सरकारी स्कूल में बच्चों की पिटाई पर शिक्षक सस्पेंड! तो प्राइवेट स्कूलों में कार्रवाई का नियम क्या है?

स्कूल चाहे सरकारी हो या प्राइवेट. बच्चों को पीटना या उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना नियमों के खिलाफ है. कई बार ऐसी खबरें सामने आती हैं कि प्राइवेट स्कूल के टीचर ने बच्चे को मारा. सरकारी स्कूल में ऐसा करने पर नौकरी तक चली जाती है पर क्या आपको प्राइवेट स्कूल के नियम के बारे में पता है.    

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क्या सरकारी और प्राइवेट टीचरों के लिए होते हैं सेम नियम?   क्या सरकारी और प्राइवेट टीचरों के लिए होते हैं सेम नियम?

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 23 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:57 AM IST

स्कूल में बच्चों को पढ़ाने और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी टीचरों के हाथ में होती है. लेकिन कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां शिक्षक ही बच्चों के साथ मारपीट या गलत व्यवहार करते हैं. सरकारी स्कूलों में शिक्षक के खिलाफ ऐसी शिकायत मिलने पर विभागीय जांच से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है. लेकिन सवाल यह है कि अगर यही मामला किसी प्राइवेट स्कूल का हो, तो क्या वहां भी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है? क्या प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों पर भी बच्चों को पीटने से जुड़े वही नियम लागू होते हैं?

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क्या यह नियम प्राइवेट स्कूलों पर भी लागू होता है?

तो बता दें कि हां. निजी स्कूल इससे बाहर नहीं हैं. RTE Act में स्कूल की मान्यता का प्रावधान सरकारी स्कूलों के अलावा निजी स्कूलों पर भी लागू होता है. वहीं, CBSE से जुड़े स्कूलों को CBSE के Affiliation Bye-Laws और सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करना होता है. CBSE ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और हिंसा से बचाव को लेकर स्पष्ट निर्देश भी जारी किए हैं. बोर्ड के नियमों के मुताबिक, स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी को बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है. स्कूल प्रबंधन को शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े अनुशासनात्मक मामलों में लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की जिम्मेदारी भी दी गई है. 

फिर सरकारी और प्राइवेट स्कूल में फर्क क्या है?

फर्क मुख्य रूप से कार्रवाई करने की प्रक्रिया का होता है. सरकारी शिक्षक पर कार्रवाई संबंधित सरकारी सेवा नियमों के तहत हो सकती है. वहीं निजी स्कूल में शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई स्कूल के सेवा नियमों, संबंधित राज्य के कानूनों और अगर स्कूल CBSE से संबद्ध है तो CBSE के नियमों के तहत हो सकती है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि बच्चे की पिटाई पर सिर्फ सरकारी स्कूल के शिक्षक के खिलाफ ही कार्रवाई हो सकती है. निजी स्कूलों में भी बच्चों को शारीरिक दंड या हिंसा से बचाने के नियम लागू होते हैं. हालांकि, किसी निजी स्कूल के शिक्षक को निलंबित करने या सेवा से हटाने की प्रक्रिया सरकारी स्कूल से अलग हो सकती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि स्कूल किस बोर्ड से संबद्ध है, संबंधित राज्य में कौन से नियम लागू हैं और शिक्षक की नियुक्ति किन सेवा शर्तों के तहत हुई है. 

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