पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में हमेशा से खास महत्व रखती रही है. यह सीट तामलुक लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और इसमें नंदीग्राम-1 व नंदीग्राम-2 विकासखंड शामिल हैं. 1951 से 1967 तक नंदीग्राम उत्तर और दक्षिण के नाम से दो अलग सीटें थीं, जिनके विलय के बाद 1967 में वर्तमान नंदीग्राम सीट का गठन
हुआ.
नंदीग्राम का नाम सुनते ही 2007 का आंदोलन याद आता है. वाममोर्चा सरकार द्वारा प्रस्तावित रासायनिक हब के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हुए आंदोलन में 14 ग्रामीणों की मौत हो गई थी. यह आंदोलन ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. यहीं से ममता की लोकप्रियता बढ़ी और 2011 में वाममोर्चा की 34 साल पुरानी सरकार को सत्ता से बेदखल होना पड़ा.
2021 में नंदीग्राम एक बार फिर सुर्खियों में आया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी परंपरागत भवानीपुर सीट छोड़कर यहीं से चुनाव लड़ने का फैसला किया. उनका सीधा मुकाबला उनके पूर्व सहयोगी और तब तक भाजपा में शामिल हो चुके सुवेंदु अधिकारी से हुआ. कड़े और नाटकीय मुकाबले में ममता बनर्जी को महज 1,956 वोटों से हार का सामना करना पड़ा.
2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने नंदीग्राम से तृणमूल कांग्रेस पर 8,200 वोटों की बढ़त दर्ज की, जिससे यह क्षेत्र भाजपा के लिए और भी अहम हो गया.
अब तक नंदीग्राम में 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2009 का उपचुनाव भी शामिल है. शुरुआती दशकों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) का दबदबा रहा, जिसने 9 बार जीत दर्ज की. कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने दो-दो बार जीत हासिल की, जबकि जनता पार्टी को एक बार सफलता मिली. भाजपा ने 2021 में पहली बार यहां से जीत दर्ज की.
2016 कुल मतदाताओं की संख्या 2,31,866 थी वहीं 2019 में 2,46,434 मतदाता और 2021 में कुल मतदाताओं की संख्या 2,57,992 रही थी. यहां मुस्लिम मतदाता लगभग 23.60% हैं, अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 16.46% , ग्रामीण क्षेत्र के मतदाता 96.65% और शहरी मतदाता 3.35% थे. 2021 में मतदान प्रतिशत 88.51% रहा था.
नंदीग्राम हल्दी नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है और इसके सामने औद्योगिक शहर हल्दिया है. क्षेत्र की जमीन उपजाऊ है, जहां धान, सब्ज़ियां और मछली प्रमुख रूप से पैदा होती हैं. यह इलाका हल्दिया जैसे शहरी केंद्रों को ताज़ी सब्जियां और कृषि उत्पाद सप्लाई करता है. हालांकि औद्योगिक विकास सीमित है, लेकिन कृषि और छोटे व्यापार स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.
नंदीग्राम से सड़क मार्ग द्वारा हल्दिया और तामलुक तक सीधी कनेक्टिविटी है. सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन महिषादल (लगभग 19 किमी दूर) है. शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूल और कुछ कॉलेज मौजूद हैं, लेकिन उच्च शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लोगों को हल्दिया या तामलुक जाना पड़ता है.
यह कोलकाता से लगभग 70 किमी, तामलुक से 33 किमी, हल्दिया से 13 किमी, महिषादल से 19 किमी और एगरा से 48 किमी दूर है. इसके अलावा यह सीट दक्षिण 24 परगना जिले से नदी पार की निकटता भी रखती है.
जैसे-जैसे 2026 विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, भाजपा को यहां आत्मविश्वास मिल रहा है. हालांकि 2021 और 2024 दोनों ही चुनावों में अंतर बेहद कम रहा है, जिससे साफ है कि मुकाबला कड़ा रहेगा.
तृणमूल कांग्रेस भी पूरी ताक़त झोंकेगी. अगर ममता बनर्जी ने दोबारा नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया तो मुकाबला और भी रोचक होगा. वहीं, अगर उन्होंने यहां से चुनाव नहीं लड़ा, तो सुवेंदु अधिकारी के लिए राह आसान हो सकती है.
वाम मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन यहां उम्मीदवार तो उतारेगा, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में उनकी स्थिति हाशिए पर ही दिख रही है.
(अजय झा)