एग्जाम शुरू होने के कुछ मिनट पहले आया एडमिट कार्ड, तब तक खत्म हो चुकी थी दो पालियों ये की ये परीक्षा, रो-रोकर हुआ बुरा हाल

दो साल तक सरकारी नौकरी की परीक्षा का इंतजार करने वाले झारखंड के एक अभ्यर्थी का सपना उस समय टूट गया, जब JSSC ने कथित तौर पर परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनट पहले ही उसका एडमिट कार्ड भेजा. अब आयोग की कार्यप्रणाली और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. 

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परीक्षा के कुछ मिनट पहले जारी हुआ रिजल्ट. परीक्षा के कुछ मिनट पहले जारी हुआ रिजल्ट.

सत्यजीत कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 20 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:05 PM IST

सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले झारखंड के लाखों युवाओं के लिए यह मामला सिर्फ एक अभ्यर्थी की कहानी नहीं बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था पर बड़ा सवाल है. पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड के हथिया पंचायत स्थित रामदा गांव के रहने वाले राजेश लोहार का आरोप है कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने उसे फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा का एडमिट कार्ड उस समय भेजा, जब परीक्षा शुरू होने वाली थी.

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राजेश ने साल 2024 में फील्ड वर्कर भर्ती के लिए आवेदन किया था. करीब दो साल तक परीक्षा का इंतजार करने के बाद रविवार (19 जुलाई) को दोपहर 2:59 बजे उसके ई-मेल पर आयोग की ओर से एडमिट कार्ड और परीक्षा की सूचना भेजी. लेकिन तब तक पहली और दूसरी पाली की परीक्षा समाप्त हो चुकी थी और तीसरी पाली शुरू होने में केवल कुछ मिनट बाकी थे. 

लास्ट समय पर भेजी एडमिट कार्ड 

विडंबना यह थी कि राजेश उस समय जमशेदपुर में मजदूरी कर रहा था जबकि उसका परीक्षा केंद्र लातेहार बनाया गया था. दोनों स्थानों के बीच करीब 240 किलोमीटर की दूरी है, जिसे तय करने में लगभग पांच घंटे लगते हैं. ऐसे में कुछ मिनट पहले मिली सूचना के आधार पर परीक्षा केंद्र पहुंचना असंभव था.

राजेश का कहना है कि उसने इस परीक्षा के लिए महीनों तक तैयारी की थी. उसे उम्मीद थी कि यदि समय पर एडमिट कार्ड मिल जाता, तो वह हर हाल में परीक्षा देने जाता. लेकिन आयोग की कथित लापरवाही ने उसके सरकारी नौकरी के सपने पर पानी फेर दिया. 

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खड़े कर रही है कई सवाल 

यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ जाती है. यदि किसी अभ्यर्थी को परीक्षा वाले दिन भी परीक्षा शुरू होने के समय एडमिट कार्ड भेजा जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या आयोग यह बताएगा कि सूचना समय पर क्यों नहीं भेजी गई? और यदि गलती आयोग की है, तो क्या उस अभ्यर्थी को न्याय मिलेगा? झारखंड में सरकारी भर्तियों में पहले ही देरी और अनियमितताओं को लेकर युवाओं में नाराजगी रही है.

ऐसे में यह मामला भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़ा कर रहा है. यदि राजेश लोहार के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि एक बेरोजगार युवक से उसके रोजगार का अवसर छिन जाने का मामला है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या JSSC इस मामले की निष्पक्ष जांच कर अपनी गलती स्वीकार करेगा या फिर एक और अभ्यर्थी की मेहनत फाइलों में दबकर रह जाएगी?

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