दासपुर, पश्चिम मेदिनीपुर जिले का एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र है, जो घाटाल लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है. यह क्षेत्र दासपुर-II सामुदायिक विकास खंड और दासपुर-I ब्लॉक की छह ग्राम पंचायतों - बसुदेवपुर, दासपुर-I, दासपुर-II, नंदनपुर-I, नंदनपुर-II और पांचबेरिया को मिलाकर बना है. 1951 में पहली विधानसभा चुनाव से ही यह सीट बंगाल की राजनीतिक
तस्वीर का हिस्सा रही है.
अब तक हुए 18 चुनावों (2012 के उपचुनाव सहित) में दासपुर ने कई बार राजनीतिक निष्ठाओं में बदलाव देखा है. कभी यह वामपंथियों का गढ़ माना जाता था. अविभाजित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने यहां तीन बार जीत दर्ज की, जबकि सीपीआई(एम) ने आठ बार जीत हासिल की, जिसमें 1972 से 1996 तक लगातार सात जीत शामिल हैं. कांग्रेस ने दो बार - 1957 और 1967 में इस सिलसिले को तोड़ा. 2001 के बाद से तृणमूल कांग्रेस यहां प्रमुख ताकत बनकर उभरी और पांच बार जीत हासिल की, जिसमें 2011 से लगातार चार बार की जीत शामिल है.
अजीत भुनिया ने 2001 में पहली बार तृणमूल कांग्रेस की ओर से जीत दर्ज की थी, लेकिन 2006 में उन्हें सीपीआई(एम) के सुनील अधिकारी से 3,177 वोटों से हार का सामना करना पड़ा. 2011 में उन्होंने अधिकारी को 24,927 वोटों से हराकर वापसी की. 2012 में उनके असामयिक निधन के बाद उनकी पत्नी ममता भुनिया ने उपचुनाव में 18,928 वोटों से सीट बरकरार रखी. इसके बाद उन्होंने 2016 और 2021 में भी जीत दर्ज की, क्रमशः 28,739 और 26,842 वोटों के अंतर से. 2021 में भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और सीपीआई(एम) को महज 7.66% वोट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर धकेल दिया. लोकसभा चुनावों में भी यही रुझान देखने को मिला, जब भाजपा ने 2019 में तृणमूल से 9,940 और 2024 में 16,511 वोटों से हार झेली.
2021 विधानसभा चुनावों में दासपुर में 2,98,096 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2019 के 2,89,024 और 2016 के 2,74,343 से अधिक थे. इनमें अनुसूचित जाति मतदाता 15.18% और मुस्लिम मतदाता 7.60% थे. पूरा क्षेत्र ग्रामीण है, यहां कोई शहरी मतदाता नहीं है. मतदान प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अधिक रहा है- 2021 में 74.81%, 2019 में 73.36% और 2016 में 78.42%.
भौगोलिक रूप से दासपुर दक्षिण-पश्चिमी बंगाल के उपजाऊ जलोढ़ मैदान में स्थित है. रुपनारायण नदी पास से बहती है और सिंचाई नहरों का जाल क्षेत्र को धान, सब्जियों और तिलहन की खेती के लिए आदर्श बनाता है. अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि आधारित है, जबकि छोटे व्यापार और कुटीर उद्योग ग्रामीण आय में सहयोग करते हैं. यहां कभी हथकरघा बुनाई और मिट्टी के बर्तनों की परंपरा मजबूत थी, लेकिन समय के साथ इन शिल्पों में गिरावट आई है.
ढांचा सीमित लेकिन उपयोगी है. दासपुर सड़क मार्ग से घाटाल (8 किमी), चंद्रकोणा (15 किमी) और खड़गपुर (45 किमी) से जुड़ा है. जिला मुख्यालय मिदनापुर लगभग 40 किमी दूर है, जबकि राज्य की राजधानी कोलकाता करीब 120 किमी पूर्व में स्थित है. यह क्षेत्र बांकुड़ा और पूर्व मेदिनीपुर जिलों से भी सटा हुआ है.
इतिहास की दृष्टि से देखें तो दासपुर की जड़ें औपनिवेशिक काल तक जाती हैं. यह कभी हुगली जिले का हिस्सा था, जिसे 1872 में मिदनापुर में मिला दिया गया. अंग्रेजों ने यहां 17वीं सदी की शुरुआत में बैरक भी बनाया था और यह इलाका प्रशासनिक और सैन्य गतिविधियों का हिस्सा रहा.
जैसे-जैसे 2026 का विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, तृणमूल कांग्रेस एक बढ़त के साथ मैदान में है, लेकिन भाजपा की लगातार बढ़त इसे चुनौतीपूर्ण बना सकती है. सीपीआई(एम) और कांग्रेस अब भी हाशिये पर हैं। ऐसे में मुकाबला दो ध्रुवीय होने की संभावना है और हर वोट परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
(अजय झा)