26 साल में छोड़ दी 1.7 करोड़ की नौकरी, ये थी वजह, पर मिल गया सबक 

सोशल मीडिया पर आजकल बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी छोड़ने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. लेकिन क्या करोड़ों की नौकरी छोड़ देने से सफलता मिल रही है? आप वह कर पा रहे हैं जो आप करना चाहते हैं? तो इसका जवाब है नहीं. हर किसी के लिए ये फैसला सही साबित हो, ऐसा नहीं हो सकता है. माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व कर्मचारी क्रिस की कहानी इस बात का सबूत देती है. 26 साल की उम्र में करीब 2 लाख डॉलर यानी 1.7 करोड़ रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ना  और अपना स्टार्टअप बनाना आसान नहीं होता है. करीब 5 साल बाद उन्हें इसका एहसास हुआ. उन्होंने कहा कि असली चुनौती नौकरी छोड़ने में नहीं उसके बाद खुद पर भरोसा बनाए रखने में है.

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स्टार्टअप के लिए छोड़ दी 1.7 करोड़ की नौकरी. स्टार्टअप के लिए छोड़ दी 1.7 करोड़ की नौकरी.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:14 PM IST

माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी में कौन काम नहीं करना चाहता है? कई लोगों के लिए यहां पर काम करना सपने जैसा होता है. ऐसा ही एक अनुभव 26 साल के क्रिस ने शेयर किया. उन्होंने पोस्ट कर बताया कि मैंने दो लाख डॉलर यानी करीब 1.7 लाख करोड़ की सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी. इस सपने में की वह नौकरी छोड़ने के बाद अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करेंगे लेकिन उम्मीद से बिल्कुल अलग जिंदगी हो गई. अब इसे लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी बताई है. 

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26 साल में छोड़ी नौकरी 

क्रिस ने बताया कि 26 साल की उम्र में माइक्रोसॉफ्ट की अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़ दी. उन्होंने पोस्ट में बताया कि उस समय उन्हें पूरा भरोसा था कि वह जल्द ही अपना स्टार्टअप शुरू करेंगे और सफल फाउंडर बन जाएंगे. लेकिन उन्हें जैसी उम्मीद थी वैसा नहीं हुआ. उन्होंने महसूस किया कि नौकरी छोड़ना उनकी सबसे बड़ी गलती थी. क्योंकि असली चुनौती तो नौकरी छोड़ने के बाद शुरू हुई. उनके पास न ही पहचान थी और न ही कंपनी का नाम जो उन्हें काम करने से मिलती थी. उनके अनुसार नौकरी छोड़ने के बाद आजादी जरूर मिली, लेकिन उसके साथ अनिश्चितता, डर और लगातार खुद पर सवाल उठाने की स्थिति भी पैदा हो गई.

न थी नौकरी और न ही था बिजनेस 

अपने पोस्ट में उन्होंने ये भी बताया कि बिजनेस करने से पहले उनकी जीवन में एक और बड़ा बदलाव आया. वह ऑस्ट्रेलिया चले गए लेकिन वहां उनके पास न कोई नौकरी थी और न ही कोई तैयार बिजनेस प्लान. अगर था तो केवल 5 महीने का समय. अगर इस दौरान उनसे कुछ नहीं होता तो वह अपने देश लौट जाते. क्रिस ने बताया कि शुरुआत में तो उन्होंने प्लानिंग करने के लिए ज्यादा समय बिताया. जैसे -जैसे देश वापस लौटने का समय पास आता गया उन्होंने तेजी से काम करना शुरू कर दिया जिसका फल भी उन्हें मिला. एक हफ्ते पहले उन्होंने पहली कमाई की. 

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प्रेशर में होता है अच्छा काम 

उनके इस अनुभव ने उन्हें अपनी कमजोरी का भी एहसास कराया. क्रिस ने महसूस किया कि वे अक्सर तब तक कोई कदम नहीं उठाते हैं, जब तक उनके पास कोई विकल्प नहीं होता है. दबाव में ही वह सही तरह से और अच्छे से काम करते हैं. 

सफलता का मतलब समझाया 

क्रिस ने अपनी जिंदगी का एक और अनुभव साझा किया है जिसने उन्हें सफलता का नया मतलब सिखाया है. उन्होंने पोस्ट में बताया कि पहले हाफ आयरनमैन ट्रायथलॉन में हिस्सा लिया. प्रतियोगिता से पहले ही वह चोटिल थे. उन्होंने तैराकी पूरी की. साइक्लिंग भी पूरी कर ली लेकिन रनिंग शुरू करने के बजाय उन्होंने रुकने का फैसला किया. उनका कहना है कि सालों तक उन्हें यही सिखाया गया था कि किसी भी हाल में रेस पूरी करनी चाहिए लेकिन अगर वे उस समय दौड़ पूरी करते तो पूरे सीजन से बाहर हो सकते थे. उन्होंने मेडल जीतने के बजाय अपने भविष्य और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी. उनके इस अनुभव ने उन्हें सिखाया कि कई बार सही समय पर रुक जाना सफलता का हिस्सा होता है.

सोचा था स्टार्टअप बनाएंगे लेकिन

जब क्रिस ने माइक्रोसॉफ्ट छोड़ी तब उन्होंने भविष्य को लेकर अलग तस्वीर बनाई थी. उन्हें लगता था कि वह जल्दी ही अपनी कंपनी शुरू करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. लेकिन आज वह अपनी स्किल के आधार पर अलग-अलग ब्रांड्स के लिए विडियो बनाते हैं और इसी के जरिए धीरे-धीरे अपना बिजनेस तैयार कर रहे हैं. उन्होंने इस बात को माना कि उस युवा सपने को पूरा नहीं किया जिसके लिए उन्होंने नौकरी छोड़ी थी. 

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