CBSE को मिला नया बॉस, लोखंडे प्रशांत सीताराम बने चेयरमैन

केंद्र सरकार ने मंगलवार को ही CBSE के पुराने चेयरमैन राहुल सिंह को हटा दिया था. इसके बाद लोखंडे प्रशांत सीताराम को उनकी जगह नियुक्त किया गया है.

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लोखंडे प्रशांत सीताराम CBSE के नए चेयरमैन बने. (Photo: ITG) लोखंडे प्रशांत सीताराम CBSE के नए चेयरमैन बने. (Photo: ITG)

मारिया शकील

  • नई दिल्ली,
  • 02 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:33 PM IST

लोखंडे प्रशांत सीताराम CBSE के नए चेयरमैन होंगे. केंद्र सरकार ने आज उनकी नियुक्ति पर मोहर लगा दी है. इससे पहले सरकार ने CBSE के पुराने चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया था. 12वीं की परीक्षा के मैनेजमेंट पर उठे सवाल, मूल्यांकन प्रक्रियाओं में आ रही व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतों और जवाबदेही से जुड़े प्रश्नों पर ये सरकार का बड़ा एक्शन था.

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अब सरकार ने पुराने चेयरमैन राहुल सिंह और CBSE के सचिव हिमांशु गुप्ता को हटाने के बाद IAS लोखंडे प्रशांत सीताराम को CBSE का नया चेयरमैन बनाया है. जबकि सचिव के पद पर वरिष्ठ नौकरशाह वरुण भारद्वाज की नियुक्ति की गई है. 

लोखंडे प्रशांत सीताराम अभी गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर काम कर रहे हैं. लोखंडे प्रशांत सीताराम ने बीई मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. वे AGMUT कैडर के IAS हैं और उनका गृह राज्य महाराष्ट्र है.  

सीबीएसई के नए चेयरमैन की नियुक्ति के अलावा नए सचिव की भी नियुक्ति की गई है. वरिष्ठ नौकरशाह वरुण भारद्वाज CBSE का नए सचिव होंगे. 

CBSE के पुराने सचिव हिमांशु गुप्ता को प्रशासनिक आधार पर उनके मूल कैडर गृह मंत्रालय में वापसी भेजा जाएगा. जबकि पूर्व चेयरमैन राहुल सिंह की नियुक्ति कृषि और कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के तौर पर की गई है.

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बता दें कि सरकार की ओर से ये कदम OSM ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की खामियों, छात्रों के शिकायतों के बाद उठाया गया है. केंद्र सरकार ने डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी सेवाओं की खरीद की जांच के लिए एक-सदस्यीय जांच समिति गठित करने का भी निर्णय लिया है. 

केंद्र ने कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक-सदस्यीय समिति का गठन किया है. इस समिति का काम OSM सिस्टम के लिए सेवाओं की खरीद से जुड़े मामलों की जांच करना है. इस पैनल से कहा गया है कि वह अपनी रिपोर्ट एक महीने के भीतर सौपें. 

यह कदम छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बाद उठाया गया है. छात्रों और अभिभावकों ने डिजिटल मार्किंग फ्रेमवर्क के तहत तकनीकी समस्याओं, पेमेंट से जुड़ी दिक्कतों और वेरिफिकेशन तथा री-इवैल्यूएशन के नतीजे मिलने में हो रही देरी को लेकर चिंता जताई थी. 

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