यूपी के रण में 'दस साल बनाम पांच' को मुद्दा बनाएगी सपा, प्लान तैयार

उत्तर प्रदेश की राजनीति अगले कुछ महीनों में नए मोड़ पर पहुंचने वाली है. करीब 10 महीने बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में विपक्ष में बैठी समाजवादी पार्टी बीजेपी को उसी के मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर रही है. सपा इस बार पीडीए वर्ग पर खास फोकस कर रही है.

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BJP और समाजवादी पार्टी का 'मिशन 2027' शुरू हो गया है. (Photo- PTI) BJP और समाजवादी पार्टी का 'मिशन 2027' शुरू हो गया है. (Photo- PTI)

समर्थ श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:41 AM IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 10 महीने का समय बचा है, ऐसे में सत्तापक्ष और विपक्ष पूरी तरह चुनावी तैयारियों में जुट गई हैं. समाजवादी पार्टी इस बार विधानसभा चुनाव में 'भाजपा के 10 साल बनाम सपा के 5 साल' को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है. पार्टी राम मंदिर के सहारे सत्ता तक पहुंची भाजपा को अब राम मंदिर चंदा चोरी के मुद्दे पर घेरने की रणनीति बना रही है.

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सपा एनकाउंटर के नाम पर हुई कथित हत्याओं और बेगुनाहों के घर गिराए जाने के मामलों को भी घर-घर तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं. सपा नेतृत्व भाजपा को उसी के मुद्दों पर घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है.

भाजपा ने यूपी में सत्ता में आने से पहले अयोध्या राम मंदिर आंदोलन को बड़ा मुद्दा बनाया था. अब सपा राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपों को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है. पार्टी का मानना है कि राम मंदिर आंदोलन में अवध और पूर्वांचल के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था और घर-घर मंदिर निर्माण के लिए चंदा जुटाया गया था, ऐसे में सपा इन इलाकों में चंदा चोरी के आरोपों को लोगों तक पहुंचाएगी.

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'पीडीए वर्ग पर अत्याचार' पुस्तक के जरिए प्रचार

यूपी में दलित और पिछड़े मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है. सपा का मानना है कि इन वर्गों का समर्थन चुनावी नतीजों में निर्णायक रहता है. भाजपा सरकार के 10 साल के कार्यकाल को लेकर सपा 'पीडीए वर्ग पर अत्याचार' नाम की पुस्तक जारी कर चुकी है. पार्टी का दावा है कि एनकाउंटर में मारे गए लोगों में सबसे अधिक पीडीए वर्ग के लोग थे. सपा प्रदेशभर में इस पुस्तक की प्रतियां बांटेगी और दलितों तथा पिछड़े वर्ग के लोगों को बताएगी कि उनके समुदाय के लोगों के साथ किस तरह अन्याय हुआ.

सपा अपने पांच साल के काम भी गिनाएगी

सपा अपनी 2012 से 2017 की सरकार के कामकाज का भी प्रचार करेगी.पार्टी बताएगी कि उस दौरान युवाओं को लैपटॉप बांटे गए, बेरोजगारी भत्ता दिया गया, सरकारी नौकरियां दी गईं और शिक्षामित्रों को विशेष बीटीसी कराकर शिक्षक बनाया गया. इसके साथ ही भाजपा सरकार के 10 साल के कार्यकाल के मुद्दों को भी उठाया जाएगा. सपा सरकारी नौकरियों में पेपर लीक के मामलों को भी चुनावी मुद्दा बनाएगी.

बीजेपी ने सपा को घेरा
इस मसले पर सियासत भी शुरू हो गई है. बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि एक दशक में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों ने जाति और मजहब के मकड़जाल में उत्तर प्रदेश को ऐसा उलझा रखा था कि उत्तर प्रदेश दशकों पीछे हो गया था. लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार ने दशकों के पिछड़े हुए कामों को संवारने का काम किया है.

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उत्तर प्रदेश को माफियाओं से मुक्त किया है, जातिवाद और मजहब के मकड़जाल से मुक्त किया है. उत्तर प्रदेश में निवेश को आमंत्रित किया है. प्रदेश में रोजगार बढ़ने के साथ विकास हुआ है. वीआईपी जिलों का कल्चर खत्म हुआ है. जनता आज अपने आप को खुशहाल महसूस कर रही है और इसलिए योगी आदित्यनाथ तीसरी बार उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने जा रहे हैं.

बीजेपी ने किया पलटवार

समाजवादी पार्टी की चुनावी रणनीति पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि एक दशक तक समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों ने उत्तर प्रदेश को जाति और मजहब के मकड़जाल में उलझाए रखा, जिससे राज्य विकास के मामले में दशकों पीछे चला गया. राकेश त्रिपाठी ने कहा कि 'योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले एक दशक में वर्षों से लंबित विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का काम किया है. उत्तर प्रदेश को माफियाओं से मुक्त किया गया है और जातिवाद व मजहब के मकड़जाल से बाहर निकाला गया है.राज्य में निवेश को बढ़ावा मिला है, रोजगार के अवसर बढ़े हैं और चारों दिशाओं में विकास हुआ है.' उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में वीआईपी जिलों की संस्कृति खत्म हुई है. आज प्रदेश की जनता खुद को खुशहाल महसूस कर रही है. यही वजह है कि योगी आदित्यनाथ तीसरी बार उत्तर प्रदेश में सरकार बनाएंगे.'

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