लखनऊ की एक कहानी ने साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो गरीबी कभी आड़े नहीं आती.लखनऊ के गोमती नगर स्थित डिगडिया गांव की नीलू ने मुश्किल हालातों से लड़कर नीट परीक्षा पास कर ली है.
नीलू के परिवार में उनकी मां राजकुमारी और तीन बहनें हैं. सबसे बड़ी बहन नीतू की शादी हो चुकी है, जबकि सबसे छोटी बहन कुमकुम अभी पढ़ाई कर रही हैं. नीलू जब आठवीं कक्षा में थीं, तभी गंभीर बीमारी के कारण उनके पिता का निधन हो गया. परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनका सही इलाज तक नहीं हो सका.
पिता की मौत ने बदल दी जिंदगी
नीलू बताती हैं, मेरे पिताजी का निधन सिर्फ इसलिए हुआ, क्योंकि हम उनका सही इलाज नहीं करा सके. उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि मैं डॉक्टर बनूंगी, ताकि किसी और को गरीबी की वजह से अपने अपनों को न खोना पड़े.
मां ने झाड़ू-पोछा कर बेटी का सपना पूरा किया
पिता के निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी मां राजकुमारी के कंधों पर आ गई. वह एक अस्पताल में सहायक के रूप में काम करती हैं और साथ ही घरों में झाड़ू-पोछा कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं. इतनी मेहनत के बावजूद उनकी मासिक आय केवल 10 से 11 हजार रुपये थी. सीमित आय में भी उन्होंने हार नहीं मानी और पाई-पाई जोड़कर अपनी बेटी के सपनों को उड़ान दी.
स्कॉलरशिप से मिली नई उड़ान
नीलू की शुरुआती पढ़ाई प्रेरणा गर्ल्स स्कूल से हुई. वह बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहीं. उनकी प्रतिभा को देखते हुए कक्षा 11 में उन्हें स्टडी हॉल स्कूल में स्कॉलरशिप मिली.
उन्होंने दसवीं बोर्ड परीक्षा में 86 प्रतिशत अंक हासिल किए, जबकि इस वर्ष सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. इसके अलावा उनका चयन देश की प्रतिष्ठित वहानी स्कॉलरशिप के लिए हुआ है, जो देशभर के केवल 50 प्रतिभाशाली छात्रों को दी जाती है. इस स्कॉलरशिप के माध्यम से उनकी मेडिकल शिक्षा की ट्यूशन फीस और अन्य शैक्षणिक खर्च पूरे किए जाएंगे.
नीट क्वालिफाई करने वाली नीलू कहती हैं, प्रेरणा गर्ल्स स्कूल ने मुझे सिखाया कि आपका बैकग्राउंड चाहे जैसा भी हो, शिक्षा से किस्मत बदली जा सकती है. मैं चाहती हूं कि मेरी कहानी देखकर दूसरी लड़कियां भी बड़े सपने देखने की हिम्मत करें.
अब कार्डियोलॉजिस्ट बनने का सपना
नीलू का सपना अब एक सफल कार्डियोलॉजिस्ट बनने का है. उनका कहना है कि वह गरीब और जरूरतमंद लोगों का समय पर बेहतर इलाज करना चाहती हैं, ताकि आर्थिक मजबूरी के कारण किसी परिवार को अपने प्रियजन को न खोना पड़े. नीलू की यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, मां के त्याग और शिक्षा की ताकत का ऐसा उदाहरण है, जो हजारों युवाओं, खासकर बेटियों को अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा देता है.
अंकित मिश्रा