करियर एवं केयर सिटी कोटा एक बार फिर सामाजिक बदलाव की मिसाल बना है. यह कहानी ओडिशा के गंजम जिले के छोटे से गांव बाकलीकोड़ा की है, जहां एक मां ने अपने बेटे के सपनों को साकार करने के लिए जीवनभर संघर्ष किया. पति को कैंसर से खोने के बाद आर्थिक संकटों से जूझते हुए भी उसने हार नहीं मानी और सिलाई मशीन के सहारे बेटे को पढ़ाकर सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.
कोटा कोचिंग के छात्र जिगर नायक ने जेईई-एडवांस्ड 2026 में ऑल इंडिया रैंक 5474 और ओबीसी-एनसीएल कैटेगरी में 1201वीं रैंक हासिल की है. वहीं जेईई-मेन में उसकी ऑल इंडिया रैंक 17783 तथा ओबीसी-एनसीएल कैटेगरी रैंक 4597 रही. जिगर ने इससे पहले 10वीं कक्षा में 95 प्रतिशत और 12वीं कक्षा में 87 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे. इस उपलब्धि के साथ वह अपने गांव और परिवार का पहला आईआईटियन बनने जा रहा है.
जिगर नायक की कहानी संघर्ष, त्याग और सपनों की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित करती है. आर्थिक तंगी, पिता का असमय निधन और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच जिगर ने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. मां अपूर्वा नायक के अथक प्रयासों और अपने समर्पण के बल पर उसने वह मुकाम हासिल किया है, जो आज पूरे गांव के लिए गर्व का विषय बन गया है.
कैंसर ने छीन लिया पिता का साया
जिगर के पिता जूरीनाथ नायक गुजरात की एक टेक्सटाइल इंडस्ट्री में कार्यरत थे. परिवार का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन अचानक उन्हें कैंसर होने का पता चला. इलाज में परिवार की वर्षों की जमा पूंजी खर्च हो गई. वर्ष 2020 में बीमारी से जूझते हुए उनका निधन हो गया. पिता के जाने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट और गहरा गया, लेकिन मां अपूर्वा ने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया.
परिवार संभाला, सिलाई कर जुटाए पढ़ाई के पैसे
पति के निधन के बाद अपूर्वा नायक ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली. उन्होंने गोल्ड लोन लिया और घर-घर से सिलाई का काम लेकर टेलरिंग शुरू की. दिनभर सिलाई मशीन पर मेहनत कर घर का खर्च चलाने के साथ-साथ बेटे की पढ़ाई के लिए पैसे भी जुटाती रहीं. कई बार हालात इतने कठिन हुए कि घर चलाना मुश्किल हो गया, लेकिन उन्होंने कभी अपने संघर्ष की आंच बेटे तक नहीं पहुंचने दी.
सोशल मीडिया से मिला IIT का सपना
जिगर ने बताया कि 10वीं कक्षा तक उसे जेईई परीक्षा और आईआईटी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. सोशल मीडिया पर इंजीनियरिंग और जेईई से जुड़े वीडियो देखने के दौरान उसे पहली बार इस परीक्षा के बारे में पता चला. यहीं से उसके मन में आईआईटियन बनने का सपना जागा. उसने तय किया कि वह पढ़ाई के दम पर अपनी मां की जिंदगी बदलेगा और परिवार को बेहतर भविष्य देगा.
इसके बाद जिगर कोटा आया और एलन करियर इंस्टीट्यूट में दो वर्षों तक नियमित कक्षा कार्यक्रम के तहत जेईई की तैयारी की. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसे 11वीं और 12वीं कक्षा में फीस में भी रियायत मिली, जिससे उसके सपनों को नई उड़ान मिली.
सिर्फ अपने लिए नहीं, पूरे परिवार के भविष्य के लिए पढ़ाई
जिगर का एक छोटा भाई भी है, जो वर्तमान में सातवीं कक्षा में पढ़ रहा है. जिगर का कहना है कि उसकी मेहनत केवल अपनी सफलता के लिए नहीं है, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य के लिए है. वह चाहता है कि आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उसकी मां को संघर्ष न करना पड़े और छोटे भाई की शिक्षा भी बिना किसी आर्थिक परेशानी के पूरी हो सके.
यह सफलता सिर्फ मेरी नहीं, मां के त्याग की जीत है
जिगर का कहना है कि उसकी इस उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ा योगदान उसकी मां का है. यदि मां ने कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत न दिखाई होती तो शायद वह आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाता. उनकी मेहनत, त्याग और विश्वास ही उसकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं.
एलन के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने कहा कि ऐसी कहानियां समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं. इनमें विद्यार्थी के साथ-साथ अभिभावकों का संघर्ष भी शामिल होता है. जब ऐसे उदाहरण समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचते हैं तो सकारात्मक सामाजिक बदलाव की राह बनती है. हमारा प्रयास है कि आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियां किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बनें और उसे अपनी योग्यता के अनुरूप अवसर प्राप्त हो.
चेतन गुर्जर