कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा? बंगाल चुनाव में जिनकी एंट्री से मचा है बवाल, अखिलेश ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले यूपी के चर्चित आईपीएस अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना का पुलिस पर्यवेक्षक बनाया गया है. तृणमूल कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस संवेदनशील इलाके में उनकी तैनाती ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. अजय पाल शर्मा ने सक्रियता दिखाते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की और जहांगीर खान को चेतावनी दी. उनकी सख्त छवि और कार्रवाई चर्चा में है. वहीं, तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं.

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भाजपा ने अपने ऑब्जर्वर के नाम पर रामपुर व संभल में टेस्ट किए हुए अपने एजेंट भेजे हैं. Photo ITG भाजपा ने अपने ऑब्जर्वर के नाम पर रामपुर व संभल में टेस्ट किए हुए अपने एजेंट भेजे हैं. Photo ITG

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:17 AM IST

उत्तर प्रदेश पुलिस में 'सिंघम' और 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के तौर पर पहचान रखने वाले आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा की पश्चिम बंगाल चुनाव में तैनाती ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है. 29 अप्रैल को दूसरे चरण में जिन क्षेत्रों में मतदान होना है, उन्हें लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत आधार माना जाता है. ऐसे इलाकों में मतदाताओं पर दबाव या प्रभाव डालने की आशंका को देखते हुए चुनाव आयोग ने सख्त प्रशासनिक रणनीति अपनाई है.  इसी के तहत यूपी के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को पुलिस पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

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अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना जिले में नियुक्त किया गया है, जो तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का प्रभावशाली क्षेत्र माना जाता है. 

ऐसे संवेदनशील इलाके में उनकी तैनाती ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है. आमतौर पर विधानसभा चुनावों में दूसरे राज्यों से अधिकारियों को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा जाता है, लेकिन इस बार जिस क्षेत्र के लिए उनका चयन हुआ है, वह खुद में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है.

क्यों चर्चा में हैं IPS अजय पाल शर्मा?
तैनाती के बाद अजय पाल शर्मा सक्रिय अंदाज में नजर आए. वे लगातार संवेदनशील इलाकों का दौरा कर रहे हैं और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं. इसी दौरान तृणमूल कांग्रेस नेता और उम्मीदवार जहांगीर खान के समर्थकों द्वारा धमकाए जाने की शिकायत मिलने पर वे सुरक्षा बलों के साथ मौके पर पहुंचे. वहां उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी. उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. उन्होंने कहा कि अगर गड़बड़ी हुई तो अच्छे से खबर लेंगे.

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जहांगीर खान को दी चेतावनी
अजय पाल शर्मा की अगुवाई में एसएसबी, एफएसटी और क्यूआरटी की संयुक्त टीम ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की. चूंकि जहांगीर खान को अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है, इसलिए इस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में नए सवाल खड़े कर दिए हैं. अजय पाल ने जहांगीर खान को चेतावनी दी.

अखिलेश ने कहा, 'हम न इन्हें भागने देंगे, न भूमिगत होने देंगे'
अखिलेश यादव ने अजय पाल शर्मा को भाजपा का एजेंट बताया है. अखिलेश ने एक वीडियो शेयर किया जिसमें अजय पाल अपनी टीम के साथ जहांगीर खान के घर के बाहर खड़े हैं. प. बंगाल में भाजपा ने अपने ऑब्जर्वर के नाम पर रामपुर व संभल में टेस्ट किए हुए अपने एजेंट भेजे हैं, लेकिन इनसे कुछ होने वाला नहीं. दीदी हैं, दीदी रहेंगी. सही समय आने पर भाजपा और उनके संगी-साथियों के इन जैसे 'एजेंडों के एजेंटों' की सारी आपराधिक करतूतों की गहरी जांच होगी और कार्रवाई होगी. अखिलेश ने कहा, हम न इन्हें भागने देंगे, न भूमिगत होने देंगे. ये खोज के लाए जाएंगे, खोद के लाए जाएंगे और कानूनी सजा भी पाएंगे. लोकतंत्र के अपराधी बख्शे नहीं जाएंगे.

29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान हो चुका है. कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही. अब 29 अप्रैल को दूसरे चरण के तहत कोलकाता सहित 142 सीटों पर मतदान होना है. इन सीटों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है, जिनमें अजय पाल शर्मा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है.

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कौन हैं अजय पाल शर्मा?
अजय पाल शर्मा के करियर की बात करें तो वे उत्तर प्रदेश पुलिस के उन अधिकारियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी सख्त कार्यशैली से अलग पहचान बनाई. वे 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. शामली, नोएडा, जौनपुर और रामपुर जैसे जिलों में उनकी पोस्टिंग के दौरान अपराधियों के खिलाफ बड़े अभियानों और एनकाउंटरों की खूब चर्चा रही.

हालांकि, दक्षिण 24 परगना में उनकी नियुक्ति पर सवाल भी उठने लगे हैं. तृणमूल कांग्रेस इस फैसले को लेकर चुनाव आयोग की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगा रही है. पार्टी नेताओं का कहना है कि क्या आयोग को इतना बड़ा खतरा महसूस हो रहा है कि वहां ऐसे अधिकारी की जरूरत पड़ गई, जिनकी पहचान एनकाउंटर विशेषज्ञ के रूप में है? दूसरी ओर, अखिलेश यादव भी अजय पाल शर्मा पर सवाल उठा चुके हैं. अब सबकी नजर इस बात पर है कि दूसरे चरण का मतदान किस माहौल में संपन्न होता है और क्या यह सख्त रणनीति चुनावी निष्पक्षता को नया आयाम दे पाएगी.

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