प्लेन में सब जल जाता है... मगर 1000°C तापमान की आग में कैसे बच जाता है ब्लैक बॉक्स?

AI-171 फ्लाइट का ब्लैक बॉक्स बीजे मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की छत से बरामद कर लिया गया है. ब्लैक बॉक्स और DVR एअर इंडिया बोइंग 787 ड्रीमलाइनर दुर्घटना की जांच करने में महत्वपूर्ण है.

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विमान हादसे के बाद ब्लैक बॉक्स कैसे बच जाता है. विमान हादसे के बाद ब्लैक बॉक्स कैसे बच जाता है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2025,
  • अपडेटेड 10:01 PM IST

अहमदाबादा प्लेन क्रैश कैसे हुआ? कहां गलती हुई जिसकी वजह से 265 लोगों की जान चली गई? प्लेन के कॉकपिट में क्या-क्या हुआ? अहमदाबादा टू लंदन फ्लाइट AI171 का ब्लैक बॉक्स और DVR की जांच के बाद ऐसे कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं. दुखद दुर्घटना के बाद ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है. एआई-171 विमान का ब्लैक बॉक्स बीजे मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की छत पर मिला, जहां बोइंग 787 ड्रीमलाइनर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था.

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ब्लैक बॉक्स और DVR एअर इंडिया बोइंग 787 ड्रीमलाइनर दुर्घटना की जांच करने में महत्वपूर्ण है, जहां विमान 1000 डिग्री सेल्सियस की आग में जल गया था. फ्लाइट रिकॉर्डर, जिसे आमतौर पर ब्लैक बॉक्स कहा जाता है, विमान हादसों की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण गैजेट है. यह तकनीक 1930 के दशक में फ्रांसीसी इंजीनियर फ्रांस्वा हुसैनो ने शुरू की थी, जब उन्होंने फोटोग्राफिक फिल्म पर विमान के दस पैरामीटर्स को रिकॉर्ड करने वाला एक इक्विपमेंट बनाया. तब से लेकर आज तक, ब्लैक बॉक्स की तकनीक में लगातार सुधार हुआ है. 

ऑरेंज रंग का होता है, फिर ब्लैक बॉक्स क्यों कहते हैं?
शुरुआत में इसे "ब्लैक बॉक्स" इसलिए कहा गया क्योंकि यह एक प्रकाश-रोधी डिब्बे में था, लेकिन इसका रंग हमेशा ऑरेंज (नारंगी) रहा, ताकि हादसे के बाद इसे आसानी से ढूंढा जा सके. आज के ब्लैक बॉक्स ठोस अवस्था वाली मेमोरी चिप्स का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें कोई हिलने-डुलने वाला हिस्सा नहीं होता, जिससे हादसे में टूटने का खतरा कम होता है.

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फोटो सोर्स- https://www.airbus.com

यह भी पढ़ें: Ahmedabad Plane Crash: प्लेन के मलबे से मिला DVR... क्या यही है ब्लैक बॉक्स और क्या है इसका काम?

ब्लैक बॉक्स क्या करता है?
ब्लैक बॉक्स में दो मुख्य हिस्से होते हैं- फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR), जो उड़ान की टेक्निकल डिटेल्स जैसे ऊंचाई, स्पीड और इंजन की स्थिति रिकॉर्ड करता है और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR), जो कॉकपिट की आवाजें और बातचीत रिकॉर्ड करता है. एअर इंडिया हादसे में DVR, जो ब्लैक बॉक्स से अलग है, विमान के विभिन्न कैमरों से सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड करता है, जिसमें कॉकपिट और केबिन की फुटेज शामिल हैं. यह जांच में अतिरिक्त जानकारी देता है.

3,500 पैरामीटर्स को 25 घंटे तक स्टोर कर सकता ब्लैक बॉक्स
पुराने A300B2 के ब्लैक बॉक्स केवल 100 पैरमीटर्स रिकॉर्ड कर सकते थे, जबकि आज का A350 का ब्लैक बॉक्स 3,500 पैरामीटर्स को 25 घंटे तक स्टोर कर सकता है. ब्लैक बॉक्स आग, विस्फोट, टक्कर और पानी से बच सकता है, जिससे हादसे के बाद भी डेटा सुरक्षित रहता है. यह हादसों के कारणों को समझने और भविष्य में उन्हें रोकने के लिए जरूरी है.

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यह भी पढ़ें: पायलट नहीं, ये शख्स करता है MAYDAY कॉल... समझिए प्लेन के कॉकपिट का मैनेजमेंट!

आग, टक्कर और पानी से कैसे बच जाता है ब्लैक बॉक्स?
ब्लैक बॉक्स को बेहद कठिन परिस्थितियों में भी टिकने के लिए बनाया जाता है. इन्हें टाइटेनियम या स्टेनलेस स्टील जैसी मजबूत मटेरियल में लपेटा जाता है, जो 3,400 गुना गुरुत्व बल तक झेल सकता है. ये 1,100 डिग्री सेल्सियस तक की आग को एक घंटे तक सहन कर सकते हैं और 6,000 मीटर गहरे पानी में 30 दिन तक काम कर सकते हैं. पानी में इन्हें खोजने के लिए इनमें सिग्नल भेजने वाले बीकन भी लगे होते हैं.

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एअर इंडिया फ्लाइट AI-171 हादसे में डीवीआर का मलबे से मिलना जांच के लिए महत्वपूर्ण है. दिल्ली में हाल ही में शुरू हुए डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर लैब में डीवीआर और ब्लैक बॉक्स के डेटा का विश्लेषण होगा. यह लैब क्षतिग्रस्त रिकॉर्डर को ठीक कर डेटा निकाल सकती है, जो हादसे के कारण जैसे मैकेनिकल खराबी या पायलट के कार्यों को समझने में मदद करता है.

हालांकि ब्लैक बॉक्स बहुत भरोसेमंद हैं, लेकिन कभी-कभी क्षति के कारण डेटा अधूरा रह सकता है. फिर भी, इनकी मजबूत बनावट, आग और पानी से सुरक्षा के कारण ये हादसों के कारणों को समझने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं.

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