 2,55,064 से अधिक है. मतदान प्रतिशत वर्षों से लगभग स्थिर रहा है. 2024 में 78.06%, 2021 में 77.78%, 2019 में 81.90% और 2016 में 83.82% दर्ज किया गया था. मतदाता संरचना के अनुसार, मुस्लिम मतदाता 54.30% हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाता 23.05% हैं। क्षेत्र की जनसंख्या में 55.07% ग्रामीण और 44.93% शहरी मतदाता शामिल हैं.
2011 से इस सीट पर राजनीतिक झुकाव में बड़ा बदलाव देखा गया है. 2011 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सोहराब ने 68,699 वोट प्राप्त कर CPI(M) की पूर्णिमा भट्टाचार्य को 6,336 वोटों से हराया था. 2016 में तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की, जब जाकिर हुसैन ने CPI(M) के सोमनाथ सिंहा राय को 20,633 वोट से मात दी. 2021 में भी जाकिर हुसैन ने ही जीत दोहराई और 1,06,444 वोट हासिल किए. उन्होंने BJP उम्मीदवार सुजीत दास को 92,480 वोट के विशाल अंतर से हराया. RSP के जने आलम मियां तीसरे स्थान पर रहे और 39,067 वोट प्राप्त किए.
हालांकि, लोकसभा चुनावों में तस्वीर अलग रही. 2019 में जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस को 18,644 वोटों की बढ़त मिली थी, लेकिन 2024 में BJP ने बाजी पलट दी और इस क्षेत्र में 3,266 वोटों की बढ़त हासिल की. यह बदलाव स्पष्ट संकेत देता है कि 2026 का विधानसभा चुनाव पहले जितना एकतरफा नहीं रहने वाला.
जंगीपुर की अर्थव्यवस्था बीड़ी उद्योग, छोटे पैमाने के विनिर्माण कार्यों और सीमापार व्यापार पर आधारित है. बुनियादी ढांचे की स्थिति मिश्रित है, जहां जंगीपुर नगर को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहीं रघुनाथगंज और सूती ब्लॉकों के कई गांवों में सड़क, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी समस्याएं अभी भी गंभीर हैं. बिजली की पहुंच व्यापक है, लेकिन जल आपूर्ति गर्मी के मौसम में विशेष रूप से अस्थिर रहती है.
यातायात के लिहाज से जंगीपुर रोड रेलवे स्टेशन इस क्षेत्र को अजीमगंज और फरक्का से जोड़ता है. जिला मुख्यालय बहारामपुर यहां से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है, जबकि राज्य की राजधानी कोलकाता लगभग 240 किलोमीटर दूर है. झारखंड का पाकुड़ शहर 30 किमी पश्चिम में, बिरभूम का नलहाटी 32 किमी दक्षिण-पश्चिम में और ऐतिहासिक मुर्शिदाबाद 37 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है. फरक्का 42 किमी उत्तर-पश्चिम में, जबकि रामपुरहाट 44 किमी दक्षिण में स्थित है. झारखंड का राजमहल 68 किमी उत्तर-पश्चिम में पड़ता है.
बांग्लादेश सीमा की निकटता जंगीपुर को भू-राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है. राजशाही जिले का नवाबगंज मात्र 25 किमी उत्तर-पूर्व में, शिबगंज 26 किमी दूर और चपाई नवाबगंज लगभग 29 किमी उत्तर में स्थित है. ये शहर सड़क और फेरी मार्गों के माध्यम से गंगा और भागीरथी नदियों को पार कर आसानी से पहुँचे जा सकते हैं.
BJP के बढ़ते प्रभाव और तृणमूल कांग्रेस की विधानसभा सीट पर पकड़ को देखते हुए, 2026 का चुनाव एक रोमांचक मुकाबला साबित हो सकता है. स्थानीय नेतृत्व, समुदायों की सक्रियता, और आर्थिक-सामाजिक मुद्दों पर राजनीतिक दलों की रणनीतियां परिणाम को काफी प्रभावित करेंगी. उल्लेखनीय है कि यहां वाममोर्चा-कांग्रेस गठबंधन अभी भी सक्रिय है और 2021 में 16.71% और 2024 में 26.13% वोट प्राप्त कर उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जो पश्चिम बंगाल के कई अन्य क्षेत्रों से अलग स्थिति दर्शाता है.
(अजय झा)