बंगाल में TMC का नॉर्थ-साउथ प्लान, BJP के दुर्ग में ममता लगाएंगी सेंध तो गढ़ बचाएंगे अभिषेक

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए टीएमसी ने अलग प्लान बनाया है. ममता बनर्जी ने नॉर्थ बंगाल से चुनावी हुंकार भरी तो अभिषेक बनर्जी ने साउथ बंगाल से मिशन-2026 का आगाज किया. इस तरह ममता की कोशिश बीजेपी के गढ़ में सेंधमारी की है तो अभिषेक टीएमसी के दुर्ग को दुरुस्त रखेंगे.

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ममता बनर्जी का नार्थ बंगाल तो अभिषेक बनर्जी का साउथ बंगाल पर फोकस (Photo-PTI) ममता बनर्जी का नार्थ बंगाल तो अभिषेक बनर्जी का साउथ बंगाल पर फोकस (Photo-PTI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:33 PM IST

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव बीजेपी और टीएमसी के बीच सीधा मुकाबला है. बीजेपी बंगाल की सत्ता में आने के लिए बेताब है तो टीएमसी अपना सियासी दुर्ग को बचाए रखने की कवायद में है. इसी के तहत टीएमसी ने बंगाल की सियासी बाजी जीतने के लिए नार्थ और साउथ प्लान के साथ उतरी है. 

टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नार्थ बंगाल से तो उनके भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी साउथ बंगाल के सियासी रणक्षेत्र को संभाल रखा है. इस तरह बंगाल में बीजेपी के गढ़ बन रहे नार्थ बंगाल में ममता ने सेंधमारी का प्लान बनाया तो अभिषेक बनर्जी टीएमसी के गढ़ को बचाए रखना मोर्चा संभाल रखा है. 

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बंगाल में टीएमसी के दो प्रमुख चेहरे हैं, जिसमें एक ममता बनर्जी और दूसरे अभिषेक बनर्जी. इस तरह टीएमसी ने अपने दोनों ही नेताओं को अलग-अलग इलाके में लगाकर बीजेपी के खिलाफ चक्रव्यूह रचा है. ममता ने मंगलवार कोअलीपुरद्वार परेड ग्राउंड में चुनावी जनसभा को संबोधित कर उत्तर बंगाल में चुनावी बिगुल फूंक दिया. 

बीजेपी के गढ़ नॉर्थ बंगाल में ममता की हुंकार
पश्चिम बंगाल में बीजेपी भले ही अभी तक सत्ता में न आ सकी हो, लेकिन उत्तर बंगाल के इलाके को अपने सियासी दुर्ग के रूप में बनाने में जरूर सफल रही है. ममता ने मंगलवार को दार्जिलिंग जिले के माटीगारा और जलपाईगुड़ी के मैनागुड़ी में जनसभा की और बीजेपी के खिलाफ जमकर हमले किए. 

ममता बनर्जी का यह कदम बंगाल के उत्तरी क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ बनाने का दांव माना जा रहा, जहां पर बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनावों से गहरी पैठ बनाई थी. 2021  विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने अपनी पकड़ बनाए रखा था. 2024 में टीएमसी ने बेहतर प्रदर्शन के बाद भी नार्थ बंगाल में अपनी जड़े नहीं जमा सकी. यही वजह है कि ममता बनर्जी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नार्थ बंगाल का मोर्चा खुद संभाल रखा है. 

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नॉर्थ बंगाल में क्या ममता लगा पाएंगी सेंध
नार्थ बंगाल के क्षेत्र में बीजेपी ने अपनी पकड़ काफी मजबूत बनाई है. नार्थ बंगाल में बीजेपी राजबंशी, आदिवासी और प्रवासी समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कवायद में है तो टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की कोशिश सेंधमारी का है. 

ममता बनर्जी ने अलीपुरद्वार से जनसभा कर यह संदेश दे दिया है कि टीएमसी ने उत्तर बंगाल में बीजेपी की चुनौती को गंभीरता से ले रही है. रविवार में भवानीपुर में एक कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करने के बाद उत्तर बंगाल के क्षेत्र पहुंची, जहां वह आगामी चुनावों के लिए पार्टी की बूथ स्तरीय रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत किया. इस तरह नार्थ बंगाल में अपने समीकरण को दुरुस्त करने में जुट गई हैं. 

दक्षिण बंगाल की कमान अभिषेक बनर्जी के हाथ
नार्थ बंगाल की कमान ममता बनर्जी ने संभाल रखी है तो साउथ बंगाल के मोर्चे पर पार्टी के युवा चेहरे व टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी को लगा रखा है. अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को दक्षिण 24 परगना के पाथरप्रतिमा से अपने अभियान की शुरुआत किया. अभिषेक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मेदिनीपुर क्षेत्र से रुख किया और 25 मार्च को दासपुर, केशियरी और नारायणगढ़ में रैलियों को संबोधित करने के बाद नंदीग्राम में एक कार्यकर्ता बैठक करेंगे. 

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अभिषेक के लिए नंदीग्राम दौरा क्यों अहम है
अभिषेक बनर्जी का दक्षिण बंगाल का नंदीग्राम दौरा प्रतीकात्मक और राजनीतिक रूप से अहम है. यह निर्वाचन क्षेत्र 2021 के विधानसभा चुनाव का सेंटर प्वाइंट बन गया था और ममता बनर्जी को बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी ने हराया था. ऐसे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अभिषेक बनर्जी का मेदिनीपुर पर फोकस करना. इसके अलावा पार्टी की ओर से जंगलमहल और तटीय क्षेत्रों में बीजेपी की संगठनात्मक शक्ति को कमजोर करने की स्टैटेजी मानी जा रही है. 

अभिषेक बनर्जी बहुत ज्यादा रैली करने से ज्यादा रणनीति पर फोकस करते हैं. अभिषके चुनाव प्रचार शैली अधिक संगठनात्मक और कार्यकर्ता-केंद्रित होती है. वह बूथ नेटवर्क को मजबूत करने और जमीनी स्तर की पार्टी मशीनरी को सक्रिय करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं. साउथ बंगाल के दुर्ग को दुरुस्त करने के बाद अभिषेक उत्तरी बंगाल के मोर्चे पर लगेंगे, जहां  26, 28 और 31 मार्च को कार्यक्रम कर सियासी धार देंगे?

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