चोपड़ा उत्तर दिनाजपुर जिले का एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र है. यह दार्जिलिंग लोकसभा सीट के सात खंडों में से एक है. 1977 में स्थापित चोपड़ा विधानसभा में पूरा चोपड़ा सामुदायिक विकास खंड और इस्लामपुर ब्लॉक का कमलागाँव सुझाली ग्राम पंचायत शामिल है. स्थापना के बाद से यह सीट अब तक 10 बार चुनाव देख चुकी है.
क्षेत्र पर भाकपा (मार्क्सवादी) का प्रभाव रहा और 1977 से 2006 के बीच हुए पहले सात चुनावों में इस पार्टी ने छह बार जीत दर्ज की. बाद में स्वतंत्र नेता हामिदुल रहमान ने 2001 और 2011 में जीतकर इस प्रभुत्व को तोड़ा. रहमान बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और 2016 तथा 2021 में पार्टी को जीत दिलाई.
2011 के चुनाव में रहमान ने CPI(M) के अनवरुल हक को 6,570 वोटों से हराया था. उस चुनाव में तृणमूल और भाजपा तीसरे और चौथे स्थान पर रहीं, जिनके वोट शेयर क्रमशः 4.82% और 4.03% थे. 2016 में रहमान ने तृणमूल की ओर से सीट बरकरार रखी और अकुरमुल हक को 16,860 वोटों से मात दी. इस चुनाव में भाजपा 8.9% वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही. 2021 में जीत का अंतर नाटकीय रूप से बढ़कर 64,905 वोट हो गया, जब रहमान ने भाजपा के मोहम्मद शाहीद अख्तर को पछाड़ा. भाजपा का वोट शेयर बढ़कर 29.40%, जबकि CPI(M) घटकर केवल 6.02% रह गया.
लोकसभा चुनावों में भी यह रुझान लगभग समान रहा है. हालांकि 2009 से दार्जिलिंग लोकसभा सीट भाजपा के पास है, लेकिन चोपड़ा विधानसभा खंड में उसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा. 2019 में भाजपा कांग्रेस–वाम मोर्चा गठबंधन को पछाड़ते हुए दूसरे स्थान पर पहुंची, लेकिन तृणमूल ने तब भी 44,777 वोटों से बढ़त बनाए रखी. 2024 में यह अंतर और बड़ा हो गया और तृणमूल 92,131 वोटों से आगे रही.
चोपड़ा विधानसभा की राजनीति की सबसे स्थाई विशेषता उसका मुस्लिम-बहुल चरित्र है. 1977 और 1982 के पहले दो चुनावों को छोड़कर पिछले चार दशकों में यहां केवल मुस्लिम नेताओं ने ही जीत हासिल की है. मतदाताओं में मुस्लिम आबादी लगभग 62% है, जबकि अनुसूचित जाति 16.08% और अनुसूचित जनजाति 5.84% हैं. क्षेत्र लगभग पूरी तरह ग्रामीण है, शहरी मतदाता केवल 1.63% हैं.
चोपड़ा में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. साल 2019 में 2,29,640, 2021 में 2,47,764, 2024 में 2,63,658 रही थी. मतदान प्रतिशत भी हमेशा ऊंचा रहा है. 2016 में चरम 84.77%, जबकि 2024 में यह थोड़ा घटकर 79.67% रहा था.
चोपड़ा तराई क्षेत्र में हिमालय की तलहटी में स्थित है. यहां की भूमि समतल से लेकर हल्की ढलान वाली है और बेहद उपजाऊ है. महानंदा नदी पास से बहती है, जो कृषि को जीवन देती है. क्षेत्र में धान, मक्का, जूट और सब्जियां उगाई जाती हैं. हालांकि पास के इलाकों में चाय बागान हैं, लेकिन चोपड़ा में इनका वर्चस्व नहीं है.
राष्ट्रीय राजमार्ग 27 क्षेत्र से होकर गुजरता है, जो इसे सिलीगुड़ी और किशनगंज से जोड़ता है. बिजली की उपलब्धता अच्छी है, लेकिन जलापूर्ति अभी भी नलकूपों और हैंडपंपों पर निर्भर है. स्वास्थ्य सुविधाओं में दलुआ ग्रामीण अस्पताल (30 बिस्तर) और कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं.
1956 तक चोपड़ा और आसपास के क्षेत्र बिहार का हिस्सा थे. राज्यों के पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर इन्हें उत्तर और दक्षिण बंगाल के बीच भौगोलिक निरंतरता बहाल करने के लिए पश्चिम बंगाल में शामिल किया गया.
चोपड़ा एक सबडिविजन-स्तरीय कस्बा और प्रशासनिक केंद्र है. इसके पास स्थित प्रमुख शहर इस्लामपुर 22 किमी, डालखोला 30 किमी, रायगंज 65 किमी, सिलीगुड़ी 90 किमी, राज्य की राजधानी कोलकाता यहां से लगभग 500 किमी दूर है.
पास के जिलों में उत्तर में दार्जिलिंग (109 किमी) और जलपाईगुड़ी (86 किमी) हैं, जबकि दक्षिण में मालदा (165 किमी) है. बिहार राज्य का किशनगंज 35 किमी और पूर्णिया 70 किमी दूर है. बांग्लादेश का ठाकुरगांव मात्र 40 किमी और नेपाल सीमा का काकरभिट्टा लगभग 55 किमी दूर स्थित है.
लगातार दो विधानसभा चुनावों और दो लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की बढ़त को देखते हुए, 2026 में भी चोपड़ा सीट उसके पास रहने के संकेत मजबूत हैं. जबकि भाजपा अब भी मुस्लिम-बहुल इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, कांग्रेस–वाम मोर्चा गठबंधन हाशिये पर ही दिखाई देता है.
(अजय झा)